मूर्खता का मुजाहिरा थमा: ईरान ने भारत को होरमुज से गुजरने की दी इजाजत
KHULASA FIRST
संवाददाता

मध्य-पूर्व में युद्धविराम के लिए कोहराम, भारत में राहत-आराम
शहर में पर्याप्त स्टॉक, ईरान ने भी दी राहत, भारत पहुंचे जहाज, तेल-गैस का संभावित संकट फिलहाल टला
सर्वदलीय बैठक में सरकार को मिला विपक्ष का साथ, युद्धरत दुनिया के दौर में एकजुट है देश, एक साथ आए राजनीतिक दल
‘आतंकिस्तान’ की फिर किरकिरी, पाक की मध्यस्थता को अमेरिका ने नकारा, व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा- ये ऑफिशियल नहीं था
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
‘लौटकर बुद्धू घर को आए’ कहावत की तर्ज पर शहर की सड़कों पर से मूर्खता का वह मुजाहिरा थम गया है, जो महज अफवाह से शुरू हुआ था। मसला पेट्रोल-डीजल के लिए जबरिया उमड़ी भीड़ का है। न जाने कहां से ये हवा चली कि कोरोना जैसा संकट आने वाला है और लोग चल दिए जमाखोरी करने।
शुरुआत पेट्रोल-डीजल से हुई और देखते ही देखते शहरभर के पेट्रोल पंपों पर जबरदस्त मारामारी शुरू हो गई। सरकार व जिला प्रशासन की अपील भी अनसुनी कर लोग ऐसे कतारों में लगे कि देखते ही देखते पंप रीते हो गए। आम आदमी की ये मूर्खता मंगलवार शाम से बुधवार शाम तक जारी रही।
बुधवार रात होते-होते हालात पहले जैसे हो गए। पेट्रोल आसानी से उपलब्ध होने लगा। गुरुवार की सुबह तो और भी राहत लेकर आई और पेट्रोल पंपों पर सूनापन पसर गया। जिला प्रशासन ने एक बार फिर दोहराया है कि इंदौर जिले में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और किसी भी तरह की घबराहट न दिखाएं।
दू सरी तरफ से भी राहत की खबर आई है। ईरान ने भारत को उस होरमुज से गुजरने की इजाजत दे दी है, जहां पर अटके पड़े भारतीय जहाजों के कारण देश में तेल व गैस के संकट की आशंका मंडराई थी। भारतीय नेवी की सुरक्षा में होरमुज से भारत के जहाज रवाना होना शुरू भी हो गए।
इन जहाजों पर एलपीजी व कच्चा तेल लदा हुआ है। ईरान ने भारत सहित उन सभी देशों के लिए होरमुज का रास्ता खोल दिया, जो मित्र देश हैं। भारत उनमें से एक है और इसके दो जहाज ने होरमुज द्वीप को पार भी कर लिया है। पहला जहाज जग वसंत है, जिस पर 46 हजार टन एलपीजी लदी है।
ये जल्द ही गुजरात के कांडला पोर्ट पर आएगा। दूसरा जहाज पाइन गेस कल मैंगलोर पोर्ट पहुंचेगा। इसके अलावा 20 अन्य जहाज भी निकलना शुरू होंगे। भारत सरकार इन्हें सुरक्षा के साथ ला रही है। हमारी नेवी के 5 युद्धपोत ईंधन वाले जहाज की सुरक्षा कर रहे हैं।
अमेरिका इसी होरमुज द्वीप पर आकर इस जंग में बुरी तरह फंसा हुआ है। ईरान ने दो-टूक कह भी दिया कि दुश्मन देश के जहाजों को वह होरमुज से जाने नहीं देगा। ईरान अमेरिका की किसी भी धमकी के आगे झुक नहीं रहा है। इससे दुनिया में, खासकर यूरोप व पश्चिम एशिया में ऊर्जा के साथ तेल व गैस का संकट मंडरा गया है।
तेल व गैस की आवाजाही को सामान्य बनाने के लिए दुनियाभर में प्रयास तेज हो गए हैं। ईरान ने युद्धविराम के लिए सबसे बड़ी शर्त ही इस होरमुज द्वीप के लिए रख दी है कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया होरमुज पर उसके अधिकार को मान्यता दे।
महायुद्ध के 27वें दिन अब शर्तों की जंग छिड़ी हुई है। अमेरिका ने ईरान को 15 शर्तें भेजी हैं तो ईरान ने 5 शर्तों के मानने पर वार्ता की मेज पर आने पर जोर दिया है। उधर, अमेरिका शांति वार्ता के साथ सैन्य तैयारियां भी कर रहा है, जिससे फिलहाल युद्ध थमता दिखता नहीं।
सरकार को मिला विपक्ष का साथ, पाकिस्तान की फिर हुई किरकिरी
संकट के समय देश ने एक बार फिर दुनिया के समक्ष अपनी एकजुटता का संदेश भेजा। ये एकजुटता बुधवार को सर्वदलीय बैठक से निकलकर बाहर आई। मोदी सरकार ने अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध के मसले पर ये बैठक बुलाई थी। बैठक में सरकार के गृह-रक्षा-विदेश मंत्री शामिल हुए।
सरकार ने विपक्ष को जंग के हर हालात से रूबरू कराया और सरकार की अब तक की कार्रवाई से भी अवगत कराया। विपक्ष को भरोसा भी दिलाया कि भारत हर तरह से महफूज है और देश में फिलहाल तेल व गैस का कोई संकट नहीं। विपक्ष ने भी सरकार को हिम्मत दी कि संकट के समय में दलगत राजनीति से दूर पूरा देश सरकार के साथ है।
उधर, नापाक हरकतों से आतंकिस्तान घोषित हुए पाकिस्तान की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जगत में किरकिरी हुई। पाकिस्तान व आसिफ मुनीर व शहबाज खान ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थता का सेहरा बांधने पर आमादा हो चले थे। दुनिया में प्रचारित भी किया कि अमेरिका ने पाकिस्तान से मध्यस्थता की डिमांड की है।
लेकिन गुरुवार को व्हाइट हाउस से आए एक बयान से पाकिस्तान के इस झूठ का खुलासा हो गया। अमेरिका ने पाक की मध्यस्थता के दावे को सिरे से नकार दिया। व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने मीडिया के समक्ष स्पष्ट किया ये किसी भी सूरत में ऑफिशियल नहीं था।
पाक की मध्यस्थता के दावे ने भारत में भी हलचल पैदा कर दी थी। कल की सर्वदलीय बैठक में इस सम्बंध में विपक्ष ने सरकार से सवाल-जवाब भी किए। हालांकि विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर दो-टूक जवाब दिया कि भारत कभी भी दलाल देश नहीं रहा।
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