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मुलाकात हुई.., क्या बात हुई.., जमाना पूछ रहा है

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 जनवरी 2026, 8:32 पूर्वाह्न
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मुलाकात हुई.., क्या बात हुई.., जमाना पूछ रहा है

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा कांड और उस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार को कहे गए अपशब्दों के बीच कल उनकी भोपाल में प्रदेश भाजपा कार्यालय में संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ संगीनों के साए में बातचीत इंदौर में खासी चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई कयास लगा रहा है कि मुलाकात हुई…क्या बात हुई?

मुलाकात का विषय क्या रहा, इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर दोनों के बीच ऐसी कौन बात होना थी जो आसपास सशस्त्र पहरा लगाया गया। बातचीत के दौरान विजयवर्गीय की भावभंगिमाएं भी चौंका रही हैं। आमतौर पर हंसते-मुस्कुराते रहने वाले विजयवर्गीय तनाव में नजर आ रहे हैं।

चारों और सशस्त्र गार्डों ने किसी और नेता को इस दौरान उनके पास नहीं आने दिया। बंद कमरा बैठक की जगह ये मुलाकात कार्यालय के लॉन में धूप में हुई, जहां केवल दो ही कुर्सियां थीं। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात को लेकर इंदौर में भाजपा में ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

कांग्रेस ने लपक रखा है मुद्दा
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ उनकी गुफ्तगू बेमतलब नहीं है, बल्कि इसका बड़ा मकसद है। माना जा रहा है कि विजयवर्गीय द्वारा की गई टिप्पणी को पार्टी की राष्ट्रीय इकाई ने भी गंभीरता से लिया है और ये माना है कि इससे पार्टी की छबि प्रभावित हुई है। कांग्रेस ने ये मुद्दा लपक रखा है और उसका सारा जोर इसी बात पर है कि विजयवर्गीय का इस्तीफा हो जाए या उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया जाए।

मप्र से हटाकर दी जा सकती है राष्ट्रीय जिम्मेदारी
एक कांग्रेस नेता का कहना है कि विजयवर्गीय को कोई राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिल जाने के बाद वे इंदौर की राजनीति से दूर हो जाएंगे और कांग्रेस के लिए यही अवसर होगा। भाजपाई सूत्रों का भी कहना है कि विजयवर्गीय को मप्र से हटाकर कोई राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जा सकती है।

इस वर्ष पश्चिम बंगाल, असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में चुनाव होने हैं। विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल नहीं जाना चाहते, क्योंकि वे वहां के प्रभारी थे और पार्टी को 2 से 77 सीटों तक पहुंचाने के बाद दोबारा प्रभारी की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर चुके थे।

संभावना ये है कि उन्हें असम का प्रभारी बनाया जा सकता है या फिर कोई अन्य राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जा सकती है। कुछ इस तरह का प्रस्ताव हितानंद शर्मा ने उनके समक्ष रखा है। इस पर उन्होंने विचार कर जवाब देने के लिए कहा है।

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