तीन-तीन नोटिस के बाद भी गतिविधियां जारी: बड़ा सराफा में अवैध निर्माण का खेल; नियमों की खुली अनदेखी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के व्यस्ततम व्यापारिक क्षेत्र बड़ा सराफा में नियमों को दरकिनार कर अवैध बहुमंजिला व्यावसायिक भवन का निर्माण करने के मामले का खुलासा किया जा चुका है। राजमोहल्ला जोन क्रमांक-2 वार्ड-69 में स्थित भूखंड क्रमांक 44 और 45 पर स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण, बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। यह सीधे तौर पर मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 301 का उल्लंघन माना जा रहा है।
भूखंड क्रमांक 44, बड़ा सराफा –श्रीनाथ एंटरप्राइजेस (पार्टनरशिप), श्रेय जैन पिता मनीष जैन। भूखंड क्रमांक 45 (पुराना 44), बड़ा सराफा– सुजाता जैन पति मधु कुमार जैन, इन दोनों भूखंडों पर ग्राउंड + 3 फ्लोर व्यावसायिक भवन की अनुमति दी गई थी।
तीन बार नोटिस, फिर भी निर्माण जारी
नगर निगम द्वारा नक्शे के विपरीत निर्माण को लेकर अब तक तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य न केवल जारी रहा, बल्कि भवन का व्यावसायिक उपयोग भी प्रारंभ कर दिया गया। नियमों के अनुसार कार्य पूर्ण होने के बाद अधिभोग अनुमति प्राप्त किए बिना भवन का उपयोग प्रतिबंधित है।
जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, वह दान की जमीन बताई जा रही है। आरोप है कि अवैध बेसमेंट का निर्माण, बैक लाइन पर कब्जा, स्वीकृत नक्शे के विपरीत चौथी मंजिल का निर्माण, छोटी-छोटी दुकानों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। जबकि इस प्रकार के निर्माण की अनुमति नगर निगम स्पष्ट रूप से नहीं देता।
प्लिंथ लेवल तक की जांच नहीं, सर्टिफिकेट लंबित
निर्माण प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण प्लिंथ लेवल (कुर्सी हाइट) की जांच होती है। नियमों के अनुसार बेस डालते समय बिल्डिंग इंस्पेक्टर और कंसल्टेंट इंजीनियर की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। प्लिंथ लेवल सर्टिफिकेट जारी होना अनिवार्य है, लेकिन इस प्रकरण में न तो सही निरीक्षण हुआ और न ही प्लिंथ लेवल प्रमाण पत्र जारी किया गया। इससे निर्माण की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंसल्टेंट इंजीनियर पर सवाल
इस भवन के कंसल्टेंट इंजीनियर आदर्श वर्मा हैं। नगर निगम के नियमों के अनुसार कंसल्टेंट इंजीनियर अपने लाइसेंस के आधार पर यह गारंटी देता है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
आरोप है कि करोड़ों रुपए के कथित भ्रष्टाचार में लिप्त मस्टरकर्मी असलम खान का कार्यालयीन कार्य भी आदर्श वर्मा द्वारा संभाला जाता है। ऐसे में मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक ही निकासी, बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक बिल्डिंग में केवल एक ही निकासी रखी गई है। यदि भविष्य में आगजनी या कोई अन्य हादसा होता है तो जान-माल की भारी क्षति की आशंका है। मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 86 के अनुसार अग्निशमन व्यवस्था और संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र अनिवार्य है। इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
डेढ़ लाख रुपए प्रति स्क्वेयर फीट में दुकानों की बिक्री
नियमों के उल्लंघन और अधूरे प्रमाण पत्रों के बावजूद इस भवन में लगभग 1.5 लाख रुपए प्रति स्क्वेयर फीट की दर से दुकानों की बिक्री की जा रही है। खुलेआम हो रही बिक्री यह संकेत देती है कि निर्माण को संरक्षण प्राप्त है।
भूमि विकास नियम 2012 की शर्तें और उल्लंघन
मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 27 के तहत भवन अनुज्ञा शर्तों सहित दी जाती है, जिनमें प्रमुख हैं स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण, प्लिंथ लेवल निरीक्षण अनिवार्य, जल संरक्षण सत्यापन प्रमाण पत्र, भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग, पार्किंग व्यवस्था नियम 81 के अनुसार अग्निशमन विभाग से एनओसी, ऑनलाइन सूचना (परिशिष्ट M-1, M-2, M-3, M-4), पौधारोपण एवं पर्यावरणीय प्रावधान, स्ट्रक्चर इंजीनियर की देखरेख
-यदि शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियम 25 के अंतर्गत अनुज्ञा निलंबित या निरस्त की जा सकती है।
नियम विरुद्ध निर्माण पर कार्रवाई की जाएगी
नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने कहा कि नियम विरुद्ध निर्माण पर कार्रवाई की जाएगी, फिर वह कोई भी हो, नियम सभी के लिए समान हैं। उन्होंने बीओ द्वारा दिए गए नोटिस के बाद कार्रवाई न होने की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
तीन नोटिस के बाद भी निर्माण क्यों नहीं रुका?
बिना सीसी और ओसी के व्यावसायिक गतिविधियां कैसे शुरू हुईं?
प्लिंथ लेवल निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?
क्या कंसल्टेंट इंजीनियर की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी?
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