पूरी दुनिया की नजर हम पर ये दोस्ती, हम नहीं तोड़ेंगे: अमेरिकी ‘दादागीरी’ के बीच पुतिन का ऐतिहासिक भारत दौरा
प्रोटोकॉल तोड़ प्रधानमंत्री मोदी स्वयं वेलकम करने पहुंचे एयरपोर्ट, पहले विदेश मंत्री जाने वाले थे रूसी राष्ट्रपति ने भी तोड़ा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, अपनी खास कार छोड़ पीएम के साथ हुए फॉर्च्यूनर में सवार प
Khulasa First
संवाददाता

प्रोटोकॉल तोड़ प्रधानमंत्री मोदी स्वयं वेलकम करने पहुंचे एयरपोर्ट, पहले विदेश मंत्री जाने वाले थे
रूसी राष्ट्रपति ने भी तोड़ा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, अपनी खास कार छोड़ पीएम के साथ हुए फॉर्च्यूनर में सवार
पुतिन बोले- भारत खुशकिस्मत है, उसके पास मोदी हैं, वे किसी दबाव में नहीं आते
4 साल बाद भारत आए पुतिन को आज राष्ट्रपति भवन में तीनों सेनाओं की तरफ से गार्ड ऑफ ऑनर
प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर दिया भोज, रूसी भाषा वाली गीता की प्रति भेंट की
भारत-रूस दोस्ती की प्रगाढ़ता के जरिये हिंदुस्तान की धरती से ट्रंप-जिनपिंग को बड़ा संदेश
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जी हां, वाकई अब दुनिया का पॉवर सेंटर बदलने जा रहा है। शुक्रवार की 5 तारीख़ इसका गवाह बनने जा रही है। इस नए पॉवर सेंटर का एक अहम किरदार हमारा देश भारत होगा। ये सुनिश्चित होना है दुनिया के सबसे ताकतवर देश रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अहम मेल-मुलाकात से। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ये बैठक होना है।
इसके पूर्व राष्ट्रपति भवन भी इस बात का गवाह बनेगा कि दुनिया में कितनी ही ऊंच-नीच हो जाए, ईमानदार रिश्ता किसी भी परिस्थिति में डगमगाता नहीं है। रिश्ता चट्टान जैसा सुदृढ़ रहता है, कोई प्रलोभन, भय, दबाव उसे डिगा नहीं सकता। ऐसा ही रिश्ता भारत और रूस का है। 70 बरस से भी ज्यादा पुराना ये दोस्ती का रिश्ता एक बार फिर प्रगाढ़ता व आत्मीयता के साथ भरोसे के पायदान पर चढ़ते दुनिया देख रही है।
‘मॉस्को से आया मेरा दोस्त’ की तर्ज पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत आए। शाम 7 बजे उनका विमान दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उतरा और इसके साथ ही देश की विदेश नीति की नीयत भी धरातल पर नजर आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमाम प्रोटोकॉल तोड़कर स्वयं अपने दोस्त की अगवानी में एयरपोर्ट पहुंचे।
उन्होंने पहले रूस से आ रहे अपने मित्र की अगवानी देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हवाले की थी, लेकिन ऐनवक्त पर स्वयं मोदी ने अगवानी कर न केवल मित्र पुतिन को, बल्कि दुनिया को भी चौंका दिया और ये संदेश भी दे दिया कि ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे। दोस्ती की ये मिसाल दुनिया ने भी तब आंखें फाड़कर देखी, जब मेहमान ने भी वे तमाम सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ दिए, जो वह कभी भूलकर भी नहीं तोड़ते।
व्लादिमीर पुतिन ने सबको चौंकाते हुए अपनी वो खास सुरक्षा संसाधनों से लैस कार छोड़ दी, जो वे कभी नहीं छोड़ते हैं। अपनी उस खास कार को छोड़ वे प्रधानमंत्री मोदी की हिंदुस्तानी फॉर्च्यूनर कार में सवार हो गए। अपने सिक्योरिटी गार्ड्स भी पीछे रख उन्होंने भारत पर अटूट भरोसे का संदेश सकल जगत को दे दिया।
लगभग 4 साल बाद भारत आए पुतिन के सम्मान में पीएम मोदी ने अपने सरकारी आवास लोक कल्याण मार्ग पर निजी भोज भी दिया। राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली में 23वीं भारत-रूस सालाना समिट में भाग लेने आए हैं। शुक्रवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी।
ट्रंप टैरिफ के कारण भारत-अमेरिकी रिश्तों में तनातनी के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन का दौरा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है। भारत-रूस के बीच कई अहम समझौते होने की संभावना जताई जा रही है। इसमें ट्रेड, डिफेंस, स्किल्ड लेबर मोबिलिटी जैसे अहम मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
भारत खुशकिस्मत, उसके पास मोदी हैं
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत यात्रा के पहले भारत के न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में कहा कि आने वाला समय भारत और रूस के नाम होगा। ये भारत की खुशकिस्मती है कि उसके पास मोदी जैसा नेता है। प्रधानमंत्री मोदी किसी भी दबाव में नहीं आते। वे एक विश्वास योग्य नेता हैं। मोदी की सांसों में भारत का कण-कण बसता है।
ट्रंप टैरिफ पर उन्होंने कहा भारत अपनी स्वतंत्र पॉलिसी पर चलता है। रूस और भारत के लोगों के बीच दिलों का रिश्ता है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा इस लड़ाई में रूस भारत के साथ है। हमने आतंकवाद के हर स्वरूप का विरोध किया है। आतंक के खिलाफ हम भारत को हरसंभव मदद देंगे।
मॉस्को से आया मेरा दोस्त, रेड कारपेट वेलकम
दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की सबसे ताकतवर शख्सियत जब भारत की धरती पर भारत के मुखिया से गर्मजोशी के साथ गलबहियां करती है तो दुनिया हैरत में रह जाती है। समूचा जगत तब भी हतप्रभ रह जाता है, जब दुनिया के दो सबसे बड़े मुल्क के मुखिया एक-दूजे के लिए तयशुदा प्रोटोकॉल को परे कर देते हैं।
एक मेजबानी के बंधन तोड़ता है, दूजा सुरक्षा के मानकों को धता बता देता है। विश्व ये भी देख भौचक होता है कि दो मुल्कों के बीच मित्रता, दोस्ती का बंधन इतना गहरा भी होता है? सालो-साल गुजर जाएं, जग में कई बदलाव आए, लेकिन याराना यूं ही प्रगाढ़ रहता है। दोस्ती के इस स्वरूप को देख मित्र ही नहीं, दुश्मन देश भी रश्क कर रहे हैं।
जब दुनिया के तमाम मुल्कों के बीच रिश्तों की बुनियाद तिजारत के दम पर टिकी हुई है, तब एक रिश्ता शुद्ध मित्रता के दम पर दो मुल्कों के बीच आगे बढ़ता है, तो ये भी आज के दौर में हैरतअंगेज है। खासकर उन देशों के लिए, जो हमारी मातृभूमि को परम् वैभव के पद पर नहीं देखना चाहते। ऐसे सभी मुल्कों के लिए गुरुवार शाम 7 बजे से शुक्रवार रात 10 बजे तक का समय एक सदमे से कम न होगा। इस दौरान उनके दिल की धड़कनें सबसे तेज होंगी कि कहीं दुनिया का पॉवर सेंटर बदल तो नहीं जाएगा?
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