वाटर ऑडिट ने खोली स्वच्छता के दावों की पोल: नेता प्रतिपक्ष बोले- भाजपा के सबसे स्वच्छ शहर का दावा बेनकाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दूषित पानी मामला, भागीरथपुरा जल त्रासदी और उससे जुड़ी मौतों के बाद किए गए वाटर ऑडिट ने भाजपा सरकार के “स्वच्छता” और “विकसित भारत” के दावों की जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वाटर ऑडिट के निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह केवल किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि इंदौर की पूरी जल-प्रदाय व्यवस्था की प्रणालीगत विफलता है।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा से लेकर इंदौर के गरीब और मेहनतकश इलाक़ों तक नलों से दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी आना इस बात का प्रमाण है कि नगर निगम और राज्य सरकार ने जनता के मूल अधिकार-साफ़ पेयजल-को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।
सच्चाई दबाने की कोशिश के आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि 6 जनवरी 2026 को उन्होंने भागीरथपुरा का दौरा किया, जहाँ अब तक करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इतने संवेदनशील थे कि पीड़ित इलाक़ों में जाने से रोकने के लिए पुलिस बैरिकेटिंग और नाकाबंदी की गई।
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि पुलिस का रवैया व्यवस्था बनाए रखने से ज़्यादा विपक्ष की आवाज़ दबाने जैसा था। पूरा इलाक़ा लगभग सील कर दिया गया, लोग भय और दबाव में दिखे और कई पीड़ित खुलकर बोलने से डरते नज़र आए।
आज भी कुछ क्षेत्रों में नलों से वही गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, जबकि मुआवज़े, इलाज और भविष्य की सुरक्षा को लेकर लोगों की शिकायतों पर सरकार मौन है।
नलों तक जाकर देखी गई सच्चाई
7 जनवरी 2026 को किए गए वाटर ऑडिट में कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि घर-घर जाकर नलों से पानी की वास्तविक स्थिति की जांच की गई। यह ऑडिट भगीरथपुरा से 5 से 18 किलोमीटर दूर बसे उन इलाक़ों में किया गया, जहाँ इंदौर का गरीब, मज़दूर और मेहनतकश वर्ग निवास करता है।
जिन इलाक़ों में वाटर ऑडिट किया गया उनमे मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग, कनाडिया शामिल है।
पानी नहीं, बीमारी बह रही है
वाटर ऑडिट में सामने आया कि कई इलाक़ों में पानी में गंदगी, तेज़ बदबू, असामान्य रंग और सीवेज की मिलावट साफ़ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस पानी को पीने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएँ हो रही हैं।
कई स्थानों पर हालात इतने भयावह थे कि पानी पीना तो दूर, उसके पास खड़ा होना भी मुश्किल था। महिलाएँ और बुज़ुर्ग रो-रोकर अपनी पीड़ा बताते नज़र आए।
हर जगह वही हाल
मदीना नगर
नियमित बिल भुगतान के बावजूद गंदा पानी, कथित बकाया के नाम पर भारी वसूली और शिकायतों पर निगम की चुप्पी।
खजराना
नर्मदा जल में तेज़ बदबू, पानी पूरी तरह पीने अयोग्य, लेकिन कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित।
भूरी टेकरी
अत्यधिक दूषित पानी, जलभराव और वर्षों से लंबित शिकायतें-स्थायी समाधान शून्य।
कृष्णा बाग
गटर के पास से गुजरती पेयजल पाइपलाइन, सीवेज मिलावट का खुला खतरा।
बर्फानी धाम
अव्यवस्थित जल वितरण, दूषित पानी और प्रशासन की पूरी उदासीनता।
कनाडिया
पानी की गुणवत्ता बेहद खराब, हालात पूरे क्षेत्र में एक जैसे, सुधार न के बराबर।
अंतरिक्ष तक पहुँचे, लेकिन साफ़ पानी नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि आज़ादी के 79 साल बाद और वर्ष 2026 में भी नागरिक पीने के साफ़ पानी को तरस रहे हैं। जिस देश ने अंतरिक्ष में उपलब्धियाँ हासिल कीं, उसी देश में लोग सीवेज मिला पानी पीने को मजबूर हैं। यह “विकसित भारत” के दावों पर करारा तमाचा है।
सबसे स्वच्छ शहर का दावा और ज़मीनी सच्चाई
इंदौर को लगातार 8 बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, वर्ष 2025 में भी शीर्ष स्थान मिला। नगर निगम का बजट ₹8,000 करोड़ से अधिक है — प्रदेश में सबसे ज़्यादा। इसके बावजूद अगर नागरिकों को साफ़ पीने का पानी नहीं मिल रहा, तो इन रैंकिंग और अवॉर्ड्स का क्या मतलब?
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा
“स्वच्छता के अवॉर्ड से लोग ज़िंदा नहीं रहते। ज़िंदा रहने के लिए साफ़ पानी चाहिए- जो आपकी सरकार देने में विफल रही है।”
FIR की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट कहा कि वाटर ऑडिट ने यह साबित कर दिया है कि इंदौर का जल संकट कोई अपवाद नहीं, बल्कि भाजपा के शहरी शासन मॉडल की असफलता है। उन्होंने मांग की कि नगर निगम अधिकारियों, महापौर और सभी जिम्मेदारों पर FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
उन्होंने ऐलान किया कि जब तक साफ पानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों को सज़ा नहीं मिलती, तब तक कांग्रेस जनता की इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक पूरी ताकत से उठाती रहेगी।
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