बीआरटीएस के रैलिंग हटाने में नगर निगम पिछड़ा: हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद रफ्तार धीमी
निगरानी समिति ने जताया असंतोष, 16 दिसंबर को रिपोर्ट पेश करेगी कोर्ट में खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए हाईकोर्ट के बार-बार आदेशों के बावजूद नगर निगम बीआरटीएस कॉरिड
Khulasa First
संवाददाता

निगरानी समिति ने जताया असंतोष, 16 दिसंबर को रिपोर्ट पेश करेगी कोर्ट में
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए हाईकोर्ट के बार-बार आदेशों के बावजूद नगर निगम बीआरटीएस कॉरिडोर की रैलिंग हटाने के काम में पीछे छूटता नजर आ रहा है।
लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस हिस्से की एक तरफ की रैलिंग को 15 दिसंबर तक हटाने का लक्ष्य था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतते-बीतते भी काम अधर में लटका हुआ है। कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति ने नगर निगम के प्रयासों पर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि वास्तविक स्थिति को हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। इस मामले में जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त व डीसीपी ट्रैफिक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत हाजिरी भरने का आदेश दिया है।
बीआरटीएस प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला नौ महीने पहले ही हो चुका था, लेकिन निगम की सुस्ती ने इसे लंबा खींच दिया। हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कार्य की गति बढ़ाने के लिए 1 दिसंबर को एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया था।
इस समिति में हाईकोर्ट के छह वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट गिरीश पटवर्द्धन, एनएस भाटी, कौस्तुभ पाठक, अजय राज गुप्ता, प्रद्युम्न किबे और जय शर्मा शामिल हैं। निगम ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि एक लेन की रैलिंग 15 दिनों में हट जाएगी और पूरा काम तीन महीनों में निपट जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
निरीक्षण में सामने आई लापरवाही की तस्वीरें
समिति ने हाल ही में राजीव गांधी चौराहा से पलासिया तक बीआरटीएस कॉरिडोर का सघन निरीक्षण किया। रिपोर्ट में पाया गया कि रैलिंग हटाने का कार्य बेहद सुस्त गति से चल रहा है। कई जगहों पर टूटी-फूटी रैलिंग सड़कों पर बिखरी पड़ी है, जिससे धूल का गुबार उठ रहा है और आम राहगीरों व वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है।
बस स्टेशनों को ध्वस्त करने में भी अनावश्यक विलंब हो रहा है। निरीक्षण के दौरान निगम के अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन समिति ने उनके कार्य पर खुलकर असंतोष जताया। समिति के एक सदस्य ने कहा, मौजूदा प्रगति संतोषजनक नहीं है। हम हाईकोर्ट को पूरी सच्चाई बताएंगे, ताकि ठोस कदम उठाए जा सकें।
यह मामला इंदौर की सड़कें सुधारने की दिशा में एक बड़ा अवरोध बन गया है। निगम की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सफाई नहीं आई है, जबकि ट्रैफिक जाम और धूल प्रदूषण जैसी समस्याएं शहरवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट 16 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में पेश करेगी, जहां कोर्ट के अधिकारियों को जवाब देना होगा।
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