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‘ मौत का मांझा ‘अब मजा नहीं, सजा देगा: चाइनीज डोर से पतंग उड़ाना अब अपराध; 3 साल की हवालात, बेचने वाला जिलाबदर

रंग लाई खुलासा फर्स्ट की तीन साल की ‘साधना’, तीन साल की सजा चाइना की डोर से गंभीर चोट लगी तो पतंग उड़ाने वाले पर दर्ज होगा हत्या के प्रयास का केस इस साल जानलेवा पतंगबाजी पर सख्त हुए कलेक्टर-पुलिस कमिश्

Khulasa First

संवाददाता

09 दिसंबर 2025, 8:00 पूर्वाह्न
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‘ मौत का मांझा ‘अब मजा नहीं, सजा देगा

रंग लाई खुलासा फर्स्ट की तीन साल की ‘साधना’, तीन साल की सजा

चाइना की डोर से गंभीर चोट लगी तो पतंग उड़ाने वाले पर दर्ज होगा हत्या के प्रयास का केस

इस साल जानलेवा पतंगबाजी पर सख्त हुए कलेक्टर-पुलिस कमिश्नर, सभी थाना क्षेत्रों को किया अलर्ट

‘अब कोई गुलशन न उजड़े’ की मार्मिक मनुहार ने दिखाया असर, पुलिस रोज पकड़ रही चाइना डोर

सावधान! पतंगबाजी में डोर की जांच करने के लिए कभी भी छत पर आ जाएगी सादी वर्दी में पुलिस

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
इ स बार इंदौर में चाइना मांझे से पतंगबाजी पर प्रतिबंध का आदेश कागज पर ही दम नहीं तोड़ेगा। न महज खानापूर्ति के लिए पुलिसिया कार्रवाई होगी। सिर्फ दुकानदार, यानी ये जानलेवा मांझा बेचने वाला ही नहीं, उपयोग करने वाला भी अब अपराधी होगा। यानी मौत का मांझा अब मजा नहीं, सीधे हवालात की सैर कराएगा और 3 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा भी दिलवाएगा।

इस मामले में जिला व पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसकी पहल जिला प्रशासन की तरफ से हुई थी, जो अब शहर में जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने वक्त से पहले, यानी 14 जनवरी मकर संक्रांति त्योहार के करीब डेढ़ महीने पहले ही चाइना मांझे का व्यापार, भंडारण और उपयोग प्रतिबंधित कर दिया। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से इस मांझे से एक नाबालिग गुलशन की दर्दनाक मौत भी इंदौर में हो गई। इस मौत ने कलेक्टर सहित पूरे इंदौर को झकझोर दिया।

खुलासा फर्स्ट ने भी ‘अब कोई गुलशन न उजड़े’ की मार्मिक मनुहार जिला व पुलिस प्रशासन से की। इसके बाद प्रतिबंध के खिलाफ सख्ती तेज हुई और पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने भी कमर कस ली कि इस बार इंदौर जिले में चाइना मांझा इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। ताजा प्रतिबंधात्मक आदेश व सजा का प्रावधान इसी सख्त प्रक्रिया का हिस्सा है।

हर थाने में माइक्रो बीट व सीआई सेल का गठन
चाइनीज डोर से पतंग उड़ाना भी अब अपराध माना जाएगा। इस मांझे को बेचने वाले के साथ पतंग उड़ाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जांच के लिए हर थाने की माइक्रो बीट व सीआई सेल पतंग उड़ाने वालों के मांझे जांचेगी। चाइना डोर के साथ जितने लोग पकड़ाए हैं, पुलिस उनके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई करेगी।

आगे भी जो लोग स्टॉक के साथ बेचते हुए पकड़ाएंगे, उनके खिलाफ भी जिलाबदर या रासुका की कार्रवाई होगी। चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ पुलिस अब बीएनएस की धारा 125 के तहत केस दर्ज करेगी। हर थाने की माइक्रो बीट व सीआई सेल की टीम जहां भी अंदेशा होगा, वहां पतंग उड़ाने वाले लोगों की छतों पर जाकर जांच करेगी। हर थाने से सादी वर्दी वाले पुलिसकर्मी भी क्षेत्रों में घूमेंगे।

सावधान! तीन महीने से लेकर तीन साल की सजा, 10 हजार तक जुर्माना
बीएनएस की धारा 125 में प्रावधान है कि लापरवाही से ऐसा काम करना, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़े तो कार्रवाई होगी। इसके तहत चाइना की डोर से पतंग कोई उड़ाता है और किसी को भले ही चोट न लगे, फिर भी 3 महीने की सजा और 2500 रुपए जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

चोट लगने पर 6 महीने की कैद व 5 हजार का जुर्माना या दोनों तथा गंभीर चोट लगने पर यही सजा बढ़कर 3 साल की हो जाएगी और जुर्माना 10 हजार रुपए वसूला जाएगा। बेचने वालों को तो सीधा गुंडे-बदमाशों की तर्ज पर जिलाबदर किया जाएगा। ऐसा व्यक्ति या दुकानदार रासुका के तहत भी निरुद्ध किया जा सकता है।

मौत के मांझे, यानी चाइना की डोर के खिलाफ 2022 से मुखरता से चल रही खुलासा फर्स्ट की तीन साल की साधना तीन साल की सजा के रूप में आखिरकार रंग लाई। अब अहिल्या नगरी इंदौर में चाइना डोर से पतंग उड़ाना भी अपराध होगा। अगर ऐसा करते पाए गए तो तीन साल की सजा होगी।

यही नहीं, इस जानलेवा डोर से पतंगबाजी करते हुए अगर किसी को गंभीर चोट लगी तो पतंग उड़ाने वाले पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होगा। इस जानलेवा मांझे को बेचने वाला अब गुंडे-बदमाशों की तर्ज पर सीधा जिलाबदर होगा। इस आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस ने विशेष दस्तों का गठन किया है।

ये दस्ते जमीन से आसमान तक नजर रखेंगे। यानी अब शहर में होने वाली पतंगबाजी पर सड़क से छत तक पुलिस की निगरानी रहेगी। जन-जन की जान व पर्यावरण, पंछियों के हित में खुलासा फर्स्ट लगातार तीन साल से पुरजोर प्रयास कर रहा था कि मौत के इस मांझे के खिलाफ पुलिस प्रशासन की मुहिम का दायरा दुकानदारों से ऊपर, इस डोर से पतंगबाजी करने वालों तक बढ़ाया जाए, क्योंकि जब तक इस मांझे का उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इसका कारोबार बंद नहीं होगा।

उलटा इस मांझे की ब्लैक मार्केटिंग को बढ़ावा मिलेगा। होता भी ये ही था। दुकानदारों पर कार्रवाई, जानलेवा मांझे के धंधे के मुनाफे को दो-चार गुना कर देती थी। मुनाफे का इस हिस्से के कुछ जिम्मेदार हिस्सेदार बना दिए जाते थे। लिहाजा मौत की इस डोर के खिलाफ जिला व पुलिस प्रशासन का हर बरस अभियान कागज पर ही दम तोड़ देता था।

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