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तू चली गई और मेरे हाथ खाली रह गए: बेटी की मौत से टूटे पूर्व गृहमंत्री फेसबुक पर पिता ने बयां किया दर्द

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 जनवरी 2026, 10:50 पूर्वाह्न
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तू चली गई और मेरे हाथ खाली रह गए

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजनीति के लंबे सफर में न जाने कितनी सभाएं, कितनी लड़ाइयां और कितने फैसले देखने वाले पूर्व गृहमंत्री व राजपुर से कांग्रेस विधायक बाला बच्चन आज एक ऐसे दर्द के सामने नतमस्तक हैं, जिसके आगे हर पद, हर पहचान और हर ताकत बौनी पड़ जाती है।

9 जनवरी तड़के हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने उनसे उनकी बेटी प्रेरणा बच्चन को छीन लिया। उसी हादसे में कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे प्रखर और ट्रांसपोर्टर के बेटे मन संधू की भी असमय मौत हो गई।

बे टी के जाने के बाद से भीतर ही भीतर टूट चुके बाला बच्चन ने अब सोशल मीडिया पर अपने दिल का सैलाब शब्दों में उड़ेल दिया है। फेसबुक पर लिखे उनके शब्द कुछ पंक्तियां नहीं, बल्कि एक पिता की टूटी हुई सांसों की गवाही हैं। ऐसी गवाही, जिसे पढ़कर आंखें नम हुए बिना नहीं रहतीं।

कहना गलत नहीं होगा कि आज बाला बच्चन की यह पंक्तियां सिर्फ एक पोस्ट नहीं, हर उस पिता की आवाज बन गई हैं, जिसने अपने कलेजे के टुकड़े को खोया है। खास बात यह कि अभी तक इसे 7 हजार से ज्यादा लाइक और 157 शेयर सहित हजारों कमेंट मिल चुके हैं।

एक पोस्ट जिसने हजारों दिल तोड़ दिए
पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की पोस्ट किसी नेता की नहीं, एक ऐसे पिता की है जिसने अपनी दुनिया का उजाला खो दिया। उनकी पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर संवेदनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

राजनीति से परे हर वर्ग के लोग इस दर्द में खुद को जोड़ते दिख रहे हैं। क्योंकि यह पोस्ट किसी नेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता की थी, जो आज भी बेटी की यादों में सांस ले रहा है।

उन्होंने लिखा- मेरी बेटी... (जहां अब सिर्फ तेरी यादें सांस लेती हैं)

तू आई थी तो मेरी दुनिया में पहली बार असली रोशनी आई थी।

तेरी पहली मुस्कान ने मुझे सिखाया था कि खुशी क्या होती है।

तेरी छोटी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंस जाती थीं, और मैं सोचता था-

ये छोटे हाथ कभी बड़े होकर भी मेरा हाथ नहीं छोड़ेंगे।

पर किस्मत ने कुछ और ही लिखा।

तू चली गई और मेरे हाथ खाली रह गए।

अब हर कमरे में तेरी हंसी की गूंज है, पर वो गूंज अब सिर्फ दर्द बनकर सीने में चुभती है।

तेरी वो नन्ही शरारतें, तेरी वो बातें-

पापा, मैं बड़ी होकर तुम्हारे जैसी बनूंगी

सब यादों की तस्वीरें बन गई हैं, जो हर पल आंखों को नम कर देती हैं।

मैंने सोचा था, मैं तुझे दुनिया से बचाऊंगा,

हर तूफान से पहले साया बनकर खड़ा रहूंगा।

पर तूफान ने मुझे ही छोड़ दिया, और तुझे ले गया।

आज मैं बस इतना कहना चाहता हूं...

तू जहां भी है, मेरी दुआएं तेरे साथ हैं।

अगर भगवान मुझे एक बार फिर मौका दे, तो मैं फिर तुझे बेटी बनाकर मांगूंगा।

क्योंकि तू मेरी सबसे अनमोल, सबसे प्यारी, सबसे अधूरी कहानी थी।

तेरी कमी कभी पूरी नहीं होगी, बेटी।

पर तेरी यादें मुझे जीने की वजह देती हैं।

तू हमेशा मेरे दिल में, मेरी सांसों में, मेरी हर दुआ में रहेगी।

तेरा पापा... हमेशा तेरे लिए अधूरा, हमेशा तुझसे भरा हुआ।??

.........?? -पिता की कलम से??

प्रखर के माता-पिता की कलम से भी नई पीढ़ी के नाम निकला मार्मिक संदेश
पाश्चात्य संस्कृति, नाइट कल्चर और तेज रफ्तार गाड़ियों ने आज कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। हम भी उन अभागे माता-पिता में से हैं, जिन्होंने अपना बेटा खो दिया। आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नई पीढ़ी सप्ताहांत और संडे को सुकून के बजाय पार्टियों में गुजार रही है।

रात-रात भर चलने वाली पार्टियां, शराब, तेज रफ्तार वाहन—इन सबका खामियाजा आज हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। लगभग रोज हम समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पढ़ते-देखते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में कितने ही नौजवान असमय इस दुनिया से चले गए।

मैं आज की युवा पीढ़ी से हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि नाचिए, गाइए, मौज-मस्ती कीजिए, पार्टी भी कीजिए, लेकिन उसकी एक समय-सीमा होनी चाहिए। क्या देर रात तक पार्टी करना जरूरी है कि माता-पिता और परिवार चैन की नींद भी न सो सकें?

