टीआई इंद्रमणि को फिर झटका अगली सुनवाई तक लाइन अटैच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चंदन नगर थाने के तत्कालीन टीआई रहे इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी लाइन अटैच आदेश को अगली सुनवाई तक बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसी भी थाने में विवेचना करने पर लगी रोक भी जारी रहेगी।
मामला इंदौर निवासी अनवर हुसैन से जुड़ा है, जिसने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। अनवर पर गरीबों को वितरित किए जाने वाले शासकीय राशन की कालाबाजारी के आरोप हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ-पत्र पेश कर बताया गया था कि अनवर के खिलाफ आठ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध भी शामिल बताए गए।
हालांकि बाद में यह सामने आया कि उल्लेखित आठ मामलों में से चार में अनवर का नाम ही नहीं था। इस गंभीर तथ्यात्मक चूक को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर माना। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन टीआई इंद्रमणि पटेल और एडीसीपी दिशेष अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था, जबकि पुलिस कमिश्नर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के निर्देश दिए गए थे।
इंटरविनर की सुनवाई भी स्वीकार की
प्रकरण में इंदौर के अधिवक्ता असद अली वारसी ने इंटरविनर के रूप में पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि चंदन नगर पुलिस द्वारा उनके खिलाफ शराब पीकर वाहन चलाने का झूठा मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए इंटरविनर की सुनवाई भी स्वीकार की।
170 से ज्यादा मामलों में ‘पॉकेट गवाह’ का आरोप
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इंद्रमणि पटेल द्वारा दर्ज 170 से अधिक प्रकरणों में चुनिंदा लोगों को ही बार-बार गवाह बनाया गया, जिन्हें स्टॉक विटनेस या ‘पॉकेट गवाह’ कहा गया। इसके अलावा एक निर्दोष व्यक्ति को लगभग 30 घंटे तक हिरासत में रखने का भी मामला सामने आया । इन्हीं तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को पटेल को लाइन अटैच करते हुए किसी भी थाने में विवेचना करने पर रोक लगा दी थी।
10 मार्च को फिर होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि 10 मार्च को अनवर हुसैन प्रकरण में इंद्रमणि पटेल और एडीसीपी दिशेष अग्रवाल से जुड़े मुद्दों पर अगली सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस पूरे मामले को व्यापक प्रभाव वाला मानते हुए सभी पक्षों को मौखिक निर्देश दिए हैं कि वे यह सुझाव दें कि ‘पॉकेट गवाहों’ की प्रथा पर कैसे प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट 10 मार्च को कोई अहम रूलिंग दे सकता है।
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