बदमाश वसीम बोला- नौकरी छुड़ा दूंगा, बिस्तर पर पड़ी मिलेगी: तेरे फोटो-वीडियो हैं मेरे पास: धमकी पर भी खामोश है लसूड़िया पुलिस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने जैसा सनसनीखेज मामला आया हैं। सड़क हादसे में घायल एक युवती को टक्कर मारने वाले नाबालिग मुस्लिम बच्चों की तरफ से एक बदमाश फ...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने जैसा सनसनीखेज मामला आया हैं। सड़क हादसे में घायल एक युवती को टक्कर मारने वाले नाबालिग मुस्लिम बच्चों की तरफ से एक बदमाश फोन पर जान से मारने, बदनाम करने और नौकरी छुड़वाने की धमकी दे रहा हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है सबूत और नाम-पते सामने होने के बावजूद लसूड़िया पुलिस ने 15 दिनों में भी एफआईआर दर्ज नहीं की।
पुलिस इतनी मेहरबान है कि फोटो वीडियो वायरल करने की धमकी देने वाले बदमाश को सबक तक नहीं सिखा रही है। पीड़ित ने बताया कार्रवाई नहीं हुई तो इस मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर पुलिस कमिश्नर से शिकायत करेगी। निजी इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत कसक पिता मुकेश माणिक (22) निवासी अरण्य नगर, ने बताया 7 दिसंबर की शाम करीब 6:30 बजे भाई के साथ सुखलिया जा रही थी। एमपी-09-एएफ-6439 नंबर की जुपिटर पर सवार तीन नाबालिग बच्चों ने तेज रफ्तार और लापरवाही से उसकी एक्टिवा एमपी09 एडब्ल्यू 9207 को जोरदार टक्कर मार दी।
उसकी एक्टिवा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि सहेली के पैर में गंभीर चोट आई, जिसका इलाज अब तक निजी अस्पताल में चल रहा है। क्षतिग्रस्त वाहन शोरूम में जमा है, इलाज के दस्तावेज भी हैं। इसके बावजूद मामला थाने की फाइलों में उलझा है।
पीड़िता का आरोप है हादसे के बाद अब खुलेआम धमकाया जा रहा है। कल रात एक अनजान नंबर से आए फोन कॉल में कॉलर ने खुद को वसीम खान बताया और कहा 15 दिन बाद बिस्तर पर ही पड़ी मिलोगी, तुम्हारी नौकरी छुड़ा दूंगा, तुम्हारे फोटो-वीडियो मेरे पास है।
धमकी देने वाले ने न सिर्फ गालियां दीं, बल्कि 275 अमरकीर्ति अपार्टमेंट, श्रीनगर कांकड़ एक्सटेंशन, फ्लैट नंबर 201, अपना पता भी बताया। पीड़िता का कहना है कि पूरी बातचीत उसके मोबाइल में रिकॉर्ड है। कई बार लसूड़िया थाने जा चुकी है, लेकिन अब तक न नाबालिगों के खिलाफ, न धमकी देने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
नाम, पता, कॉल रिकॉर्डिंग और मेडिकल दस्तावेज होने के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। मामला अब केवल सड़क हादसे या धमकी का नहीं, बल्कि पुलिस की लापरवाही और महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलने वाला है। कानून की चुप्पी ने बदमाशों के हौसले बढ़ा दिए हैं और पीड़िता को डर के साए में जीने पर मजबूर कर दिया है।
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