बुजुर्गों को बेदखल नहीं होने देंगे: इंदौर विकास प्राधिकरण; नई संचालन कंपनी के लिए टेंडर एक-दो दिन में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आईडीए द्वारा स्कीम नं. 134 में बुजुर्गों के लिए बनाए गए स्नेहधाम की देखभाल करने वाली बालाजी कंपनी का ठेका 28 फरवरी को खत्म हो जाएगा। उसने यहां रह रहे बुजुर्गों को बेदखली का नोटिस दे दिया है। इस बीच आईडीए ने नई कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। एक-दो दिन में टेंडर निकालकर नई कंपनी तय कर ली जाएगी। सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने कहा कोई भी बुजुर्ग बेदखल नहीं होगा।
स्नेहधाम का संचालन नि:शुल्क नहीं है। बुजुर्गों से निश्चित राशि संचालक कंपनी लेती है और बदले में सारी सुविधाएं देती हैं। क्षमता 108 बुजुर्गों की है जबकि चार ही रह रहे हैं। संभवत: इसीलिए बालाजी कंपनी ने बुजुर्गों को बेदखली का नोटिस दिया।
इसका जबर्दस्त विरोध हो रहा है। स्नेहधाम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 जून 2025 को कर इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था। ये देश का संभवत: पहला प्रोजेक्ट है जिसकी देशभर में सराहना हुई। बहरहाल, नोटिस मिलने से बुजुर्ग सदमे में हैं।
इसमें बालाजी सेंटेला होम्स प्रालि. ने चार बुजुर्गों को 28 फरवरी तक परिसर खाली करने को कहा है। इसे संवेदनहीन कदम बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की जा रही है। कंपनी ने कहा है 108 बुजुर्गों की क्षमता वाले स्नेहधाम में चार ही बुजुर्ग हैं जिससे संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
हालांकि आईडीए ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर अर्नेस्ट मनी जब्त करने की चेतावनी दी है। आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया कई संस्थानों ने संपर्क कर संचालन करने की बात कही है। किसी भी बुजुर्ग को बेदखल नहीं होने देंगे।
कंपनी आईडीए को देती है तीन लाख रुपए महीना
स्नेहधाम का संचालन करने वाली कंपनी आईडीए को तीन लाख रुपए महीना देती है। बुजुर्गों से संचालन के लिए राशि लेती है। बदले में बुजुर्गों को सभी तरह की सुविधाएं देने का दावा है।
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