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ओपीडी की लाइट बंद: डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा इलाज; प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच की एक और अव्यवस्था

वीडियो बना रहे व्यक्ति पर अस्पताल के गार्डों ने बनाया डिलीट करने का दबाव खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में अव्यवस्थाओं का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्प

Khulasa First

संवाददाता

11 दिसंबर 2025, 5:47 pm
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ओपीडी की लाइट बंद

वीडियो बना रहे व्यक्ति पर अस्पताल के गार्डों ने बनाया डिलीट करने का दबाव

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में अव्यवस्थाओं का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल की ओपीडी की लाइट बंद रहने पर डॉक्टरों को मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर मरीजों की जांच करना पड़ी।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें ओपीडी के कमरा नंबर 121 में अंधेरा पसरा है और डॉक्टर मजबूरी में टॉर्च की रोशनी में मरीज का सामान्य परीक्षण कर रहे हैं।

वीडियो बनाने वाले परिचारक ने बताया घटना के बाद सुरक्षा गार्डों ने उससे पूछताछ की और वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया। वहीं मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई देते हुए कहा गया कि पॉवर कट की स्थिति में पांच मिनट के भीतर जनरेटर स्वतः चालू हो जाता है।

मरीजों को कोई असुविधा नहीं हुई। लेकिन वायरल वीडियो से सहज ही समझा जा सकता है कि प्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं कागजों पर तो मजबूत नजर आती हैं, जबकि धरातल पर स्थिति इसके ठीक विपरीत है।

बुधवार को सामने आए इस वीडियो ने मरीजों और परिजन का गुस्सा भड़का दिया।

वीडियो में दावा किया गया है कि यह घटना न्यूरोलॉजी विभाग की है, जहां पूरा कमरा अंधेरे में था और मरीजों को आवाजाही तक मोबाइल टॉर्च की मदद से करनी पड़ी। वीडियो में डॉक्टर एक महिला मरीज को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में देख रहे हैं,

जबकि आसपास मौजूद लोग रोशनी के अभाव में रास्ता तलाशते नजर आते हैं। इसके बाद वीडियो बनाने वाला व्यक्ति अस्पताल के बाहर का हिस्सा भी दिखाते हुए कहता है कि यहां लोग परेशान होकर लौट जाते हैं, उनका इलाज तक नहीं हो पाता।

वीडियो के अंत में संबंधित व्यक्ति से सवाल पूछा जा रहा है कि वीडियो बनाने की परमिशन किसने दी? जानकारी के अनुसार सुरक्षा गार्डों ने वीडियो रिकॉर्ड करने वाले को रोकने के साथ-साथ उस पर वीडियो डिलीट करने का दबाव भी बनाया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रबंधन द्वारा यहां व्याप्त अव्यवस्थाएं छिपाने के लिए वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाना उचित है?

अधीक्षक बोले- वीडियो असली है, बिजली कटौती कुछ मिनटों की थी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव भी मान चुके हैं कि वीडियो असली है और बुधवार सुबह का है। उन्होंने दावा किया कि यह कटौती बिजली कंपनी द्वारा तकनीकी कार्य के कारण और बहुत थोड़े समय के लिए थी। अस्पताल में नियमित सप्लाई चालू थी और जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल हो गई थी।

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