माई रेवा के तट पर उमड़ा जनसैलाब नर्मदे हर...जीवनभर: मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदाजी की जयंती आज
KHULASA FIRST
संवाददाता

‘नरबदा तू तो बहती जा...'
देवी अहिल्या की आस्था स्थली महेश्वर में होगा चुनरी मनोरथ, खेड़ी घाट पर दीप उत्सव
इंदौर में श्रद्धा-आस्था का सैलाब, उत्साह से मन रही नर्मदा जयंती, प्रतिमा पर दूध से किया अभिषेक
ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में महा-महोत्सव, पूजन-अभिषेक, रात को कांकड़ा आरती से जगमग होगा ओंकार पर्वत
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
माई, ये आपके कलकल प्रवाह पर बंधन नहीं स्वीकार। अनादिकाल से आपकी अठखेलियों का साक्षी रहा है आपका तेरह सौ तेरह किलोमीटर का यात्रा मार्ग। आपकी ये यात्रा कितनी नयनाभिराम थी। धारा जी का वो अद्भुत दृश्य, भूले न भूलता जो अब डूब गया।
ऐसे अनेक सुंदर प्रवाह क्षेत्र-स्थल, ग्राम-नगर-कस्बे-शहर आज जलमग्न हैं। फिर भी आपकी यात्रा दर्शनीय तो आज भी है भगवती, लेकिन अब आप जगह-जगह बंधक बना दी गई हैं। कभी भगवान सहस्त्रबाहु की हजार भुजाएं भी आपका मचलकर चलना नहीं रोक पाई थीं।
आपकी अल्हड़ चाल को रोकने का दुस्साहस और उसकी हार आज भी सहस्त्र धारा के नाम से विद्यमान है। हजार भुजाओं को धता बता आपका प्रबल वेग थमा नहीं और वह अनेकानेक धाराओं के साथ गतिमान रहा, लेकिन अब अनेक बंधनों में आप बंधने को मजबूत हैं।
हम जानते हैं मैया कि आपको कोई बांध नहीं सकता। आपका प्रवाह कोई ताकत रोक नहीं सकती। न धरा की, न गगन की, फिर भी आप सहजता से इन बांधों में बंध गई हो तो उसका एक ही कारण हैं और वह हैं आपका हम पुत्रों के प्रति दयालुता का अटूट भाव।
आप जानती है, आपकी संतती को इस कलयुग में आपके निर्मल जल की अत्यंत आवश्यकता है। आपके भरोसे ही तो आपके तीरे तीरे ग्राम, नगर, कस्बे व शहर आबाद हुए हैं। सहस्त्रो सहस्र कोटि कंठों की प्यास आप बुझा रही हैं। आपसे ही सब धन-धान्य के भंडार भरे हुए हैं।
खेत-खलिहान हरे-भरे हैं। घर-घर, जन-जन समृद्धि-वैभव है। ये अहिल्या नगरी इंदौर तो आपके ऋण से कभी उऋण हो ही नहीं सकती। आपके उपकार से ही आज जगत में इंदौर की जय-जयकार है।
जन्म जयंती पर हे पुण्य सलिला, हे शंकर पुत्री, हे मेकलसुता, हे माई रेवा, हे माई नरबदा..आपको कोटि दंडवत प्रणाम। इसी आशा व विश्वास के साथ- ‘नरबदा तू तो बहती जा...'।
माई, ये आपके कलकल प्रवाह पर बंधन नहीं स्वीकार। अनादिकाल से आपकी अठखेलियों का साक्षी रहा है आपका तेरह सौ तेरह किलोमीटर का यात्रा मार्ग। आपकी ये यात्रा कितनी नयनाभिराम थी। धारा जी का वो अद्भुत दृश्य, भूले न भूलता जो अब डूब गया।
ऐसे अनेक सुंदर प्रवाह क्षेत्र-स्थल, ग्राम-नगर-कस्बे-शहर आज जलमग्न हैं। फिर भी आपकी यात्रा दर्शनीय तो आज भी है भगवती, लेकिन अब आप जगह-जगह बंधक बना दी गई हैं। कभी भगवान सहस्त्रबाहु की हजार भुजाएं भी आपका मचलकर चलना नहीं रोक पाई थीं।
आपकी अल्हड़ चाल को रोकने का दुस्साहस और उसकी हार आज भी सहस्त्र धारा के नाम से विद्यमान है। हजार भुजाओं को धता बता आपका प्रबल वेग थमा नहीं और वह अनेकानेक धाराओं के साथ गतिमान रहा, लेकिन अब अनेक बंधनों में आप बंधने को मजबूत हैं।
हम जानते हैं मैया कि आपको कोई बांध नहीं सकता। आपका प्रवाह कोई ताकत रोक नहीं सकती। न धरा की, न गगन की, फिर भी आप सहजता से इन बांधों में बंध गई हो तो उसका एक ही कारण हैं और वह हैं आपका हम पुत्रों के प्रति दयालुता का अटूट भाव।
आप जानती है, आपकी संतती को इस कलयुग में आपके निर्मल जल की अत्यंत आवश्यकता है। आपके भरोसे ही तो आपके तीरे तीरे ग्राम, नगर, कस्बे व शहर आबाद हुए हैं। सहस्त्रो सहस्र कोटि कंठों की प्यास आप बुझा रही हैं। आपसे ही सब धन-धान्य के भंडार भरे हुए हैं।
