अब किस शहर में इस गंभीर बीमारी का खतरा: सतर्क रहिये; बच्चों को ही चपेट में लेती है
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में अब जीबीएस यानी गुलियन-बेरी सिंड्रोम का खतरा मंडरा गया है। दो बच्चे चाचा नेहरू अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर
मनासा, नीमच, बैतूल, खंडवा, धार और हातोद के भी कुछ मरीजों को इंदौर के विभिन्न निजी और शासकीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है।
एक तरह का पैरालिसिस अटैक जैसा
जिला मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने बताया कि ये एक तरह का पैरालिसिस अटैक जैसा है जो बच्चों को ही पकड़ता है।
ऐसे लेता है चपेट में
ये संक्रामक तो नहीं है लेकिन मल के जरिए बाहर निकलता है और यदि कहीं ड्रैनेज का पानी सप्लाय हो तो फिर अन्य बच्चों में भी हो जाता है।
इंदौर में कुल 11 मरीज उपचाररत
इंदौर के दो बच्चे अभी चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक अन्य बच्चे को जो कि हातोद का है, कल डॉल्फिन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वो यूं तो सामान्य है लेकिन उसे चलने में सहारा लेना पड़ रहा है। वर्तमान में इंदौर में कुल 11 मरीज उपचाररत हैं।
दोनों बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट
चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती दोनों बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। पीडियाट्रिक यूनिट में चार मरीज, एमवाय अस्पताल में छह मरीज और बांबे अस्पताल में एक मरीज का इलाज चल रहा है।
मरीजों की निगरानी
डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है। एक अन्य मरीज हातोद से लाकर डॉल्फिन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त जांच
जीबीएस के बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के अधिकारी इंदौर पहुंचे।
टीम में दिल्ली से डॉ. अवधेश कुमार, कोलकाता से डॉ. नंदिता दास और डॉ. गौतम चौधरी तथा भोपाल से राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. अश्विन भागवत शामिल हैं। टीम ने अस्पतालों में जाकर मरीजों की स्थिति देखी और आवश्यक जांच सैंपल भी एकत्र किए।
जांच के बाद नीमच रवाना हुई टीम
इंदौर में प्राथमिक जांच के बाद विशेषज्ञों की टीम नीमच के लिए रवाना हो गई है। यह टीम देश के विभिन्न हिस्सों में किसी भी बीमारी के मामलों में अचानक वृद्धि होने पर वहां जाकर कारणों की पहचान करती है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में आ चुकी टीम
इससे पहले भी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारियों के फैलने की जांच के लिए टीम आ चुकी है।
जीबीएस क्या है और क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार जीबीएस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से नसों पर हमला करने लगती है।
शुरुआत आमतौर पर पैरों से
इससे नसों में सूजन और कमजोरी आ जाती है। बीमारी की शुरुआत आमतौर पर पैरों से होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ती है।
जब यह फेफड़ों तक पहुंचती है, तो मरीज को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।
मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए
डॉक्टरों का कहना है कि जीबीएस के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
महंगा है उपचार
इस बीमारी का इलाज महंगा होता है, जिसमें मरीज के वजन के अनुसार विशेष इंजेक्शन लगाए जाते हैं। समय पर उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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