खबर
टॉप न्यूज

रामकथा भारतीय संस्कृति का गौरवशाली दस्तावेज: आचार्य, दशहरा मैदान पर उमड़ रहा सैलाब, अयोध्या कांड का भावपूर्ण चित्रण

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । देश में धर्म, संस्कृति, मर्यादा और चरित्र के नाम पर जो कुछ बचा है, वह हमारी मातृशक्ति के त्याग और समर्पण का ही नतीजा है। स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा चिंतन इस बात का होना चाहिए कि

Khulasa First

संवाददाता

08 दिसंबर 2025, 12:24 अपराह्न
2 views
शेयर करें:
रामकथा भारतीय संस्कृति का गौरवशाली दस्तावेज

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
देश में धर्म, संस्कृति, मर्यादा और चरित्र के नाम पर जो कुछ बचा है, वह हमारी मातृशक्ति के त्याग और समर्पण का ही नतीजा है।

स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा चिंतन इस बात का होना चाहिए कि जिस बाबर, गजनी और गजनवी ने हमारे असंख्य मंदिरों को ध्वस्त किया, हमारी माता-बहनों को बेआबरू किया और सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश की अपार धन-संपदा एवं वैभव पर डाका डाला, उनके नाम पर कोई स्मारक या मस्जिद का निर्माण कोई कैसे करा सकता है?

रामकथा केवल कथा नहीं, भारतीय संस्कृति का गौरवशाली दस्तावेज है, जिससे जन-जन की आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है। अयोध्या कांड का मंथन करें तो समझा जा सकता है एक आदर्श परिवार कैसा होना चाहिए।

ये दिव्य विचार हैं मानस मर्मज्ञ आचार्य शांतनु महाराज के, जो उन्होंने छवि सोशल वेलफेयर सोसायटी एवं अग्रवाल समाज इंदौर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दशहरा मैदान स्थित रामायण वाटिका में चल रहे श्रीराम शौर्य कथा के दिव्य अनुष्ठान में व्यक्त किए।

समाजसेवी टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, राधेश्याम गुरुजी, श्रवणसिंह चावड़ा, गोपाल अग्रवाल दया, रणजीत हनुमान मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास, महापौर प्रतिनिधि भरत पारिख, हरिनारायण यादव, रामस्वरूप गहलोत, सिख समाज के रिक्की गांधी, अखिलेश गोयल, राजू समाधान, पिंकेश मोदी, विकास जिंदल, पवन खनवे, हेमंत पटेल, अक्षय सोडानी, सुनील अग्रवाल बड़गोंदा, रीतेश पाटनी, रामप्रकाश गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने आयोजन समिति के गोपाल गोयल, किशोर गोयल, संजय बांकड़ा, संदीप गोयल के साथ आचार्यश्री का स्वागत कर व्यास पीठ के पूजन एवं आरती में भी भागीदारी की।

कथा श्रवण के लिए आज भी समूचा पंडाल श्रोताओं से भरा रहा। कथा के दौरान भजनों और गीतों पर भक्तों के नाचने-गाने का सिलसिला आज भी जारी रहा। आचार्यश्री ने सिख गुरु गोविंद सिंह और उनके बेटों की शहादत का भी भावपूर्ण चित्रण किया।

प्रवचन के बाद हुई महाआरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

मंथरा और कैकयी अयोध्या कांड के मुख्य पात्र: अयोध्या कांड के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आचार्य शांतनु महाराज ने कहा मंथरा और कैकेयी इस कांड के मुख्य पात्र हैं। रामराज्य केवल भाषण और जयघोष से नहीं आएगा। अवध में जब रामराज्य की तैयारी शुरू हुई थीं, तब देवताओं ने मंत्रणा कर आपात बैठक की और देवी सरस्वती से आग्रह किया कि वे एक ऐसा पात्र चुनें, जिसकी बुद्धि को विकृत किया जा सके।

अयोध्या में जन्म लेने वाला तो कोई भी इसके लिए उपयुक्त नहीं था, इसलिए मंथरा को चुना गया। मंथरा दहेज के रूप में आई थी। दहेज की प्रथा आज भी हमारे समाज में चल रही है। दहेज मांगा नहीं जाना चाहिए, पिता अपनी पुत्री को स्वेच्छा से जो कुछ देते हैं वह बेटी का धन होता है। दहेज की प्रथा मानवता का क्षरण है। समाज में आज भी अनेक परिवार हैं, जहां दहेज के लिए बेटियों को सताया जा रहा है।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!