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प्रशासनिक नपुंसकता या नई त्रासदी का इंतजार?: अस्पताल की अवैध ड्रिलिंग पर निगम ने ओढ़ी चुप्पी की चादर

KHULASA FIRST

संवाददाता

31 जनवरी 2026, 1:34 अपराह्न
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
क्या इंदौर का प्रशासन केवल लाशों के ढेर और मातम का इंतज़ार करता है? भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से हुई मौतों और वहां बिछी 31 अर्थियों की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि इंदौर नगर निगम की संवेदनहीनता ने शहर को एक और भयावह खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

बेखौफ जारी भारी-भरकम ड्रिलिंग मशीनों का तांडव
शहर के रसूखदार केयर सीएचएल अस्पताल में बिना किसी वैध अनुमति के भारी-भरकम ड्रिलिंग मशीनों का तांडव बेखौफ जारी है, जो न केवल नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है।

रसूख के आगे घुटने टेक चुका सिस्टम
यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि रसूख के आगे घुटने टेक चुके सिस्टम की वो नग्न तस्वीर है, जहाँ आम आदमी के लिए कानून का डंडा और खास के लिए मौन सहमति का कालीन बिछाया जाता है।

अस्पताल परिसर में गूँजता मशीनों का शोर और कंपन चीख-चीखकर अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठा रहा है, मगर निगम के गलियारों में बैठे जिम्मेदारों ने अपनी आँखों पर धृतराष्ट्र जैसी पट्टी बाँध ली है।

एक महीने पहले मिला था नोटिस
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की पूरी फौज इस तमाशे की मूकदर्शक बनी हुई है। करीब एक महीने पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अस्पताल को नोटिस थमाकर 15 दिनों में काम रोकने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन केयर सीएचएल प्रबंधन ने इस सरकारी आदेश को रद्दी के टुकड़े से ज्यादा अहमियत नहीं दी।

साठगांठ की ओर इशारा करता है
सरकारी आदेशों को ठेंगे पर रखने वाले इस अस्पताल प्रबंधन को आखिर किसका अभयदान प्राप्त है? आयुक्त क्षितिज सिंघल के पास इस अवैध निर्माण के साक्ष्य और वीडियो बार-बार पहुँचे, फिर भी कार्रवाई का शून्य होना किसी बड़ी और गहरी साठगांठ की ओर सीधा इशारा करता है।

क्या नगर निगम के अधिकारी यह भूल गए हैं कि भागीरथपुरा में उनकी इसी तरह की अनदेखी ने दर्जनों घरों के चिराग बुझा दिए थे? शहर की सुरक्षा के खोखले दावों के बीच केयर सीएचएल जैसे संस्थानों को दी गई यह खुली छूट आम नागरिकों की जान से सीधा खिलवाड़ है।

अस्पताल के प्रति उनका विशेष समर्पण शहर के माथे पर कलंक
जब रसूखदार संस्थानों के दबाव में नियम पंगु हो जाएं और प्रशासन लकवाग्रस्त, तो जनता को समझ लेना चाहिए कि वह अब असुरक्षित है। प्रशासन की यह जड़ता और अस्पताल के प्रति उनका विशेष समर्पण शहर के माथे पर कलंक है।

इस चुप्पी को प्रायोजित अपराध के तौर पर दर्ज किया जाएगा
सवाल यह है कि क्या अधिकारियों की नींद तभी खुलेगी जब भागीरथपुरा जैसी कोई और बड़ी जनहानि सामने आएगी? अब वक्त आ गया है कि रसूख की इस अवैध ड्रिलिंग को तत्काल रोका जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, वरना इंदौर के इतिहास में इस चुप्पी को प्रायोजित अपराध के तौर पर दर्ज किया जाएगा।

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