नगर निगम जबरदस्ती किसी से खाली नहीं करवा सकता दुकानें: शिवाजी मार्केट पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शिवाजी मार्केट के 120 से अधिक दुकानदारों को जबरन हटाकर नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट करने के मामले में हाईकोर्ट इंदौर ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नगर
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शिवाजी मार्केट के 120 से अधिक दुकानदारों को जबरन हटाकर नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट करने के मामले में हाईकोर्ट इंदौर ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए किसी दुकानदार को दुकान खाली करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
यदि विस्थापन आवश्यक है तो वह केवल दोनों पक्षों की सहमति और अनुबंध के आधार पर ही किया जा सकता है। ज्ञात हो कि फरवरी माह में नगर निगम ने शिवाजी मार्केट के दुकानदारों को सूचना दी थी कि उन्हें सब्जी मंडी के पास बने नए कॉम्प्लेक्स में विस्थापित किया जाएगा। इसके लिए दुकानदारों को पुरानी दुकानें खाली करने और लॉटरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश से असंतुष्ट होकर सभी दुकानदारों ने एडवोकेट मनीष यादव और विवेक व्यास के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने तब लॉटरी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
दुकानदारों के पक्ष में यह दलील रखी
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट यादव ने कहा कि दुकानदार 40 वर्ष से उसी स्थान पर व्यवसाय कर रहे हैं। निगम जिस बिल्डिंग में शिफ्ट करना चाहता है वह अवैध, बिना नक्शे की और व्यापार योग्य नहीं है। यह पूरी कार्रवाई लोक परिसर बेदखली अधिनियम के खिलाफ है और दुकानदारों के अधिकारों का हनन करती है। इन दलीलों पर कोर्ट ने सहमति जताई और निगम को स्पष्ट निर्देश दिए।
कोर्ट का आदेश: जस्टिस प्रणय वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा कि निगम उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना दुकानदारों को दबावपूर्वक नहीं हटा सकता। यदि भविष्य में विस्थापन किया भी जाए तो दोनों पक्षों की सहमति से अनुबंध के आधार पर ही किया जाए।
इधर, दुकानदारों ने फैसले पर राहत जताते हुए कहा कि 40 साल से यहां दुकान चला रहे हैं। निगम अचानक हमें हटाना चाहता था। कोर्ट ने हमारा हक बचाया है।
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