वाह रे नगर निगम: पहले दूषित पानी ने ली जान अब बगैर पानी जीना दूभर
KHULASA FIRST
संवाददाता

भागीरथपुरा त्रासदी के बाद आपूर्ति बंद, टैंकर के चार बर्तन पानी में सिमटी जिंदगी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश के सबसे स्वच्छ शहर और सबसे महंगे पानी का दावा करने वाले इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 स्थित भागीरथपुरा में हालात भयावह बने हुए हैं।
दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों प्रभावित हैं। सैकड़ों मरीज अस्पतालों में हैं और प्रतिदिन नए मरीज सामने आ रहे हैं। मौतों का यह सिलसिला अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा।
दूषित पानी रोकने के नाम पर पूरे क्षेत्र की आपूर्ति बंद
दूषित पानी का दुष्प्रभाव और न फैले इसके चलते प्रशासन ने नर्मदा योजना की सभी नल कनेक्शन लाइनें बंद कर दी हैं। साथ ही निजी और सरकारी बोरिंग भी सील कर दिए हैं। प्रशासन का दावा है कि बोरिंग शुद्ध करने के लिए उनमें क्लोरीन मिलाया जा रहा है।
टैंकर के भरोसे भागीरथपुरा, चार बर्तन पानी में नहाना-खाना-नित्यकर्म
प्रशासन द्वारा पानी के टैंकरों से घर-घर शुद्ध जल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन हकीकत है एक परिवार को मुश्किल से चार बर्तन पानी मिल पा रहा है। इसी सीमित पानी में नित्यकर्म, स्नान और भोजन करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है पहले पानी ने जान ली, अब पानी न मिलने से ज़िंदगी ही दूभर हो गई है।
नालों से घिरा भागीरथपुरा, भूमिगत जल जहरीला
भागीरथपुरा क्षेत्र चारों ओर से गंदे नालों से घिरा है। इस वजह से क्षेत्र का भूमिगत जल पहले ही पीने योग्य नहीं है। इसकी पुष्टि शासकीय रिपोर्टों में भी हो चुकी है। ऐसे में प्रशासन द्वारा बोरिंग में केवल क्लोरीन डालकर उसे पीने योग्य बनाने का दावा कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं यह जहरीला पानी क्या सिर्फ क्लोरीन डालने से वह अमृत बन जाएगा?
पानी की टंकी से निकले 21 मृत कबूतर
सूत्रों के अनुसार दूषित जलकांड के बाद नगर निगम ने जब पानी की टंकी की सफाई की गई तो उससे 21 मृत कबूतर निकले। हालांकि, नगर निगम के किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन यह खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल चुकी है। बताया जा रहा है पानी की टंकी पर असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का कब्जा था।
संवेदनशील जलस्रोत, लेकिन निगरानी नदारद
पीने के पानी की टंकी अत्यंत संवेदनशील स्थल है, जिसकी सुरक्षा और निगरानी नगर निगम या संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है लेकिन भागीरथपुरा में सामने आए हालात गंभीर लापरवाही और सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा कर रहे हैं।
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