ड्राइवर की सीट पर दो नहीं बैठ सकते: सुप्रीम कोर्ट
Khulasa First
संवाददाता

अजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अपनी सेवानिवृत से ठीक दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्यपालों की विधायी शक्तियों और उनकी सीमाओं को स्पष्ट कर दिया।
शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि किसी भी राज्यपाल के पास यह अधिकार नहीं कि वे किसी विधेयक को रोककर रखें। लेकिन राज्यपाल को निर्णय देने की समय-सीमा तय करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि राज्यपाल के पास बिल पर निर्णय लेने के केवल तीन ही संवैधानिक विकल्प हैं।
1. मंज़ूरी देना (Assent)
2. राष्ट्रपति के पास भेजना (Reserve for President)
3. विधानसभा को वापस भेजना (Return to Legislature)
कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल किसी बिल को बिना निर्णय के लंबित नहीं रख सकते। ऐसा करने का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ‘अनुच्छेद 200 और 201 में लचीलापन संवैधानिक रूप से डिज़ाइन किया गया है। इसलिए अदालत या विधानमंडल किसी निश्चित टाइमलाइन को राज्यपाल या राष्ट्रपति पर थोप नहीं सकती।
आपको बता दूं कि कुछ राज्यों ने तर्क दिया था कि यदि राज्यपाल समय पर फैसला न दें तो इसे ‘डीम्ड एसेंट’ यानी स्वीकृति मान लिया जाए। लेकिन अदालत ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई ने कहा कि डीम्ड एसेंट का अर्थ होगा कि कोई दूसरी संस्था राज्यपाल की भूमिका संभाल ले। यह शक्तियों के पृथकीकरण के खिलाफ है। हमें कोई हिचक नहीं कि यह एक संवैधानिक प्राधिकारी के कार्यों का अधिग्रहण है।
अपने फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने विधेयक को रोके रखने की शक्ति को भी सीमित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के पास साधारण रूप से किसी बिल को रोके रखने का अधिकार नहीं है। यह शक्ति केवल दो स्थितियों में इस्तेमाल की जा सकती है- पहला जब बिल को राष्ट्रपति के पास भेजने का इरादा हो, या जब बिल को टिप्पणी सहित विधानसभा को वापस भेजना हो। अदालत ने यह भी साफ किया कि यह व्याख्या राज्यपाल को असीमित अधिकार नहीं देती।
ये बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते वक्त जजों ने कहा कि चुनी हुई सरकार- कैबिनेट ही ड्राइवर की सीट पर होनी चाहिए। ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं बैठ सकते।
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