सवाल पर हुई कार्रवाई: अब हो रही सिफारिश; महालक्ष्मी नगर में होटलें सील करने पर सियासत गरमाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

विधायक महेंद्र हार्डिया व्यापारियों के साथ निगम आयुक्त से मिले, कार्रवाई के तरीके पर उठाए सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महालक्ष्मी नगर और आसपास की कॉलोनियों में आवासीय भवनों में संचालित हो रहे होटलों और होस्टलों पर नगर निगम की कार्रवाई अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गई है।
16 होटलों को सील किए जाने के बाद क्षेत्रीय विधायक महेंद्र हार्डिया, एमआईसी मेंबर, पार्षद और व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल से मिलने पहुंचा।
बैठक में कार्रवाई के चयनात्मक तरीके, रहवासी शिकायतों और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई।
निगम मुख्यालय में हुई बैठक में विधायक हार्डिया के साथ एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, नंदू पहाड़िया और स्थानीय पार्षद महेश जोशी भी थे। पहले आयुक्त के कैबिन में जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई, जिसके बाद होटल व्यवसायियों को अंदर बुलाया गया। व्यापारियों ने कुछ मिनटों में अपनी बात रखी और बाहर आ गए।
रहवासियों की शिकायत पर कार्रवाई की मांग की थी: हार्डिया
विधायक महेंद्र हार्डिया ने कहा कि महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर, सांई कृपा और आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों द्वारा लंबे समय से शिकायत की जा रही थी कि आवासीय क्षेत्रों में संचालित होस्टल और होटल के कारण क्षेत्र का वातावरण बिगड़ रहा है और ये अशांति का कारण बन रहे हैं।
शिकायतें मूल रूप से होस्टलों और अवैध गतिविधियों को लेकर थीं, लेकिन निगम ने उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करते हुए बांबे हॉस्पिटल के सामने स्थित छोटे व्यापारियों और होटलों पर कार्रवाई कर दी। विधायक ने कहा इस विषय पर आयुक्त से चर्चा हुई है और एक-दो दिन में निर्णय आ सकता है।
वार्ड-37 के पार्षद महेश जोशी ने कहा क्षेत्र की विभिन्न कॉलोनियों में संचालित होटल और होस्टलों को लेकर रहवासियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इनमें आरोप था कि कई स्थानों पर अनैतिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और लड़के-लड़कियों द्वारा होटल घंटों के हिसाब से उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने बताया इस संबंध में नगर निगम, भवन अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को लगातार पत्र लिखे, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में क्षेत्रीय विधायक को स्थिति से अवगत कराया, तब जाकर निगम आयुक्त का दौरा कराया गया।
मुख्य शिकायत वाले होस्टल बचे, बाहर के होटल सील कर दिए
पार्षद जोशी ने आरोप लगाया कि जिन होस्टलों और भवनों के खिलाफ रहवासियों ने मूल शिकायतें की थीं, उन पर पहले कार्रवाई होना चाहिए थी, लेकिन कॉलोनियों के बाहर मुख्य मार्ग पर स्थित होटलों को सील कर दिया गया। उन्होंने बताया क्षेत्र में करीब 70 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
पार्षद ने कहा आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग ही मूल विवाद का कारण है। नगर निगम को ऐसे मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के साथ ही निर्माणाधीन भवनों पर समय रहते रोक लगाना थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि भवन अधिकारी (बीओ) और बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआई) की मिलीभगत से कई स्थानों पर अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं।
शिकायतों और मौका-मुआयना कराने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन आयुक्त शिवम वर्मा का दौरा भी कराया गया था, जिन्होंने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को गलत माना, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है।
यह है पूरा मामला
निगम ने हाल ही में महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर, सांई कृपा, स्कीम-94 सेक्टर ई, बी और वीणा नगर में आवासीय भवनों में संचालित 16 होटलों को सील किया था। इस दौरान भवन अधिकारी व सहायक राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।
दरअसल, विधायक महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा में जानकारी मांगी थी कि क्षेत्रों में आवासीय भवनों में संचालित होटलों और होस्टलों को किसने अनुमति दी है। इसके जवाब में निगम ने विस में स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में होटल संचालन के लिए भवन अनुज्ञा जारी नहीं की गई।
विस में जवाब प्रस्तुत होने के बाद निगम ने निर्माण अनुमति के विपरीत संचालित होटलों के खिलाफ 16 होटलों पर कार्रवाई की। सूत्रों के मुताबिक इस अवैध गतिविधियों के संचालन में बड़ा खेल होने की संभावना जताई जा रही है।
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