वास्तु का स्वर्ण नियम: घर का 'ब्रह्मस्थान' चमका सकता है आपकी किस्मत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वास्तु शास्त्र केवल प्राचीन परंपरा नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा के प्रबंधन का एक विज्ञान है। आज के आधुनिक जीवन में, जहाँ तनाव और भागदौड़ अधिक है, घर में 'सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह' बनाए रखना अनिवार्य हो गया है।
मध्य भाग 'ब्रह्मस्थान' कहलाता है
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी भवन या घर का मध्य भाग 'ब्रह्मस्थान' कहलाता है। इसे घर का हृदय माना जाता है। जिस प्रकार मानव शरीर में नाभि का महत्व है, ठीक उसी प्रकार घर की ऊर्जा का मुख्य केंद्र ब्रह्मस्थान होता है।
इसलिये है महत्वपूर्ण
आजकल फ्लैट कल्चर के कारण हम अक्सर घर के बीचों-बीच भारी फर्नीचर, पिलर या दीवारें खड़ी कर देते हैं। वास्तु के अनुसार, यदि घर का केंद्र भारी या दूषित है, तो वहां रहने वालों की उन्नति रुक जाती है और मानसिक तनाव बढ़ता है।
दोषमुक्त रखने के हैं ये उपाय
भारीपन से मुक्ति: घर के ठीक बीच के हिस्से को यथासंभव खाली और साफ रखें। यहाँ कोई भी भारी अलमारी, सोफा या लोहे का सामान न रखें।
प्रकाश का संतुलन: यदि संभव हो, तो इस स्थान पर प्राकृतिक रोशनी आने दें। अगर ऐसा संभव न हो, तो यहाँ एक हल्का पीला बल्ब लगाएं जो सकारात्मकता बिखेरे।
पानी और गंदगी से बचाव: ब्रह्मस्थान पर कभी भी गड्ढा, सीवर लाइन या शौचालय नहीं होना चाहिए। यह घर की आर्थिक स्थिति को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
यदि आपका घर पहले से बना हुआ है और बीच में दीवार है, तो वहां एक 'वास्तु पिरामिड' या तांबे का तार लगाकर ऊर्जा के दोष को कम किया जा सकता है।
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