दूषित पानी से नहीं थम रहा मौत का सिलसिला: एक और महिला ने तोड़ा दम; कांग्रेस ने फिर किया आंदोलन का ऐलान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लंबे समय से इलाजरत 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की मौत के बाद इस मामले में मृतकों की संख्या 32 तक पहुंच गई है।
काफी समय से जिंदगी की जंग लड़ रही थीं
अनिता बॉम्बे हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर थीं और काफी समय से जिंदगी की जंग लड़ रही थीं। फिलहाल अब भी तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में इलाजरत हैं।
पहले से कोई बीमारी नहीं थी
मृतका के बेटे नीलेश कुशवाह ने बताया कि उनकी मां को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से हालत में कुछ सुधार के बाद घर ले आए थे।
इसके बाद तबीयत दोबारा बिगड़ने पर उन्हें पहले अरविंदो अस्पताल और फिर बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी किडनी फेल हो गई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
स्वास्थ्य विभाग का बयान
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन स्तर पर अनिता का बेहतर इलाज कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
कांग्रेस ने फिर किया आंदोलन का ऐलान
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने 3 फरवरी को दोबारा आंदोलन करने की घोषणा कर दी है। इससे पहले कांग्रेस द्वारा इंदौर में न्याय यात्रा निकाली जा चुकी है। वहीं 17 जनवरी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इंदौर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर चुके हैं।
ये मौतें नहीं, हत्याएं हैं: जीतू पटवारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जहरीले पानी से लगातार मौत हो रही है। इन सभी परिवारों से हम मिले थे। ये मौतें नहीं, हत्याएं हैं और यह हत्याएं उन्हीं ने की, जिन्हें जल से जीवन देने की जिम्मेदारी थी।
यह बीजेपी के अहंकार का परिचायक है। जिन्हें इंदौर जिता रहा है, उनकी जिम्मेदारी क्या थी और उन्होंने क्या किया? ये उलटे गालियां देते हैं। इसका हिसाब लेना चाहिए।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा है कि सभी पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। जिम्मेदारों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो। दोषी नेताओं और अधिकारियों से इस्तीफा लिया जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट की सख्ती
इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है। आयोग को एक माह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें मौतों के कारण, कुल संख्या और जिम्मेदारों की भूमिका तय की जाएगी।
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