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25 दिन पहले आवारा कुत्ते ने काटा था: इतने छोटे बच्चे को एंटी रेबीज के इतने वैक्सीन लगे; फिर अचानक क्या हो गया

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 फ़रवरी 2026, 9:04 पूर्वाह्न
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25 दिन पहले आवारा कुत्ते ने काटा था

खुलासा फर्स्ट, दतिया।
जिले में आवारा कुत्ते के काटने के करीब 25 दिन बाद 6 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को एंटी-रेबीज वैक्सीन की तीन डोज दी जा चुकी थीं, लेकिन सिर और गर्दन पर गहरे घाव होने के कारण वायरस तेजी से दिमाग तक पहुंच गया। इससे उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। कुछ दिन बाद काटने वाला कुत्ता भी गांव में मरा मिला।

घर के बाहर काटा था कुत्ते ने
घटना दतिया के सपा पहाड़ इलाके की है। अशोक प्रजापति का बेटा हंस प्रजापति 13 जनवरी की दोपहर घर के बाहर खेल रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के सिर, गर्दन और हाथों को बुरी तरह नोच लिया।

पड़ोसी ने कुत्ते को भगाकर बचाई जान
बच्चे की चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में रहने वाली सीमा कुशवाहा मौके पर पहुंचीं और कुत्ते को भगाया। तब तक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो चुका था। परिजन उसे तत्काल दतिया जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन, टिटनेस इंजेक्शन और इम्युनोग्लोबिन लगाया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 जनवरी को दूसरी और 20 जनवरी को तीसरी डोज दी गई। अंतिम डोज 10 फरवरी को लगनी थी, लेकिन उससे पहले ही बच्चे की हालत बिगड़ गई।

रेबीज के लक्षण दिखते ही बिगड़ी हालत
6 फरवरी की शाम स्कूल से लौटने के बाद हंस ने सिर दर्द की शिकायत की। उसके मुंह से लार टपकने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती किया गया। यहां से डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर किया। परिजन उसे ग्वालियर और फिर झांसी ले गए, जहां रविवार रात उसकी मौत हो गई।

परिवार को संक्रमण का डर
बच्चे के दादा पूरन प्रजापति ने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार के सभी सदस्यों को वैक्सीनेशन कराने की सलाह दी है। रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद लार या शारीरिक संपर्क से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इस कारण पूरा परिवार दहशत में है।

इलाज में लापरवाही का आरोप
परिजनों ने जिला अस्पताल पर समय पर उचित इलाज और देर से रेफर करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 6 फरवरी को हालत बिगड़ने के बावजूद समय रहते गंभीरता नहीं समझी गई।

आवारा कुत्तों को लेकर नगर पालिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक है। कई बार शिकायत के बावजूद नगर पालिका ने ठोस कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि अधिकारियों ने कहा—कुत्तों को मार दो, हम उठा लेंगे। मजबूरी में मोहल्ले के लोगों ने कुछ कुत्तों को मारकर बाहर फेंका।

प्रशासन का पक्ष
दतिया कलेक्टर स्वप्निल बान ने कहा कि अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध थी और बच्चे को समय पर वैक्सीन दी गई। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत पूरे मामले की जांच की जाएगी।

एक्सपर्ट व्यू
मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. पी. अधिकारी के अनुसार, यदि कुत्ते के काटने का घाव सिर, गर्दन या कंधे के ऊपर हो तो रेबीज का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे मामलों में वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबिन अनिवार्य है। तीन डोज के बाद भी सुरक्षा पूरी नहीं होती, इसलिए सभी पांच डोज समय पर लगवाना बेहद जरूरी है।

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