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शौर्य को फिर जगाने के लिए है राम कथा: आचार्य शांतनु

दशहरा मैदान पर अयोध्या कांड की लोमहर्षक घटनाएं सुन रो पड़े हजारों श्रद्धालु खुलासा फर्स्ट, इंदौर । अन्याय और दुराचार के विरुद्ध संघर्ष कर अपने राष्ट्रए धर्म और संस्कृति के प्रति जिम्मेदार बनें। आज ही क

Khulasa First

संवाददाता

07 दिसंबर 2025, 9:40 पूर्वाह्न
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शौर्य को फिर जगाने के लिए है राम कथा

दशहरा मैदान पर अयोध्या कांड की लोमहर्षक घटनाएं सुन रो पड़े हजारों श्रद्धालु

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
अन्याय और दुराचार के विरुद्ध संघर्ष कर अपने राष्ट्रए धर्म और संस्कृति के प्रति जिम्मेदार बनें। आज ही के दिन हमने 500 बरसों से सनातन संस्कृति के माथे पर अयोध्या में लगे लांछन को ध्वस्त किया था। यह शौर्य दिवस हम सबकी राष्ट्र और धर्म के प्रति निष्ठाए विश्वास और पुरुषार्थ का प्रतीक है।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय नहीं बल्कि राम भक्तों के बलिदान और देश के जनमत की भावनाओं के सम्मान का परिणाम है। राम कथा हमारे सोए हुए समाज के शौर्य को फिर से जगाने का प्रयास हैए ताकि हम भारत माता की भक्ति को निरंतरता प्रदान करें और यह महान राष्ट्र एक बार फिर विश्व गुरु का गौरव प्राप्त कर सके।

ये विचार छवि सोशल वेलफेयर सोसायटी एवं श्री अग्रवाल समाज इंदौर फाउंडेशन के तत्वावधान में मानस मर्मज्ञ आचार्य शांतनु महाराज ने शनिवार को दशहरा मैदान स्थित रामायण वाटिका पर चल रहे श्रीराम शौर्य कथा में व्यक्त किए।

उन्होंने रामायण के अयोध्या कांड के साथ 6 दिसंबर को अयोध्या में हुए घटनाक्रम की अनेक लोमहर्षकए पुलिस एवं सुरक्षाबलों की कारसेवकों पर की गई घोर ज्यादतियोंए निर्ममताओं और सरयू के रक्तरंजित पानी से लेकर कोठारी बंधुओं के नृशंस हत्याकांड सहित तमाम घटनाओं का इतना हृदय विदारक चित्रण किया कि अनेक श्रोताओं की आंखें सजल हो उठीं।

खुद आचार्य शांतनु भी अपने नेत्रों को अश्रुपूरित होने से नहीं रोक सके। कथा शुभारंभ प्रसंग पर सांसद शंकर लालवानीए मंत्री तुलसी सिलावटए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता दीपक जैन टीनूए भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रए पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ताए पूर्व महापौर डॉ उमाशशि शर्मा ने आयोजन समिति के गोपाल गोयल, किशोर गोयल, संजय बांकडा, संदीप गोयल, पंकज फ़तेहचंदानी, चंद्रप्रकाश गुप्ता, पिंकेश मोदी, रवि भाटिया, डॉ. विनीत कोठारी, अनिल डागा, सूरज केरो, हेमंत पटेल, वासुदेव पाटीदार, घनश्याम शेर, रणवीरसिंह रावत, अजय शिवानी उपस्थित रहे।

देवताओं के शस्त्र शौर्य के सूचक
आचार्य शांतनु ने कहा प्रभु श्रीराम के हाथ में धनुष बाण शौर्य का प्रतीक है। हम रामजी को जो प्रणाम करते हैं वह उनके शौर्य को किया गया प्रणाम है। प्रभु श्रीराम का सम्पूर्ण चरित्र निर्दोष माना गया है इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। हिंदू संस्कृति में जितने भी देवी.देवता है उन सब के हाथों में कोई न कोई शस्त्र हैं। ये हमारे शौर्य के सूचक हैं। बिना शस्त्र के कोई देवता नहीं है।

ये शस्त्र धर्म की रक्षा के लिए हैं। इनसे देवी-देवताओं ने संदेश दिया है हम अपने पराक्रम, शौर्य व पुरुषार्थ की रक्षा के लिए एक हाथ में माला और दूसरे में भाला लेकर चलें। हम शस्त्र और0 शास्त्र लेकर चलने के पक्षधर हैं। जब गजनवी और बाबर जैसे आततायी हमारे मंदिरों को लूट रहे थे, तब हम केवल भगवान को पुकारने के अलावा कुछ नहीं कर रहे थे।

भगवान भी कमजोर की मदद नहीं करते। बलि भी उन्हीं जानवरों की दी जाती है जो सबसे कमजोर होते हैं। हाथी, घोड़े और शेर की बलि कभी नहीं दी गई। संगठित नहीं हुए और अपने शौर्य तथा पराक्रम को फिर से जागृत नहीं किया तो एक बार फिर कंस, रावण और अन्य आततायियों के अत्याचार से बच नहीं पाएंगे।

संयोजक गोपाल गोयल ने बताया भक्तों के लिए प्राथमिक चिकित्सा, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं निशुल्क पार्किंग व्यवस्था अन्नपूर्णा थाना मार्ग पर है। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक हो रही है। शिवलिंग का जलाभिषेक सुबह 7.30 बजे से शाम 6 बजे तक प्रतिदिन 8 दिसंबर तक होगा।

गुजरात के कलाकारों द्वारा 1.51 लाख रुद्राक्ष से निर्मित 13 फीट ऊंचे शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए शनिवार को भी दिनभर भक्तों की कतार लगी रही। प्रतिदिन संध्या आरती के बाद रुद्राक्ष का भी प्रसाद बांटा जा रहा है।

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