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एबी रोड पर बीआरटीएस तोड़ने और डिवाइडर बनाने की समय सीमा नहीं: निगम अफसर और ठेकेदार की लापरवाही से काम की रफ्तार धीमी, शहरवासी परेशान

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । बीआरटीएस तोड़कर डिवाइडर बनाकर यातायात को सुगम बनाने की योजना पूरी होने में कई माह लग सकते हैं। इससे शहरवासियों का मौजूदा में एबी रोड पर आवाजाही करना मुश्किल होता जा रहा है। हालां

Khulasa First

संवाददाता

05 दिसंबर 2025, 8:22 पूर्वाह्न
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एबी रोड पर बीआरटीएस तोड़ने और डिवाइडर बनाने की समय सीमा नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
बीआरटीएस तोड़कर डिवाइडर बनाकर यातायात को सुगम बनाने की योजना पूरी होने में कई माह लग सकते हैं। इससे शहरवासियों का मौजूदा में एबी रोड पर आवाजाही करना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि अदालत के समक्ष अफसरों ने पंद्रह दिन में बीआरटीएस की एक साइड की रेलिंग तोड़ने का दावा किया है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार से यह दावा हकीकत में पूरा होने की संभावना कम है।

शासन और नगर निगम द्वारा करीब आठ माह की तैयारी के बाद बीआरटीएस तोड़ने का काम शुरू हुआ, लेकिन काम की रफ्तार धीमी होने से बीआरटीएस टूटने में महीनों लगने का अंदेशा है। इसके बाद सड़क पर डिवाइडर बनाने की कवायद शुरू होगी। इस तरह माना जा रहा है कि करीब छह महीने बाद एबी रोड पर यातायात को रफ्तार मिल सकेगी।

इस बीच अदालत द्वारा कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव को फटकार लगाते हुए जब पूछा गया कि बीआरटीएस कब टूटेगा तो अफसरों ने मात्र पंद्रह दिन में बीआरटीएस की एक लाइन की रेलिंग तोड़ने का दावा किया है, लेकिन हकीकत में यह दावा खोखला साबित हो रहा है। बीआरटीएस तोड़ने का ठेका लेने वाली कंपनी का ठेकेदार मनमानी से काम कर रहा है। इसके चलते एक दिन काम होता है तो करीब दो दिन काम बंद रहता है। ऐसे में अफसरों की बात पूरी हो पाने में संशय की स्थिति बन गई है।

एबी रोड पर यातायात होने लगा है बाधित...बीआरटीएस तोड़ने की शुरुआत हो गई है, लेकिन इससे एबी रोड पर यातायात बाधित होने लगा है। बीआरटीएस का मलबा बिखरा रहने से वाहन चालक परेशान होते हैं। वहीं कम जगह में सिटी बसें चलने से भी आवाजाही दूभर होने लगी है।

बीआरटीएस तोड़ने का ठेका घाटे में दिया... ज्ञात रहे कि निरंजनपुर से राजीव गांधी चौराहे तक बनाए गए बीआरटीएस कॉरिडोर में रेलिंग के साथ कांक्रीट के बीम और आई बस स्टॉप भी शामिल है। ऐसे में बीआरटीएस को तोड़ने की रफ्तार इतनी धीमी है कि इसे महीनों में ही तोड़े जाने की संभावना है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा बीआरटीएस तोड़ने की घोषणा किए जाने के बाद निगम ने अदालत से अनुमति हासिल कर ली, लेकिन बार-बार टेंडर किए जाने के बाद भी ठेकेदार नहीं मिले। इसके चलते निगम ने थक-हारकर घाटे में बीआरटीएस तोड़ने का ठेका राजगढ़ की कंपनी को सौंप दिया।

ठेकेदार लापरवाह... सवा तीन करोड़ मिलने की थी संभावना
बताया जाता है कि नगर निगम ने बीआरटीएस कॉरिडोर तोड़ने का ठेका महज ढाई करोड़ में दिया है। जबकि निगम द्वारा कराए गए सर्वे में निगम को करीब सवा तीन करोड़ रुपए मिलने की संभावना जताई गई थी, लेकिन कई बार टेंडर करने के बाद भी जब कोई ठेकेदार नहीं मिला तो निगम ने जो ठेकेदार आया उसे ही ठेका दे दिया।

अब वह ठेकेदार राजगढ़ से इंदौर तक संसाधन लाने से बचने के लिए स्थानीय ठेकेदार को ठेका सौंपना चाहता है, लेकिन कोई भी स्थानीय ठेकेदार इस काम को करने को तैयार नहीं हो रहा है। इसके चलते जिस ठेकेदार ने काम शुरू किया है वह मनमाने तरीके से बीआरटीएस तोड़ने का कार्य कर रहा है। इसके चलते ही काम की रफ्तार बहुत धीमी है।

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