लीज जमीन पर सेल डीड की ड्यूटी क्यों?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) मंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें एकमुश्त बीस वर्ष का लीज रेंट जमा करने पर फ्री होल्ड करने की पूर्व नीति को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इस फैस
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) मंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें एकमुश्त बीस वर्ष का लीज रेंट जमा करने पर फ्री होल्ड करने की पूर्व नीति को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में नई बहस छिड़ गई है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने इस निर्णय को आधार बनाकर आम जनता के शोषण से जुड़े एक सनसनीखेज खुलासे का दावा किया। उनका कहना है कि यह पूरा तंत्र वर्षों से लोगों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित हो रहा है। द्विवेदी ने बताया कि आईडीए तीस वर्ष की लीज पर भूखंड आवंटित करता है और इसके लिए लीज डीड ही जारी की जाती है, लेकिन जब यही प्लॉट धारक अपना भूखंड किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित करता है तब मध्यप्रदेश शासन का पंजीयन विभाग उस दस्तावेज को सेल डीड मानकर उसकी स्टाम्प ड्यूटी वसूल करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संपत्ति लीज पर है और मालिकाना हक उत्पन्न ही नहीं होता तो पंजीयन विभाग विक्रय पत्र की ड्यूटी किस आधार पर ले रहा है? लीज संपत्ति पर केवल लीज ट्रांसफर की ड्यूटी ही क्यों नहीं ली जाती?
नागरिकों के साथ खुली आर्थिक लूूट: उन्होंने कहा कि आईडीए द्वारा नामांतरण किए जाने पर भी केवल लीज रेंट एग्रीमेंट ही तैयार किया जाता है, फ्री होल्ड अधिकार नहीं दिए जाते। ऐसे में मालिकाना हक न होने पर सेल डीड की भारी भरकम ड्यूटी वसूलना नागरिकों के साथ खुली आर्थिक लूट है। उन्होंने आरोप लगाया कि किराए की संपत्ति पर मालिकाना अधिकारों वाली स्टाम्प ड्यूटी वसूलना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि अवैधानिक भी प्रतीत होता है। उनका कहना है कि आईडीए ने इस विसंगति पर कभी आपत्ति नहीं जताई, जिससे संदेह गहरा होता है। द्विवेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि नगर निगम जब अपने लीज रेंट दस्तावेजों की जांच करता है तो वह स्पष्ट रूप से संपत्ति को लीज अधिकारों के आधार पर ही ड्यूटी निर्धारित करता है। गृह निर्माण मंडल भी इसी नियम का पालन करता है, फिर आईडीए और पंजीयन विभाग में यह विचलन क्यों?
कई सवाल खड़े करती है चुप्पी: उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि यह तंत्र लाखों प्लॉट धारकों और संपत्ति मालिकों से सामूहिक आर्थिक लूट कर रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार, पंजीयन विभाग और आईडीए की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। द्विवेदी का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का मौन भी इस व्यवस्था को बढ़ावा देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई आम नागरिक ऐसी विसंगति पैदा करे तो कानून तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन पंजीयन विभाग खुलेआम इस प्रक्रियागत खेल को अंजाम दे रहा है और आईडीए भी ऐसे दस्तावेजों पर बिना आपत्ति लीज नामांतरण करता जा रहा है। द्विवेदी ने चेतावनी दी कि कांग्रेस आने वाले दिनों में भाजपा सरकार की लूट-खसोट नीति के अन्य विभागों के भी खुलासे करेगी। उन्होंने दावा किया कि यह तो केवल एक विभाग की अनियमितता का पर्दाफाश है, जबकि ऐसी कई व्यवस्थाएं आम जनता को लगातार आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं।
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