हैं...राम: हंगामा भी रोक न पाया शिवराज की आवाज; संसद में फुलफॉर्म में नजर आए हमारे ‘मामा शिवराज', खूब तालियां बटोरीं
'मामा' का लाइव कवरेज चलना शुरू हुआ ही था कि स्क्रीन पर मस्कट से लाइव प्रकट हो गए पीएम मोदी विपक्ष का जबरदस्त हंगामा भी रोक नहीं पाया केंद्रीय कृषि मंत्री को पलटवार से धुआंधार भाषण से दिया सबको जोरदार...
Khulasa First
संवाददाता

'मामा' का लाइव कवरेज चलना शुरू हुआ ही था कि स्क्रीन पर मस्कट से लाइव प्रकट हो गए पीएम मोदी
विपक्ष का जबरदस्त हंगामा भी रोक नहीं पाया केंद्रीय कृषि मंत्री को पलटवार से
धुआंधार भाषण से दिया सबको जोरदार जवाब, ‘वीबी-जी राम जी' बिल लोकसभा से पास
‘बोलवचन' में माहिर ‘मामा' से पूरा विपक्ष एक साथ मिलकर भी पार न पा सका
विपक्ष द्वारा बिल की कॉपी फाड़ने से व्यथित हुए शिवराज, कांग्रेस सांसदों के कृत्य को गुंडाराज करार दिया
मध्य प्रदेश से दिल्ली जाने के बाद हुई पहली ‘अग्नि-परीक्षा' में पास हुए शिवराज, बस लाइव कवरेज न मिल पाया
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जी हां, बात है मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री की। बात है विकसित भारत गारंटी फॉर एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) जैसे प्रतिष्ठित बिल की। ये बिल कांग्रेस की उस महत्वाकांक्षी मनरेगा बिल के सुधार व नाम में बदलाव से जुड़ा था।
नए बिल का संक्षिप्त नामकरण ‘जी-राम जी' होने ने विवाद की स्थिति पैदा कर दी थी। कांग्रेस की ‘मनरेगा' में महात्मा गांधी छिपे हुए थे तो मोदी सरकार के इस नए बिल में ‘राम-जी' समाए हुए थे। इस लड़ाई में विपक्ष दोधारी तलवार के साथ मैदान में था। एक तरफ बिल के नामकरण में बदलाव और दूसरा बदले हुए नाम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम की गूंज।
लिहाजा विपक्ष का तमतमाना लाजिमी था। इस तमतमाहट का सामना कृषि मंत्री शिवराज ने बखूबी कर अपनी पहली ‘अग्नि-परीक्षा' अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर ली।
समूचा विपक्ष भी मिलकर बोलवचन में माहिर ‘जगत मामा' को दबा नहीं पाया। ‘मामा' के सामने एक से बढ़कर एक धुरंधर नेता थे। कांग्रेस ही नहीं, टीएमसी से डीएमके व सपा से राकांपा तक। प्रियंका से लेकर अखिलेश तक विरोध रूपी शब्दों के तीर-तरकश के साथ मैदान में हमलावर थे, लेकिन वे हम सबके प्रिय ‘मामा' से पार न पा सके।
दुबली-पतली इस काया के शख्स ने दिल्ली में भी वैसे ही अपने विरोधियों को पसीने छुड़ा दिए, जैसे कभी प्रदेश की राजनीति में अपने विरोधियों के छुड़ाए थे, ‘घर' के भी और बाहर के भी। कोई भी उन्हें घेर नहीं पाया। वे विजेता बनकर ही थमे और जिस लड़ाई को लेकर आमने-सामने हुए थे, वह फतह कर ही थमे।
भले ही इस लड़ाई में अंक गणित पक्षधर था, लेकिन लड़ाई फिर भी आसान नहीं थी। जरा-सी चूक स्वयं की ही नहीं, दल व सरकार की प्रतिष्ठा पर भी गहरा आघात कर सकती थी, लेकिन कोई भी प्रतिघात काम न आया और ‘मामा' का जलवा ताल नगरी भोपाल जैसा देश की राजधानी दिल्ली में भी हाल फिलहाल तो कायम हो गया। बशर्ते ‘जुगलजोड़ी' इसे बड़े दिल से ले..!!
