शराब माफिया अरोरा और दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई: ‘खुलासा फर्स्ट’ की खबर पर सरकार ने लगाई मुहर; मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में दिए आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नीमच।
डॉ. मोहन सरकार ने नीमच के बहुचर्चित सरोवर होटल जमीन मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया है। ‘खुलासा फर्स्ट’ द्वारा 20 नवंबर 2025 को प्रकाशित की गई विस्तृत खबर पर आधिकारिक मुहर लगाते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी संपत्तियों को निजी स्वार्थ के लिए लुटाने वाले माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के दिन अब लद चुके हैं।
विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र के दौरान जब नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार ने इस प्रकरण से जुड़े पुख्ता दस्तावेज और चौंकाने वाले प्रमाण सदन के पटल पर रखे तो पूरा सदन सन्न रह गया। मामले की गंभीरता और नियमों की अनदेखी को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तत्काल प्रभाव से पट्टा निरस्त करने और इस पूरी धोखाधड़ी में शामिल पट्टाधारक सहित तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कर आपराधिक प्रकरण चलाने के आदेश जारी कर दिए।
अनियमितता का पूरा विवरण उस समय जनमानस के सामने आया जब विधायक परिहार ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार को घेरा। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि नीमच शहर के हृदय स्थल सीआरपीएफ रोड पर स्थित जिस बेशकीमती शासकीय भूमि को वर्ष 1986 में नगर सुधार न्यास द्वारा मात्र 3 साल के लिए होटल संचालन के उद्देश्य से आवंटित किया गया था, उसे वर्ष 2012 में तत्कालीन नगरपालिका अधिकारियों ने नियमों को पूरी तरह ताक में रख 30 साल के लिए शराब कारोबारी अशोक अरोरा को सौंप दिया।
आश्चर्यजनक तथ्य यह कि 11,300 वर्गफीट की इस अत्यंत मूल्यवान भूमि और उस पर निर्मित चार मंजिला भव्य भवन का किराया महज 10,200 रुपए प्रतिमाह तय किया गया। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार इस संपत्ति की कीमत 11 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है, जबकि इसका वास्तविक किराया भी सवा लाख रुपए प्रतिमाह से ऊपर होना चाहिए।
‘खुलासा फर्स्ट’ की पड़ताल में पूर्व में ही यह तथ्य सामने आ चुके थे कि इस पूरे आवंटन के पीछे की नीयत और प्रक्रिया दोनों ही दूषित थीं। जांच रिपोर्ट के अनुसार नियमों के विरुद्ध जाकर किए गए इस पट्टा हस्तांतरण के बाद होटल संचालन के मूल उद्देश्य को भी पूरी तरह भुला दिया गया। जिस स्थान पर पर्यटकों और अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था होनी थी, उसका उपयोग अवैध शराब सिंडिकेट की गतिविधियों और अनैतिक कार्यों के लिए किया जाने लगा।
रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा भी हुआ कि रसूख के बल पर महज नीमच जिले में 52 दुकानों के लाइसेंस की आड़ में 110 से अधिक अवैध ठिकानों पर शराब बिक्री का विशाल जाल फैलाया गया, जिससे शासन को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ रुपए के आबकारी राजस्व की चपत लग रही है। वर्ष 2025 में किए अनुबंध को 6 साल पुराने बैकडेट यानी वर्ष 2019 से प्रभावी दिखाकर पूर्व के अवैध कब्जे को नियमित करने का प्रयास किया गया।
विधानसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और माना कि पट्टा आवंटन की प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया भारी भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस लूट में शामिल तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी, राजस्व अमले और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच कर उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब नीमच प्रशासन पट्टा निरस्तीकरण की अंतिम वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण कर रहा है, जिसके बाद इस बेशकीमती संपत्ति को पुनः सरकारी आधिपत्य में लेकर जनहित में उपयोग किया जाएगा।
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