अपर कलेक्टर ने पकड़ी फाइल-दर-फाइल कमियां: हातोद तहसील न्यायालय का औचक निरीक्षण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अपर कलेक्टर (आईएएस) नवजीवन विजय पंवार ने गुरुवार को हातोद तहसील का औचक निरीक्षण किया। एसडीएम न्यायालय में राजस्व प्रकरणों की सुनवाई और निराकरण प्रक्रिया के निरीक्षण में गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े आवेदनों को दर्ज करने में ही कई-कई दिन की देरी व कई मामलों में निराकरण की समय-सीमा का खुलेआम उल्लंघन पाया।
अधिकारियों ने आवेदन देर से प्राप्त होने का हवाला दिया, लेकिन अगस्त से लंबित मामलों में अन्य जिलों और तहसीलों को वारिस सत्यापन के लिए पत्र लिखने के बाद दोबारा पत्राचार नहीं होने पर अपर कलेक्टर चकित रह गए। उन्होंने प्रत्येक फाइल का गहन परीक्षण कर सभी कमियों को चिह्नित किया है। संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
पटवारी रिपोर्ट में महीनों की देरी, आदेशों पर अमल नहीं
तहसील न्यायालय में दर्ज अधिकांश मामलों में पटवारियों से रिपोर्ट मांगी गई, जो 2 से 4 माह बाद भी प्रस्तुत नहीं की जा रही हैं। सीमांकन और बंटवारा प्रकरणों में भी गंभीर खामियां मिलीं। कई मामलों में तहसीलदार के आदेशों पर अमल नहीं किया गया। पंवार ने ऐसे सभी मामलों में संबंधित पटवारियों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
एसआईआर अभियान बड़ा कारण: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में अधिकारियों की व्यस्तता के चलते राजस्व आवेदनों के निराकरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा बार-बार निर्देश देने के बावजूद समयाभाव के चलते बड़ी संख्या में समय-सीमा वाले आवेदन लंबित हैं। साइबर तहसील के प्रकरणों का निराकरण भी लंबे समय से अटका है।
राजस्व वसूली भी प्रभावित: वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले कलेक्टर ने राजस्व वसूली पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। छह एसडीएम को तहसीलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसडीएम बड़े बकायादारों से लगातार संपर्क कर राशि जमा कराने का प्रयास कर रहे हैं।
इधर, 14 फरवरी तक चलने वाले एसआईआर अभियान में लगभग सभी तहसीलों के अधिकारी, राजस्व निरीक्षक और पटवारी लगे हैं। मल्हारगंज, महू और जूनी इंदौर तहसील में अधिकारी सुनवाई, वसूली और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में जूझ रहे हैं।
जूनी इंदौर में तहसीलदार प्रीति मिश्रा, अपर तहसीलदार कमलेश कुशवाहा और नायब तहसीलदार धीरेश सोनी सक्रिय हैं, लेकिन एसडीएम पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ होने से प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही।
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