आस्था की डगर पर प्रदूषण का महासंकट: प्लास्टिक के बोझ तले कराहती देवभूमि
KHULASA FIRST
संवाददाता

संकट में हिमालय, क्या हम श्रद्धा के नाम पर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल रहे हैं
ग्लेशियरों पर ‘प्लास्टिक’ का पहरा, चारधाम यात्रा के बढ़ते कदमों के साथ गहराती पर्यावरणीय चिंंता।
अस्तित्व की जंग, माइक्रोप्लास्टिक की चपेट में हिमालयी ईको-सिस्टम और नदियों का भविष्य
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट।
देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का आगाज होते ही हिमालय की शांत वादियों में श्रद्धा का अनूठा ज्वार उमड़ पड़ता है। केदारनाथ के शिखरों से लेकर यमुनोत्री की कंदराओं तक गूंजते ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच एक ऐसा मूक संकट आकार ले रहा है, जो भविष्य की बड़ी त्रासदी का संकेत है। यह संकट है- ‘प्लास्टिक प्रदूषण’। विडंबना देखिए कि जिस प्रकृति को हम साक्षात ईश्वर मानकर पूजते हैं, उसी की गोद में हम ‘उपभोग और फेंको’ की संस्कृति का जहर घोल रहे हैं।
आंकड़ों की खौफनाक हकीकत- बढ़ता पर्यटन, सिसकता हिमालय... पिछले कुछ वर्षों में चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। 2026 की इस यात्रा सीजन में भी प्रतिदिन हजारों यात्री दुर्गम ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं।
आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, यात्रा मार्ग और धामों पर प्रतिदिन 30 से 60 टन कचरा उत्पन्न हो रहा है। इस कचरे का लगभग 60-70% हिस्सा सिंगल-यूज प्लास्टिक, पानी की बोतलों, चिप्स के पैकेटों और डिस्पोजेबल रेनकोट का है। समुद्र तल से 11,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर इस कचरे को एकत्रित कर वापस मैदानों तक लाना और वैज्ञानिक ढंग से निस्तारित करना एक ‘हिमालयी चुनौती’ बन चुका है।
ग्लेशियरों पर मौत का हस्ताक्षर, माइक्रोप्लास्टिक का खतरा...पर्यावरणविदों की सबसे बड़ी चिंता प्लास्टिक का दिखाई देना नहीं, बल्कि उसका अदृश्य हो जाना है। हिमालयी क्षेत्रों में फेंका गया प्लास्टिक अत्यधिक ठंड और तेज अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण ‘माइक्रोप्लास्टिक’ में टूट रहा है।
यह सूक्ष्म प्लास्टिक अब ग्लेशियरों की सतह पर जमा हो रहा है। प्लास्टिक के काले कण सूर्य की गर्मी को अधिक सोखते हैं, जिससे बर्फ पिघलने की गति चिंताजनक रूप से बढ़ गई है। गंगा और यमुना जैसी नदियों के उद्गम स्थलों पर ही प्लास्टिक के कण पानी में मिल रहे हैं, जो अंततः मैदानी इलाकों तक पहुंचकर मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं।
सुविधा की कीमत, बदलती जीवनशैली का दुष्प्रभाव
आधुनिक सुविधाओं ने यात्रा को सुगम तो बनाया, लेकिन संवेदनशीलता कम कर दी। 20 से 50 रुपये में मिलने वाले पतले प्लास्टिक रेनकोट एक बार बारिश से बचाते हैं और फिर पहाड़ियों की ढलानों पर कचरे के रूप में छोड़ दिए जाते हैं।
पारंपरिक पीतल या मिट्टी के बर्तनों और टोकरियों की जगह अब प्लास्टिक की थैलियों और डिब्बों ने ले ली है। ऊंचाई पर शुद्ध जल स्रोतों की भरमार के बावजूद यात्री प्लास्टिक की बोतलों पर निर्भर हैं, जो अब केदारघाटी और मंदाकिनी के तटों पर ‘प्लास्टिक के पत्थरों’ जैसी दिखने लगी हैं।
प्रशासनिक कदम और धरातल का कड़वा सच
राज्य सरकार ने ‘क्यूआर कोड’ आधारित डिपॉजिट रिफंड स्कीम जैसी सराहनीय पहल की है, लेकिन इसकी सफलता केवल मुख्य चेकपोस्टों तक सीमित है। स्थानीय पंचायतों और निकायों के पास इतने दुर्गम क्षेत्रों में कचरा ढोने के लिए पर्याप्त लॉजिस्टिक्स और बजट नहीं है। पैदल रास्तों पर चलने वाले लाखों यात्रियों की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग असंभव है, जिससे नियम केवल कागजों तक सिमट कर रह जाते हैं।
जब ‘पुण्य’ के साथ जुड़ेगी ‘पर्यावरण’ की चिंता
हिमालय को इस प्लास्टिक बम से बचाने के लिए केवल सरकारी आदेश काफी नहीं हैं, इसके लिए ‘जन-भागीदारी’ अनिवार्य है। श्रद्धालुओं को ‘अपनी गंदगी, अपनी जिम्मेदारी’ का संकल्प लेना होगा। जो प्लास्टिक हम ऊपर ले जा रहे हैं, उसे वापस नीचे लाना ही सच्ची सेवा है। मंदिरों के पास तांबे/स्टील की बोतलों का उपयोग और वाटर एटीएम की संख्या बढ़ाना। स्थानीय होटल मालिकों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और गाइडों को ‘ग्रीन एंबेसडर’ बनाकर यात्रियों को प्रेरित करना।
आस्था का संरक्षण ही हिमालय का रक्षण
आस्था केवल मंदिर के गर्भगृह में माथा टेकने का नाम नहीं है। यदि हम उस हिमालय को सुरक्षित नहीं रख पाए जो हमें जीवनदायी नदियां और शुद्ध हवा देता है, तो हमारी प्रार्थनाएं अधूरी हैं। आज का यात्री यदि अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ये पवित्र धाम केवल तस्वीरों और कचरे के ढेरों के बीच दबे इतिहास के रूप में ही बचेंगे। देवभूमि को प्लास्टिक मुक्त बनाना अब चॉइस नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की अनिवार्यता है।
संबंधित समाचार

