कल तक जो ‘भेरू’ थे: आज वे भाई-भाई हो गए
KHULASA FIRST
संवाददाता
सियासत का शॉट और मीडिया का मैदान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गजब की बाजीगरी है ये सियासत! कल तक जो एक-दूसरे के चरित्र पर उंगली उठा रहे थे, एक-दूसरे को ‘भेरू’ से लेकर भ्रष्ट तक के तमगे बांट रहे थे, आज वही कंधे से कंधा मिलाकर मुस्कुराते नजर आए।
ये करिश्मा हुआ इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के क्रिकेट ग्राउंड पर, जहां प्रेस क्लब द्वारा आयोजित मीडिया सीरीज-15 क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा था। जब ‘खेल’ मीडिया का हो और मंच इंदौरी हो, तो बड़े-बड़े धुरंधरों को अपनी तलवारें म्यान में रखनी ही पड़ती हैं। बुलावे का मान ऐसा कि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा की कड़वाहट मैदान की ओस की तरह पलभर में गायब हो गई।
गुरुवार को मीडिया के कैमरों के सामने जो जुबानी जंग छिड़ी थी, शुक्रवार को उसी मीडिया के सामने सुर पूरी तरह बदल गए। मैदान पर नजारा ही कुछ और था, सज्जन वर्मा अपनी पुरानी तल्खी भूलकर कहते नजर आए कि कैलाशजी, हम तो चाहते हैं कि आप चौका-छक्का नहीं, सीधा अट्ठा मारें!
इधर से जवाब भी उतना ही लच्छेदार मिला, विजयवर्गीय बोले- सज्जन भाई, आप बॉलिंग करेंगे तो मैं खुशी-खुशी आउट भी हो जाऊंगा। हालांकि सबको पता है कि कैलाश सियासत की पिच पर इतनी आसानी से आउट होने वाले खिलाड़ी नहीं हैं।
दोनों ने साथ बैठकर मैच का लुत्फ लिया और मजे की बात देखिए, हारने वाली टीम को पुरस्कार भी बांटे। शायद हारने वालों को दिलासा देना ही इस सियासी खेल की पुरानी रीत रही है।
ये सुखद तस्वीर देखने में तो अच्छी लगती है, लेकिन आम जनता के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है क्या ये दोस्ती सिर्फ कैमरों और क्रिकेट के मैदान तक ही सीमित है? जनता चाहती है कि मुद्दों की बात आए, तो भी ये नेता इसी तरह कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखें।
कहीं ऐसा तो नहीं कि मीडिया के सामने की ये ‘तू-तू, मैं-मैं’ सिर्फ असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का एक जरिया हो? खैर, मैच खत्म हुआ, हाल-चाल पूछे गए और दोनों अपने-अपने रास्ते निकल लिए, पर पीछे छोड़ गए वही पुराना सस्पेंस कि आखिर गंगाधर कब शक्तिमान बन जाए, कोई नहीं जानता।
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