असल खिलाड़ी जल्द होंगे बेनकाब: कन्फेक्शनरी किंग संजय जेसवानी का ऐलान; गौरव तो सिर्फ प्यादा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महीनों तक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से तबाह करने की साजिश का शिकार रहे कन्फेक्शनरी किंग संजय जेसवानी ने देश की सर्वोच्च अदालत से क्लीनचिट मिलने के बाद अब राहत की सांस ली है।
उन्होंने भरोसे की इसी जमीन पर धोखे की इमारत खड़ी कर उन्हें झूठे केस में फंसाने वाले गौरव अहलावत और उसके पीछे खड़े 11 लोगों सहित सभी 12 साजिशकर्ताओं को सबक सिखाने के लिए कमर कस ली है।
जेसवानी ने साफ कर दिया कि गौरव अहलावत तो महज एक प्यादा है। वे उन्हें बर्बादी के कगार पर लाने का असल खेल रचने वाले सभी साजिशकर्ताओं का जल्द खुलासा करेंगे।
उल्लेखनीय है कन्फेक्शनरी कारोबारी संजय जेसवानी पर 12 सितंबर 2024 को कंपनी के सीए निशित नाहर ने बंधक बनाने, मारपीट करने और धमकाने का केस दर्ज कराया था। वहीं जेसवानी की ओर से उनकी कंपनी के करतार सिंह ने जीआरबी कंपनी के शेयरहोल्डर गौरव अहलावत और उसकी मां कृष्णवंती पर 2 करोड़ रुपए ठिकाने लगाने के मामले में 316(5), 318(4), 61(2) बीएनएस का केस दर्ज करा दिया।
गौरव को निचली अदालत और इंदौर हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर जेसवानी ने हाई कोर्ट से खुद पर दर्ज एफआईआर क्वेश करा ली। इसके चलते गौरव सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। हालांकि वहां भी उसे मुंह की खानी पड़ गई और जेसवानी निर्दोष साबित हुए।
ऐसे बुना बर्बाद करने का ताना-बाना
संजय जेसवानी कारोबार के सिलसिले में चायना जाते रहते थे। साल 2011 में चायना में ही उनकी पहचान रशियन नागरिक गौरव अहलावत से हुई। यह पहचान दोस्ती और भाई के रिश्ते तक जा पहुंची। उसने इंडिया में पार्टनरशिप में कन्फेक्शनरी का बिजनेस शुरू करवाने और फैक्ट्री डलवाने की इच्छा जाहिर की। 2012 में उन्होंने जीआरबी बिस्किट प्रा.लि. नाम से बिजनेस शुरू करने की प्लानिंग की।
अपनी करतूतों का खुलासा होने पर झूठे केस में फंसा दिया
जेसवानी के अनुसार गौरव ने 2 करोड़ 16 लाख, उन्होंने अपनी केमको ग्रुप ऑफ कंपनीज की तरफ से 21 करोड़ और उनकी दूसरी कंपनियों से 25 करोड़ रुपए लगाए। अपनी बैंक गारंटी और प्रॉपर्टी बैंक को देकर 18 करोड़ का लोन लेकर जीआबी बिस्किट को दिया।
अपनी कंपनी के सप्लायरों के जरिए पूरे इंडिया के इंपोर्टरों से 15 करोड़ रुपए उधार लेकर जीआरबी बिस्किट में दिए। लाइसेंस फीस, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट या किसी भी प्रकार का पैसा नहीं लिया।
50 कमर्शियल वाहन जीआरबी बिस्किट में लोडिंग-अनलोडिंग में लगाए। लगभग 80 करोड़ रुपए निवेश किए, लेकिन कभी इसका एक भी प्रतिशत इंटरेस्ट नहीं लिया।
2019 में अहलावत दंपति में विवाद होने पर गौरव को अपने घर रखा। सारे खर्चे उठाए। बस, इसी भरोसे का नाजायज फायदा गौरव ने उठाया। वह सालों में कमाई मेरी और केमको च्यू की इज्जत, पैसा, मार्केट वैल्यू सहित कमाई लूटने में लगा रहा। फायदे में चल रही कंपनी मनी शॉर्ट पर चलने लगी तो मैंने 2023-24 में शंका के चलते कंपनी के सभी ऑडिटर और अकाउंटेंट की मीटिंग की।
गोलमोल जवाब मिलने पर अपने ऑडिटर से ऑडिट कराया तो गौरव अहलावत की चोरी पकड़ी गई। इसके बाद से गौरव मेरा दुश्मन हो गया और उसने चोरी में अपने साथ शामिल कंपनी के सीए निशित व अन्य से मुझे झूठे केस में फंसवा दिया।
12 लोगों ने जालसाजी के तहत झूठे केस में फंसाया
सुप्रीम कोर्ट ने गौरव को सशर्त जमानत दी। उसका पासपोर्ट निचली अदालत में जमा होगा, साथ ही उसे रोजाना लसूड़िया थाने में हाजिरी देनी होगी। केस में पुलिस का पूरा सहयोग करना होगा, नहीं तो जांच अधिकारी या कोर्ट उसकी जमानत रद्द कर सकती है।
यानी वह आजाद होते हुए भी वह बंधा हुआ है। इधर, संजय जेसवानी ने खुलासा फर्स्ट को बताया वह 1998 से कन्फेक्शनरी प्रोडक्ट बनाते आ रहे हैं। उनकी केमको च्यू प्रायवेट लिमिटेड (केमको कन्फेक्शनरी और बेकरी) ग्रुप ऑफ कंपनीज पांच हजार तरह के प्रोडक्ट बनाती है, जो कि विश्व की कोई भी कंपनी नहीं बनाती है।
उनकी कंपनी की नेटवर्थ पांच हजार करोड़ रुपए थी। वहीं केमको मार्ट प्रालि की नेटवर्थ 600 करोड़ रुपए थी। मेरी दोनों ही कंपनियां टैक्स पैड थीं। केमको च्यू अकेले इंदौर में 15 हजार कर्मचारियों और उनके परिवार का तो देशभर में 50 हजार से ज्यादा कर्मचारियों और उनके परिवार का पेट भरती थी।
गौरव अहलावत सहित 12 लोगों ने मिलकर ब्लैकमेल किया और जालसाजी के तहत झूठे केस में फंसाया। मेरी दोनों ही कंपनियों को एनपीए और एनसीएलटी की कगार पर लाकर छोड़ दिया।
मुझे छह माह अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वे कौन-कौन लोग हैं, जिन्होंने मुझे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और मेरे पूरे परिवार को डिस्टर्ब कर दिया, इसका खुलासा जल्द ही करूंगा।
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