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शहर की सड़कों पर आए दिन मौत का तांडव: रफ्तार लापरवाही और अव्यवस्था छीन रही जान

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 जनवरी 2026, 8:51 पूर्वाह्न
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शहर की सड़कों पर आए दिन मौत का तांडव

कंटेनर ने शिक्षक दंपति को कुचला, तो सड़क ठेकेदार की लापरवाही से हो गई पुलिसकर्मी की मौत

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की सड़कें खतरे का दूसरा नाम बन रही हैं। तेज रफ्तार, गलत इंडिकेशन, बेकाबू भारी वाहन और निर्माणाधीन सड़कों पर घोर लापरवाही का खामियाजा आम लोग जान देकर चुका रहे हैं। बीते दिन दो हादसे हुए। कंटेनर की रफ्तार ने शिक्षक दंपती को कुचल दिया तो निर्माणाधीन सड़क पर ठेकेदार की लापरवाही ने एक पुलिसकर्मी की जान ले ली।

शुक्रवार रात करीब 11 बजे बायपास स्थित बिचौली मर्दाना ब्रिज के नीचे रफ्तार का खौफनाक चेहरा सामने आया। एक कंटेनर ड्राइवर ने पहले राइट साइड का इंडिकेटर दिया और फिर अचानक लेफ्ट टर्न ले लिया। इससे लेफ्ट साइड खड़े बाइक सवार शिक्षक दंपति और उनके दो बच्चे चपेट में आ गए। कंटेनर बाइक पर चढ़ता चला गया रौंदते हुए निकल गया।

ड्राइवर ने गाड़ी नहीं रोकी, बल्कि रफ्तार और बढ़ा दी। मौके पर मौजूद लोगों ने करीब दो किमी पीछा किया। बड़ी मशक्कत के बाद कंटेनर को रोका गया, लेकिन चालक कूदकर फरार हो चुका था। बाद में पुलिस ने कंटेनर जब्त कर औरैया निवासी ड्राइवर सनी कुमार को गिरफ्तार किया।

कनाड़िया पुलिस ने सिमरोल के सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षिका प्रभा नीरज, निवासी पुष्परतन कॉलोनी की शिकायत पर केस दर्ज किया है। हादसे में प्रभा और उनके पति विवेक, जो एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं, गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। उनका कहना है एक सेकंड की लापरवाही ने पूरे परिवार की जिंदगी पलट दी।

निर्माणाधीन सड़क बनी जानलेवा, हेड कांस्टेबल की मौत
रफ्तार ही नहीं, अव्यवस्था भी जान ले रही है। राऊ रोड पर निर्माणाधीन सड़क पर सुरक्षा इंतजाम न होने से जिला पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कांस्टेबल महेश धाकड़ (52) की दर्दनाक मौत हो गई। वे बैंक ड्यूटी से लौट रहे थे, तभी बाइक सड़क किनारे निकले सरिए से टकरा गई।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पुराने लेवल से करीब दो फीट ऊंची बनाई जा रही है, लेकिन न बैरिकेडिंग है, न चेतावनी बोर्ड, न लाइट। सड़क से निकला सरिया बाइक के पहिए में घुस गया, टायर फट गया और महेश उछलकर करीब 20 फीट दूर सिर के बल गिरे। मौके पर ही मौत हो गई। एक महीने में 20 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं, लेकिन ठेकेदार और जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।

सड़क पर मदद के लिए रोती रही मासूम बेटी
हादसे के बाद सड़क पर जो मंजर था, उसने हर आंख नम कर दी। घायल दंपती की 11 वर्षीय बेटी आव्या ने बताया उसे और उसके छोटे भाई आयांश (5) को ज्यादा चोट नहीं आई, लेकिन माता-पिता सड़क पर तड़प रहे थे। वह मदद के लिए चीखती रही, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं रुका। बाद में कुछ बाइक सवारों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इनको देखकर साफ था हादसा पूरे परिवार को किस तरह तोड़ देता है।

120 की रफ्तार, मौत को खुला न्योता
प्रत्यक्षदर्शी विजयंत शर्मा ने बताया कंटेनर की स्पीड कम से कम 120 किमी प्रति घंटा थी। हम 90 की रफ्तार से भी उसका पीछा नहीं कर पा रहे थे। भागते समय ड्राइवर ने चार-पांच बाइक सवारों को टक्कर मारने की कोशिश की। कंटेनर को नहीं रोका जाता, तो और भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

घायल शिक्षिका प्रभा ने बताया पति और बच्चों के साथ विनोबा नगर में सास से मिलकर लौट रहे थे। आगे चल रहे कंटेनर ने राइट इंडिकेटर दिया, इसलिए वे उसकी लेफ्ट साइड में रुके। अचानक कंटेनर लेफ्ट मुड़ा और उन्हें टक्कर मार दी। गिरने के बाद भी ट्रक नहीं रुका। उसके पहिए उनके और उनके पति के पैरों व कमर पर चढ़ गए।

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