STF की बड़ी कार्रवाई:फर्जी पासपोर्ट मामले में पांचवीं गिरफ्तारी; एजेंट पकड़ाया

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

वरिष्ठ पत्रकार ने मोटर वाहन कानून में संशोधन का प्रस्ताव भेजा:लोकसभा की याचिका समिति के समक्ष उठाई ये मांग

किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी:बोले- रोक नहीं हटी तो अर्धनग्न प्रदर्शन

भीषण सड़क हादसा:पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत; रिक्शे से टकराया वाहन, ट्रक ने कुचला

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए कई रास्तों पर नो व्हीकल जोन:इन क्षेत्रों तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित

50 लाख से अधिक पट्टाधारकों की निःशुल्क रजिस्ट्री:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आज शुरू होगा सेवा-संकल्प अभियान

ग्रामीण परिवारों को मुफ्त पंजीयन के साथ मिलेगा संपत्ति का असली हक:मध्य प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक कदम

EOW की बड़ी कार्रवाई:सहकारी समिति प्रभारी के ठिकानों पर मारा छापा; आय से 4 गुना अधिक संपत्ति मिली

संपत्ति विवाद में दो भाइयों के बीच मारपीट:कांग्रेस नेता पर छोटे भाई और बहू से मारपीट का आरोप

गणेशोत्सव जुलूस में हत्या के बाद डीजे पर पुलिस का शिकंजा:बिना अनुमति साउंड बजाने वालों पर केस

आईडीए पर किसानों का रातभर धरना:अहिल्या पथ रद्द करने की मांग

देखिए वीडियो:इनको मिली पहली फ्री रजिस्ट्री; मुख्यमंत्री बोले...आज गांवों में दिवाली-दशहरा; इतने लाख ग्रामीण संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य

भाजपा अध्यक्ष के स्वागत की तैयारियां तेज:नेताओं ने रैली मार्ग का किया निरीक्षण

जूनी इंदौर के सिद्ध मंदिर की कहानी:पोटली वाले चिंतामण गणेश

जहरीली शराबकांड में 36 मौतों पर एफआईआर:दोष सिद्ध हुआ तो उम्रकैद से फांसी तक की सजा

मोमोज दुकानदार पर हमला:शराब के लिए रुपए नहीं देने पर बदमाशों ने की मारपीट; खौलता तेल ऊपर फेंका

आज महाकाल की नगरी जगमगा उठेगी पच्चीस लाख दीपकों से:प्रधानमंत्री मोदी को आशीर्वाद के लिए होगा ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम

ऑटो चालकों की मनमानी पर यातायात पुलिस की लगाम:नियमों के साथ सवारियों से अच्छे व्यवहार की भी हिदायत

‘दीये जलाने से फुर्सत मिले तो जमीनी हालत भी देखिए’:इस नेता ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!