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सूदखोरी के जाल में फंसे युवा: फ्रंट फेस की तलाश; क्राइम ब्रांच की जांच में खुली परतें, आईडी सप्लायर और असली अकाउंट होल्डर जल्द होंगे गिरफ्तार

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 मई 2026, 4:01 pm
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सूदखोरी के जाल में फंसे युवा

आईपीएल सट्टे के सिंडिकेट का हुआ खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में आईपीएल सट्टेबाजी का नेटवर्क सिर्फ मोबाइल और एप तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा है। जहां सट्टा, उधारी और सूदखोरी एक ही चेन का हिस्सा हैं।

क्राइम ब्रांच द्वारा एरोड्रम इलाके से पकड़े गए आरोपी शुभम उर्फ मोनू यादव से हुई पूछताछ में ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो इस नेटवर्क की गहराई का खुलासा करते हैं।

अब जांच की सूई दो और अहम किरदारों पर आकर टिक गई है। एक जो सट्टे की आईडी और पासवर्ड सप्लाई करता है और दूसरा, जिसके नाम पर पूरी सट्टेबाजी का डिजिटल ढांचा खड़ा किया गया। डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, धर्मराज कॉलोनी से पकड़ा गया शुभम सिर्फ एक ऑपरेटर नहीं, बल्कि सट्टा और सूदखोरी के बीच की कड़ी था।

वह न केवल लोगों को मैचों में पैसा लगाने के लिए उकसाता था, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद ही उन्हें रकम उधार देता और फिर उस पर भारी ब्याज वसूलता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह क्रेडिट सट्टा मॉडल कई युवाओं को कर्ज के जाल में फंसा रहा था।

रंगेहाथ गिरफ्तारी लाइव ऑपरेशन
क्राइम ब्रांच की टीम जब शुभम के ठिकाने पर पहुंची, तब वह टीवी पर लाइव मैच देख रहा था और उसी दौरान मोबाइल के जरिए सट्टा ऑपरेट कर रहा था। यह पूरी कार्रवाई प्लानिंग के तहत की गई थी, जिसमें टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ने के लिए सही समय का इंतजार किया। मौके से मोबाइल फोन, हिसाब-किताब का डिजिटल डेटा और करीब एक लाख रुपए जब्त किए गए।

मोबाइल में छिपा करोड़ों का खेल
जांच में सबसे बड़ा सुराग शुभम के मोबाइल फोन से मिला है। शुरुआती डिजिटल स्कैन में लाखों रुपए के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। ये लेनदेन अलग-अलग बैंक खातों और ई-वॉलेट्स के जरिए किए गए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि नेटवर्क मल्टी-लेयर में काम कर रहा था। अब क्राइम ब्रांच बैंकिंग ट्रेल खंगाल रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि असली ‘फाइनेंसर’ और ‘हैंडलर’ कौन हैं।

सूदखोरी का एंगल सबसे खतरनाक: इस केस की सबसे चिंताजनक बात यह है कि सट्टेबाजी को बढ़ाने के लिए सूदखोरी का सहारा लिया जा रहा था। आरोपी शुभम लोगों को पहले आसान शर्तों पर पैसा देता, फिर हारने पर उनसे कई गुना ब्याज वसूलता। जब लोग पैसे नहीं चुका पाते, तो उन पर दबाव बनाया जाता। सूत्रों के मुताबिक, कुछ पीड़ित सामने आने से भी डर रहे हैं।

आईडी सप्लायर भी धराया
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने आरोपी धर्मेंद्र सोनी निवासी एरोड्रम को भी हिरासत में लिया है, जो सट्टे की आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। हालांकि, पुलिस मान रही है कि यह सिर्फ एक कड़ी है, जबकि पूरा नेटवर्क इससे कहीं बड़ा है।

क्राइम ब्रांच अब पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। पुलिस डिजिटल डेटा, बैंक खातों और कॉल डिटेल्स के आधार पर नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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