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आरएसएस प्रमुख ने ऐसा क्यों कहा: परंपरा से जुड़े सवाल पर क्या बोले; वीर सावरकर के लिए कही ये बात

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 फ़रवरी 2026, 9:47 पूर्वाह्न
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आरएसएस प्रमुख ने ऐसा क्यों कहा

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा तो वे बिना किसी हिचक के तुरंत ऐसा करेंगे। उन्होंने 75 वर्ष की उम्र के बाद पद पर बने रहने की परंपरा से जुड़े सवाल पर यह टिप्पणी की।

मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए किसी विशेष जाति से होना जरूरी नहीं है।

वही बन सकता है आरएसएस प्रमुख
उन्होंने कहा कि क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण—इनमें से कोई भी नहीं, बल्कि जो व्यक्ति हिंदू समाज और संगठन के लिए काम करता है, वही आरएसएस प्रमुख बन सकता है।

वीर सावरकर को भारत रत्न मिले
इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है तो इससे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की गरिमा और बढ़ेगी।

जानिये मोहन भागवत के संबोधन की प्रमुख बातें
समान नागरिक संहिता (UCC) सभी वर्गों को विश्वास में लेकर बनाई जानी चाहिए, ताकि समाज में मतभेद न बढ़ें।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उम्मीद जताई कि यह देश के हितों को ध्यान में रखकर किया गया होगा और भारत को कोई नुकसान नहीं होगा।

घुसपैठ का मुद्दा गंभीर है और इस पर सरकार को अभी बहुत काम करना है। पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया पहले प्रभावी नहीं थी, लेकिन अब यह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

RSS का उद्देश्य प्रचार नहीं, संस्कार विकसित करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार दिखावे और अहंकार को जन्म देता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए—समय और मात्रा दोनों संतुलित हों।

संघ अपने स्वयंसेवकों से पूरी क्षमता के साथ काम कराता है, लेकिन आरएसएस के इतिहास में कभी किसी को जबरन रिटायर करने की स्थिति नहीं आई।

अंग्रेजी भाषा संघ की कार्यप्रणाली की मुख्य भाषा नहीं बनेगी। अंग्रेजी सीखना जरूरी है, लेकिन मातृभाषा को प्राथमिकता देना भी उतना ही अहम है।

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