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जहरीले पानी कांड पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई: सीएस-एजी सिंह ने वीसी से रखी बात; 15 मौत मानी

KHULASA FIRST

संवाददाता

15 जनवरी 2026, 11:18 पूर्वाह्न
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जहरीले पानी कांड पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाईकोर्ट इंदौर में दायर कई जनहित याचिकाओं पर गुरुवार (आज) सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष मुख्य सचिव अनुराग जैन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।

बता दें कि, भागीरथपुरा में गंदे पानी से अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीधा सवाल किया कि आखिर शासन कितनी मौतों को दूषित पानी से जोड़कर देख रहा है।

15 मौत को माना गया
इस पर मुख्य सचिव ने बताया कि 15 मौतों को दूषित पानी के कारण मान्यता दी गई है, जबकि अन्य मौतें को-मार्बिडिटी यानी पहले से मौजूद बीमारियों के कारण हुई हैं। हालांकि शासन ने मानवीय आधार पर सभी मृतकों के परिजनों को राहत राशि देने का निर्णय लिया है, जिसमें अब तक 21 मामलों में सहायता दी जा चुकी है।

रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई?
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया, मनीष यादव, विभोर खंडलेवाल सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि अब तक मेडिकल व जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि सभी याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराई जाए, ताकि मौतों और इलाज को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। मामले में अगली सुनवाई सोमवार 19 जनवरी को दोपहर 2:30 बजे होगी।

प्रशासनिक कार्रवाई
मुख्य सचिव ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन में कई सख्त कदम उठाए गए हैं। दूषित पानी की सप्लाई रोकी गई है, टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है और नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है।

इस मामले में आईएएस अपर आयुक्त, कार्यपालन यंत्री और जोन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि नगर निगम आयुक्त को हटाकर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इलाज को लेकर चिंता
एक अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रभावित मरीजों को अरविंदो अस्पताल में समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है और उन्हें बड़े निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया जाना चाहिए।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल का चयन नहीं किया जा सकता, लेकिन इलाज की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

अमृत योजना पर भी चर्चा
मुख्य सचिव ने बताया कि इंदौर में अमृत-2 योजना के तहत 800 करोड़ रुपये के कार्य शुरू हो चुके हैं। सीवरेज और पेयजल लाइनों को अलग-अलग रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लीकेज की पहचान के लिए रोबोटिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

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