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पानी-पानी सरकार: गंदे पानी से मौत; भाजपा के एकछत्र शासन पर कलंक

गंदे पानी से स्वच्छ शहर में हुई मौतों से व्यथित मुख्यमंत्री, मंत्री-महापौर गमगीन भागीरथपुरा की घटना ने समूची भाजपा को हिलाकर रख दिया, शर्मसार हुए नेता सरकार के मुखिया ने हताहतों के बीच पहुंच लगाया मरहम, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 जनवरी 2026, 9:42 पूर्वाह्न
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पानी-पानी सरकार

गंदे पानी से स्वच्छ शहर में हुई मौतों से व्यथित मुख्यमंत्री, मंत्री-महापौर गमगीन

भागीरथपुरा की घटना ने समूची भाजपा को हिलाकर रख दिया, शर्मसार हुए नेता

सरकार के मुखिया ने हताहतों के बीच पहुंच लगाया मरहम, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन

इंदौर में हावी अफसरशाही के खिलाफ जन-जन में भड़का गुस्सा, जनप्रतिनिधि भी निशाने पर

हादसे के बाद पूरे इंदौर के नर्मदा जल प्रदाय सिस्टम के ऑडिट की बेहद जरूरत

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गंदे पानी से हुई मौतों ने ‘सरकार’ को पानी-पानी कर दिया। जिस इंदौर शहर पर प्रदेश ही नहीं, देश गर्व कर रहा था वहां पीने के पानी से एक साथ इतनी मौतों ने ‘सरकार’ को हिलाकर रख दिया है। घटना का गम ‘सरकार’ के चेहरे पर साफ पढ़ा जा सकता था।

आवाज में अवरुद्धता बता रही थी कि इस कलंक से कैसे मुक्ति मिलेगी? ‘सरकार’ के अंतर्मन की व्यथा उन वक्तव्य से भी जाहिर हुए, जो जाहिर रूप से बोले गए। बिना किसी किंतु परंतु के सरकार ने ‘सरकारी सिस्टम’ की नाकामी को स्वीकारा।

इस मामले में गेर गंभीर सरकारी कारिंदों की जवाबदेही तय करने की न सिर्फ बात कही, बल्कि जिम्मेदार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का भरोसा भी दिया। गमगीन सरकार ने इंदौर को आश्वस्त भी किया कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। इस हादसे से सबक लेने की बात कहते हुए सरकार ने वादा किया कि अब ऐसे इंतजाम किए जाएंगे कि साफ पानी ही कंठ तक जाए।

बात भागीरथपुरा बस्ती की है। शहर के इस पुराने व सघन आबादी इलाके के बाशिंदे जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण वो पानी पी गए जो सेप्टिक टैंक के गंदे पानी से मिल गया था। ये मिलावट जलप्रदाय की पुरानी व सड़ गई पाइप लाइन के कारण हुई थी।

पाइप बदलने का काम इलाके के पार्षद के बोलने के बाद भी नगर निगम के अफसरों ने नहीं किया। इसकी दुःखद परिणीति अधिकृत रूप से 4 और अघोषित रूप से एक दर्जन मौतों से हुई। इस मौत में एक 6 माह का मासूम भी है।

इस घटना ने मध्यप्रदेश की मोहन सरकार को हिलाकर रख दिया, क्योंकि घटना इंदौर के जिस विधानसभा क्षेत्र 1 में हुई, वह प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का था। नगर निगम उनके ही महकमे का हिस्सा है और उसी महकमे ने मंत्री से मुख्यमंत्री तक को गमगीन व शर्मसार कर दिया। मुख्यमंत्री के इंदौर प्रवास के दौरान इस शर्मिंदगी का मुजाहिरा बुधवार को इंदौर में दिखाई भी दिया।

मुख्यमंत्री स्वयं सामने आए। प्रदेश के अन्य हिस्सों में तयशुदा कार्यक्रम निरस्त कर वे सीधे इंदौर आए और हताहतों के बीच पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में दूषित जल से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य के हाल जाने और समुचित नि:शुल्क इलाज के निर्देश दिए।

मृतकों को 2 लाख के शुरुआती मुआवजे के साथ अस्पताल में उपचाररत पीड़ितों के इलाज की उन्होंने घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बगैर किसी दुराव-छुपाव के स्वीकारा कि गलती हुई है और अब इस गलती को दुरुस्त करेंगे।

उन अफसरों व जिम्मेदार अमले पर सख्त कार्रवाई की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जांच शुरू हो गई है और इसके बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि ऐसे हालात न सिर्फ इंदौर बल्कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में न हों। मुख्यमंत्री हर उस अस्पताल में गए, जहां पीड़ित उपचाररत हैं। उनके साथ मंत्री विजयवर्गीय व महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी थे।

इस घटना से इंदौर में गहरी नाराजगी भी पसर गई है। अब तक जो बातें दबी जुबान से सामने आ रही थीं भागीरथपुरा की घटना ने उसे जन-जन में मुखरता दे दी। शहर के बाशिंदों का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा था कि इंदौर में तैनात जिम्मेदार अफसर जनप्रतिनिधियों की भी नहीं सुन रहे।

अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम हो गई है। जनता से जुड़े काम में जानबूझकर देरी का ही नतीजा है कि भागीरथपुरा में वक्त पर पाइप लाइन नहीं बदली गई। जबकि इलाके के जनप्रतिनिधियों ने बीते 4 माह से इस संबंध में लगातार अफसरों से गुहार लगाई।

शहर ने मुख्यमंत्री से उम्मीद की है कि इस दर्दनाक घटना के बाद कम से कम इस शहर को ऐसे अफसर दिए जाएं जो इस शहर को भले ही जानें-समझें नहीं, लेकिन मानवीय संवेदनाओं को समझें। नर्मदा जल वितरण व्यवस्था में बरसों से चल रहे बड़े भ्रष्टाचार से अब मुक्ति की उम्मीद की गई है।

जहरीले जल से हुई मौत के बाद अब तो नर्मदा जल वितरण व्यवस्था का पूरा पोस्टमार्टम होना ही चाहिए। पानी की टंकी से पाइपलाइन तक की जांच होना चाहिए। इस व्यवस्था से जुड़े अब तक के कामकाज का ऑडिट भी हो और उन अफसरों की कर्म कुंडली भी पढ़ी जाए जो जल वितरण व्यवस्था से बरसों से जुड़े और जमे हुए हैं।

यही वक्त है जल वितरण सिस्टम के कायाकल्प का। आखिर इस सिस्टम ने इंदौर के माथे पर वो कलंक लगाया है जो अब शायद ही धुले। लिहाजा अब उन सब अव्यवस्थाओं को धोना जरूरी है जो सत्ता के वरदहस्त से भयानक गंदी व बेलगाम हो गई है, जो नागरिकों को जानलेवा गंदा पानी पीने को मजबूर कर देती है।

इंदौर जैसे शहर में अगर ऐसी व्यवस्था है तो छोटे शहर, कस्बों व गांव के क्या हाल होंगे या बनेंगे? इंदौर की घटना को मिसाल बनाया जाए ताकि मृतकों की आत्मा व शहर की देशव्यापी थू-थू पर कुछ मरहम लग सके अन्यथा घोर लापरवाही का ये मामला दो याचिकाओं के जरिये अदालत तो पहुंच ही गया है।

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