ऑनलाइन फ्रॉड का बढ़ता जाल डिजिटल सुविधा अथवा खतरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

रोहिताष पांडे मप्र हाई कोर्ट एडवोकेट खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में मोबाइल फोन केवल संवाद का साधन नहीं रहा, बल्कि बैंक, पहचान-पत्र, व्यापार और निजी जीवन का केंद्र बन चुका है। इंटरनेट, यूपीआई, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया ने आमजन को सुविधाएं दी हैं, किंतु इन्हीं सुविधाओं की आड़ में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खतरनाक जाल फैला दिया है।
आज स्थिति यह है कि प्रतिदिन हजारों लोग ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं, जिनमें ग्रामीण, शहरी, शिक्षित, अशिक्षित कोई भी वर्ग अछूता नहीं है।
फ्रॉड के नए-नए तरीके: अपराधियों की बदलती रणनीति
आज का साइबर अपराधी हथियार नहीं, बल्कि मोबाइल और मनोविज्ञान का प्रयोग करता है। डर, लालच और जल्दबाजी, यही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।
1. एपीके व लिंक फ्रॉड... वाट्सएप या एसएमएस पर बिजली बिल, बैंक केवायसी, इनाम या नौकरी से संबंधित लिंक भेजी जाती हैं। जैसे ही व्यक्ति एपीके फाइल डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल हैक हो जाता है और बैंक खाते से राशि गायब हो जाती है।
2. यूपीआई व क्यूआर कोड ठगी... पैसे रिसीव करने के बहाने क्यूआर कोड स्कैन करवाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि क्यूआर कोड स्कैन करने से पैसा कटता है, आता नहीं।
3. केवायसी अपडेट व फर्जी कॉल...खुद को बैंक या टेलीकॉम कंपनी का अधिकारी बताकर ओटीपी लिया जाता है और खाते को खाली कर दिया जाता है।
4. सोशल मीडिया हैकिंग...फेसबुक, इंस्टाग्राम या वाट्सएप अकाउंट हैक कर परिचितों से पैसे मंगवाए जाते हैं, जिससे भरोसे का दुरुपयोग होता है।
5. फर्जी लोन एप्स... बिना आरबीआई अनुमति वाले एप्स तुरंत लोन देकर अत्यधिक ब्याज, धमकी, ब्लैकमेलिंग और फोन डेटा का दुरुपयोग करते हैं।
6. निवेश और क्रिप्टो स्कैम... कम समय में अधिक मुनाफे का झांसा देकर जीवनभर की कमाई ठग ली जाती है।
क्यों बढ़ रहे हैं साइबर अपराध?
डिजिटल जागरूकता की कमी।
कानूनी जानकारी का अभाव।
जल्दी पैसा कमाने का लालच।
शिकायत न करने की मानसिकता।
अक्सर पीड़ित बदनामी या प्रक्रिया के डर से शिकायत नहीं करता, जिससे अपराधी और मजबूत हो जाते हैं।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
✔️ अनजान लिंक या एपीके फाइल कभी डाउनलोड न करें। {✔️ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम विवरण किसी से साझा न करें। {✔️ फोन पर खुद को अधिकारी बताने वालों पर विश्वास न करें।
✔️ क्यूआर कोड केवल भुगतान के लिए होता है। ✔️ केवल आरबीआई से पंजीकृत एप्स का ही उपयोग करें।
✔️ सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें।
यदि फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें।
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को सूचित कर खाता फ्रीज करवाएं।
साइबर कानून के जानकार अधिवक्ता से परामर्श लें। समय पर की गई कार्रवाई से राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
कानूनी प्रावधान और अधिकार
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत
ऑनलाइन धोखाधड़ी
पहचान की चोरी
डेटा का दुरुपयोग
फर्जी कॉल व डिजिटल ठगी
दंडनीय अपराध हैं। पीड़ित व्यक्ति को न केवल आपराधिक कार्रवाई, बल्कि मुआवजे का भी अधिकार प्राप्त है।
समाज और सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी
साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस या कानून की नहीं है, बल्कि समाज की भी है। जागरूक नागरिक ही सुरक्षित डिजिटल भारत की नींव रख सकता है। विद्यालयों, पंचायतों और मीडिया के माध्यम से साइबर शिक्षा समय की मांग है।
निष्कर्ष...डिजिटल युग में सुविधा के साथ सतर्कता अनिवार्य है। याद रखें-लालच, डर और जल्दबाजी यही साइबर अपराधियों के हथियार हैं।
यदि हम सजग रहें, कानून को जानें और समय पर कार्रवाई करें, तो ऑनलाइन फ्रॉड पर प्रभावी रोक संभव है।
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