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आखिर झूठा कौन: अपराधी का कहना झूठा फंसाया; पुलिसकर्मी बोला- मिला था हथियार

पूर्व विधायक से शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा मामला, जांच के आदेश हेड कांस्टेबल पर एक लाख रुपए नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने का आरोप सीसीटीवी में कैद हुआ घटनाक्रम खुलासा फर्स्ट, इंदौर । देश

Khulasa First

संवाददाता

26 नवंबर 2025, 8:39 पूर्वाह्न
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आखिर झूठा कौन

पूर्व विधायक से शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा मामला, जांच के आदेश

हेड कांस्टेबल पर एक लाख रुपए नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने का आरोप

सीसीटीवी में कैद हुआ घटनाक्रम

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
देशभक्ति, जनसेवा की शपथ लेने वाली पुलिस पर आरोप लगना नई बात नहीं है। सबसे ज्यादा लगने वाला आरोप रुपयों की मांग करने और नहीं मिलने पर झूठे केस में फंसाने का है। ऐसा ही एक आरोप परदेशीपुरा थाने के एक हेड कांस्टेबल पर लगा है। पूर्व भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के जरिए हुई शिकायत के बाद देखना होगा कि पुलिस कमिश्नर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं?

छोटी भमोरी निवासी दीपक पिता गणेश कुशवाह को परदेशीपुरा पुलिस ने आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर जमानत पर छोड़ दिया था। मामला पूर्व भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के संज्ञान में लाने के तीन दिन बाद यानी कल दीपक ने लिखित शिकायत की है। बताया कि देवेंद्र यादव ने मुझ निर्दोष को झूठे केस में पकड़कर अपराधी बना दिया।

पुलिसकर्मी की यह हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। परिजन का कहना है कि दीपक का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। वर्तमान में उस पर कोई केस नहीं है। पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह से शिकायत की है। उन्होंने मामले की जांच व जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग की।

ये लिखा है शिकायत में- शिकायत में दीपक कुशवाह ने बताया कि 22 नवंबर की दोपहर को परदेशीपुरा थाने का हेड कांस्टेबल देवेंद्र यादव अपने एक साथी और मेरे सुखलिया निवासी मित्र युवराज भट्ट को लेकर मेरे घर आया था। मुझे बाहर बुलाया और चेकिंग करने लगे। कुछ नहीं मिला तो थाने चलने को कहा। विरोध के बावजूद जबरदस्ती ऑटो में बैठा लिया।

रास्ते में थाने ले जाने का कारण पूछने पर एक देशी कट्टा निकालकर कहने लगे कि ये तूने युवराज को बेचा है। मैंने कहा कि मैं रंगाई-पुताई करता हूं। मैंने कोई कट्टा नहीं बेचा है, फिर भी वे मुझे मारपीट करते हुए थाने ले गए। मेरे माता-पिता थाने आए तो देवेंद्र ने मुझे अपने परिजन से बाहर चाय की दुकान पर मिलने जाने का कहा।

उसने मेरे परिजन से एक लाख रुपए देने नहीं तो मुझे जेल भेजने की बात कही। उनके द्वारा असमर्थता जताने पर देवेंद्र मुझे थाने से बाहर ले गया और दो युवकों को बुलाकर मेरे हाथ में एक चाकू देकर मेरे पैर तोड़ने की धमकी देकर वीडियो बना लिया। मैंने आपत्ति लेते हुए कहा कि तुम मुझे झूठे केस में फंसा रहे हो।

युवराज और राहुल ठाकुर पर कार्रवाई क्यों नहीं की तो उसने कहा कि दोनों ने पैसे दे दिए हैं। इसके बाद देवेंद्र मुझे थाने ले गया और आर्म्स एक्ट की कार्रवाई करवाकर उसी दिन जमानत पर छोड़ दिया, लेकिन मेरा मोबाइल रखते हुए 15 हजार रुपए देकर मोबाइल ले जाने की बात कही।

मैं पैसे देने नहीं गया तो 25 नवंबर की सुबह देवेंद्र मेरे घर आया और मेरी मां को धमकाते हुए मुझे थाने भिजवाने नहीं तो पिस्टल के केस में जेल भिजवाने की धमकी देकर चला गया।

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