खेत-खलिहान हरे-भरे हैं। घर-घर, जन-जन समृद्धि-वैभव है। ये अहिल्या नगरी इंदौर तो आपके ऋण से कभी उऋण हो ही नहीं सकती। आपके उपकार से ही आज जगत में इंदौर की जय-जयकार है।
जन्म जयंती पर हे पुण्य सलिला, हे शंकर पुत्री, हे मेकलसुता, हे माई रेवा, हे माई नरबदा..आपको कोटि दंडवत प्रणाम। इसी आशा व विश्वास के साथ- ‘नरबदा तू तो बहती जा...'।
म ध्यप्रदेश की जीवनीदायिनी की आज जयंती हैं। जिस पुण्य सलिला के दम पर इस प्रदेश की पहचान है उस माई रेवा के तट पर आज अलसुबह जनसैलाब उमड़ा हुआ है। हर तरफ बस एक ही जयघोष गूंज रहा है नर्मदे हर...जीवनभर। हर प्रार्थना में एक ही स्वर शामिल है- नरबदा तू तो बहती जा...।
आपका अनवरत बहाव ही जन-जन के जीवन को गतिमान रखेगा, इसलिए इन दिनों माई की परिक्रमा पर सैकड़ों-हजारों कदम गतिमान हैं। मानव की इस आस्था के बल पर ही भगवती नर्मदा भी अपने अस्तित्व की एक-एक बूंद हमारी, आपकी अंजुरी में परोस देती हैं।
शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर मेकलसुता की आराधना में रविवार को अलसुबह से समूचा निमाड़-मालवा-महाकौशल अंचल भक्ति में निमग्न हो गया है। न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि गुजरात-महाराष्ट्र में भी उत्साह से मन रहा है नर्मदा जयंती का महोत्सव।
पुण्य सलिला के दोनों तटों पर उमड़े श्रद्धालुओं का सैलाब साक्षी है कि नर्मदा पुत्र अभी इतने स्वार्थी नहीं हुए हैं कि वह अपनी जीवनदायिनी नदी को बिसरा दें। ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर तो दुल्हन जैसी दमल रही है। यहां हर बार की तरह महा-महोत्सव मन रहा है।
मैया का पूजन-अभिषेक तो दिनभर होगा ही, रात को कांकड़ा आरती से ओंकार पर्वत भी जगमग होगा। प्रातः स्मरणीय मातुश्री देवी अहिल्या की आस्था स्थली महेश्वर में अनेक चुनरी मनोरथ होना शुरू भी हो गए हैं। बड़वाह के समीप खेड़ी घाट पर संध्या को दीप उत्सव की तैयारी है।
मां के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर विसर्जन स्थल खंभात की खाड़ी तक के दोनों तट पर उत्सव मन रहा है। नर्मदापुरम यानी होशंगाबाद का नयनाभिराम सेठानी घाट सतरंगी रोशनी से नहा उठा है। मैया नर्मदा के नाभि स्थल नेमावर में तो ब्रह्म मुहूर्त से ही आस्था की डुबकी लगना शुरू हो गई है।
इंदौर भी अपनी नर्मदा मैया के प्रति सुबह से नतमस्तक हो चला है। माई के मंदिर व प्रतिमा स्थल पर श्रद्धा-आस्था का सैलाब है। उत्साह से मन रही नर्मदा जयंती, प्रतिमा पर दूध से अभिषेक हो रहा है।
महापौर ने दूध और जल से अभिषेक कर किया पूजन
इंदौर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नर्मदा प्रतिमा पर दूध एवं जल से अभिषेक कर विधिवत पूजन किया। इसके पश्चात वे महाआरती में शामिल हुए और मां नर्मदा से शहर की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में इंदौर के नागरिक नर्मदा प्रतिमा स्थल पर पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का पूजन-अभिषेक कर आस्था व्यक्त की। नर्मदे हर… के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने आयोजन को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का रूप दे दिया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा मां नर्मदा को मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कहा जाता है। उनकी जयंती न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह जल, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी संदेश देती है। आज का यह आयोजन इसी भावना को सशक्त करता दिखाई दिया।
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