संसद में शिवराज फुलफॉर्म में नजर आए। 18 बरस से ज्यादा समय तक प्रदेश में की गई एकछत्र हुकूमत का ही ये हुनर था कि शिवराज के तर्क के समक्ष कोई कुतर्क सदन में टिक नहीं पाया। विपक्ष का जबरदस्त हंगामा भी सदन में शिवराज की आवाज को अवरुद्ध नहीं कर पाया। वे हंगामे व शोरशराबे के बीच भी निरंतर बोलते रहे और बिल के संदर्भ में अपनी बात व तर्क मजबूती के साथ रखते रहे।
वे तथ्यों के साथ ये बताने में कामयाब रहे कि नया ‘जी-राम जी' पुरानी ‘मनरेगा' से क्यों और कैसे बेहतर है। बिल के पक्ष में उन्हें बोलने से रोकने में विपक्षी सांसदों का चौतरफा हमला कामयाब नहीं हो सका। विपक्षी सांसद हंगामे के बीच जब सदन के गर्भगृह तक में पहुंच गए, तब भी शिवराज बोलने से रुके नहीं, बल्कि उन्होंने साफ कहा कि इस हंगामे से मैं हार नहीं मानूंगा। उन्होंने तथ्य से विपक्ष को, खासकर कांग्रेस को तिलमिलाया कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम तो बाद में जोड़ा गया। पहले तो ये नरेगा योजना थी।
‘मुझे चुप नहीं करा सकते, मेरा नाम शिवराज है’
विपक्ष का लगातार हंगामा भी शिवराज को विचलित नहीं कर पाया, बल्कि उन्होंने इसे चैलेंज मानते हुए सदन में विपक्ष को ललकारा कि मुझे आप लोग चुप नहीं करा सकते। मेरा नाम भी शिवराज चौहान है। आज मैं बोलूंगा। मुझे आज देश को बताना है कि क्या सही है? उन्होंने कहा कि 2009 में जब चुनाव आए, तब कांग्रेस को वोट के लिए महात्मा गांधी याद आए और तब नरेगा का नाम बदलकर मनरेगा किया गया। शिवराज की जबरदस्त बल्लेबाजी का ही ये असर था कि विपक्ष बिल को फाड़ने जैसी हरकत पर आ गया। इस पर कृषि मंत्री व्यथित नजर आए और उन्होंने इसे कांग्रेस का गुंडाराज करार देकर नए बिल के समर्थन को लेकर आखिरी तक अपने तेवर बरकरार रखे।
‘मामा' के बोलते-बोलते अकस्मात मोदी प्रकट हो गए
केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के ‘मामा' के इस परफॉर्मेंस में कमी रही तो बस एक ही और वह थी लाइव कवरेज की। दृश्य-श्रव्य माध्यम में शिवराज को टुकड़े-टुकड़े में तो कवरेज मिला, लेकिन अनवरत व स्क्रीन पर वे बोलते नजर नहीं आए। गुरुवार को जब दोपहर 12 बजे उन्हें बुधवार दिनभर व रात 1 बजे तक चली बहस का जवाब देना था, तब लगा कि उनका जवाब लाइव होगा।
उम्मीद के मुताबिक सभी चैनल पर वे बिल पर लंबी चर्चा के बाद लाइव जवाब देने लगे ही थे कि अकस्मात स्क्रीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रकट हो गए। मोदी उस वक्त अपनी विदेश यात्रा में मस्कट से लाइव थे और वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों से रूबरू थे। लिहाजा सभी टीवी चैनल देश को छोड़ विदेश के इस मामले को लाइव दिखाने के ‘कर्त्तव्य' में मशगूल हो गए और देश हमारे ‘मामा' का आखिरी पलटवार आंखन देखी न देख पाया, न सुन पाया।
नामकरण की राजनीति कांग्रेस की सनक
शिवराज ने नाम बदलने के मुद्दे पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा, ये सनक कांग्रेस की है। कांग्रेस ने नेहरू-गांधी परिवार को महिमामंडित करने के लिए योजनाओं, संस्थानों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नाम रखे। राज्य सरकारों की 25 योजनाएं राजीव गांधी, 27 योजनाएं इंदिरा गांधी, 86 से अधिक विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान, दर्जनों सड़कें, भवन, पुरस्कार, अस्पताल, स्कॉलरशिप, एयरपोर्ट और यहां तक कि 15 नेशनल पार्क भी नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखे गए।
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