आज की युवा पीढ़ी ने पैसा कमाने में भले ही पुरानी पीढ़ी को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन जीवन की कीमत को भूलती जा रही है। जब कोई युवा चला जाता है तो वह अकेला नहीं जाता पूरा परिवार जीवनभर के लिए दु:ख में डूब जाता है। यह समस्या केवल मेरे घर की नहीं, बल्कि आज समाज के हर दूसरे घर की है।

दुर्भाग्य की बात यह है कि आज की युवा पीढ़ी न किसी की सुनती है और न ही समझती है। उन्हें लगता है कि जो वे कर रहे हैं वही सही है, जबकि उसके परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ते हैं।

युवा पीढ़ी से निवेदन: अपने पैसों का सदुपयोग करें, समय का ध्यान रखें और जीवन को जोखिम में न डालें। याद रखें-रात का अंधेरा और काल किसी को माफ नहीं करता।

प्रशासन से निवेदन

शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रातभर चलने वाली पार्टियों पर तत्काल रोक लगाई जाए। गांवों में चल रही अवैध पार्टियों की जानकारी प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती—इस पर विशेष निगरानी जरूरी है।

डीजे और तेज आवाज वाले कार्यक्रमों पर सख्ती हो, ताकि कई घरों के चिराग बुझने से बच सकें।

शराब की दुकानों का समय रात्रि 9 बजे तक ही सीमित किया जाए।

शहरों में रात 11 से सुबह 4 बजे तक चलने वाले ढाबों, रेस्टोरेंट और क्लबों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।

समाजसेवी संस्थाओं और राजनीति दलों से अपील: समाजसेवी संस्थाएं, राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि मिलकर जनजागरण अभियान चलाएं और शासन-प्रशासन को इन विषयों पर कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य करें।

कानून का उद्देश्य स्वतंत्रता देना है, लेकिन अनुशासन के बिना स्वतंत्रता समाज को विनाश की ओर ले जाती है। संयम, मर्यादा और जिम्मेदारी-यही एक सुरक्षित समाज की पहचान है।

यह केवल एक पिता का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की पुकार है।

मोनिका आनंद कासलीवाल (स्वर्गीय प्रखर कासलीवाल के माता-पिता)

डायल किया 112... लेकिन कॉल कनेक्ट होने से पहले ही पहुंच गई मौत
प्रेरणा, प्रखर और मन सिंधू की मौत की जांच कर रही तेजाजी नगर पुलिस ने जब उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाली तो खुलासा हुआ कि दुर्घटना के बाद जब प्रेरणा कांच फोड़ते हुए बोनट पर जा गिरी थी। वहीं अनुष्का राठी, प्रखर और मन सिंधू गंभीर घायल हो गए थे।

तब आंखिरी सांसों के बीच प्रखर और मन सिंधू ने डायल 112 पर मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन कॉल कनेक्ट होने से पहले ही उनकी जिंदगी खत्म हो गई। उधर, अस्पताल में भर्ती रिटायर्ड एएसपी (सीआरपीएफ) कौशलेंद्र राठी की बेटी अनुष्का राठी की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।

होश में न होने के कारण पुलिस अब तक उसका बयान दर्ज नहीं कर सकी है। टीआई देवेंद्र मरकाम के अनुसार, सीडीआर और लोकेशन एनालिसिस में सामने आया है कि प्रखर के जन्मदिन की पार्टी कोको फार्म में चल रही थी। सभी दोस्त शाम करीब 5 बजे पार्टी स्थल पहुंचे और रात 1.15 बजे तक वहीं रहे।

पार्टी खत्म होने के बाद अनुष्का, प्रेरणा और प्रखर कार से रात करीब 2 बजे मन संधू के विष्णुपुरी स्थित घर पहुंचे। इसके बाद सभी कुछ समय भंवरकुआं इलाके में घूमते रहे और फिर राऊ की ओर से विजय नगर जाने के लिए निकले। इसी दौरान सुबह 4.55 बजे रालामंडल ब्रिज के पास उनकी तेज रफ्तार कार हादसे का शिकार हो गई।

हादसे के बाद प्रखर और मन संधू कुछ देर तक होश में थे। उनके फोन से 112 नंबर डायल हुआ, लेकिन वे कॉल पर कुछ कह नहीं पाए। पुलिस का मानना है कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने मदद बुलाने की कोशिश की, पर समय और ताकत दोनों साथ छोड़ गए।

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