डॉ. डेंग के जानलेवा आशियाने पर निगम की नजर टेढ़ी: नोटिस देने की तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
तिलक नगर में नियम-कायदों का घोर उल्लंघन कर अवैध आशियाना बना रहे डॉ. डेंग उर्फ डॉ. सुनील गेहलोत पर अब निगम की टेढ़ी नजर पड़ गई है। नोटिस देने वाला है क्यों न उनका अवैध आशियाना तोड़ दिया जाए, जो नक्शे के विपरीत है। इस से बचने के लिए डॉ. डेंग इधर-उधर हाथपैर मार रहे हैं और नेताओं से लेकर अधिकारियों तक चक्कर काट रहे हैं।
खुलासा फर्स्ट प्रतिबद्ध पत्रकारिता के चलते डॉ. डेंग यानी डॉ. सुनील गेहलोत के कारनामों का खुलासा कर रहा है। उन्होंने 114 तिलक नगर में नक्शे में जी-2 के बजाय चार मंजिला आशियाना तान दिया है और पांचवीं मंजिल पर पेंट हाउस बना रहे हैं।
इस नियमविरुद्ध अवैध निर्माण के अलावा 960 स्क्वेयर फीट स्वीकृत से ज्यादा निर्माण किया है और नियमानुसार एमओएस भी नहीं छोड़ा है। ये मिनिमम ओपन स्पेस छोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने पूरे 1500 स्क्वेयर फीट प्लॉट पर निर्माण किया है।
यहां नर्सिंग होम शुरू करेंगे तो मरीजों के परिजनों के वाहन सड़क पर पार्क होंगे, जिससे ट्रैफिक में बाधा उत्पन्न होगी। इसकी डॉ. डेंग को कोई चिंता नहीं है। दूसरी बात ये है ईश्वर न करे यदि बिल्डिंग में आग या कोई और हादसा हुआ तो बचावकर्मियों का साजो-सामान के साथ अंदर पहुंच पाना मुश्किल हो जाएगा। इस प्रकार, पैसे की हवस में डॉ. डेंग ने इस भवन में आने वाले हर व्यक्ति की जान से खिलवाड़ का इंतजाम कर दिया है।
अस्पताल खुला तो हर मरीज, उनके परिजन और स्टॉफ की जान हर वक्त सांसत में ही रहने वाली है। पता नहीं, कब, कैसा, कौन सा हादसा हो जाए लेकिन डॉ. डेंग को मतलब केवल अपनी जेब भरने से है। जिस प्लॉट पर डॉ. डेंग आशियाना तान रहे हैं, वो आवासीय है।
अस्पताल शुरू करते हैं तो ये और भी बड़ा अपराध होगा। यदि आवासीय बनाकर बेचते हैं तो उसमें रहने वालों की जान से खिलवाड़ होगा। किसी भी स्थिति में उनके प्राण संकट में पड़ सकते हैं। डॉ. डेंग तो पूरा परिसर बेचकर अपनी तिजोरी भर लेंगे। लोग मरें तो मरें, उनकी बला से। जोन-10 की भवन अधिकारी टीना सिसौदिया, भवन निरीक्षक जीशान चिश्ती ने बताया डॉ. डेंग का निर्माण निगम की नजरों में आ गया है।
डिग्री पर भी संदेह
सूत्रों ने बताया डॉ. डेंग उर्फ डॉ. सुनील गेहलोत की डिग्री भी संदेह के घेरे में है क्योंकि आसपास के कई रहवासियों का कहना है इलाज से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। दूसरे डॉक्टर के पास गए तो पता चला डॉ. डेंग जो दवाएं दे रहे थे, वो उस बीमारी की थी ही नहीं। यानी वे या तो बीमारी समझ नहीं पाए थे या फिर दवाओं का प्रयोग कर रहे थे।
आसपास के लोगों को धमकाते हैं
जब आसपास के लोग उसके पास अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं तो उसने उल्टे उन्हें ही धमकाया जाता है। कहा मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं चाहूं जो करूं, मुझे रोकने वाले आप कौन होते हो? मेरी निगम अधिकारियों से सेटिंग है।
सारे के सारे मेरी जेब में हैं। मैं तो बनाऊंगा, आपसे बने जो कर लो। ऐसा डॉक्टर जो भ्रष्टाचार और अनियमितता की इमारंत खड़ी कर रहा है, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है कि वो मरीजों का ईमानदारी से इलाज करता होगा? उसका मकसद केवल और केवल मरीजों को लूटना और उनसे ज्यादा से ज्यादा पैसा निकालना ही है।
दवा और इलाज के नाम पर वो मरीजों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा, सहज समझा जा सकता है। ऐसा डॉक्टर समाज में भगवान का दर्जा तो नहीं रखता क्योंकि उसका मकसद मरीजों को ठीक करना कम, उनकी जेब खाली करना ज्यादा है।
डॉ. डेंग यानी डॉ. सुनील गेहलोत की पत्नी प्रेरणा भी डॉक्टर हैं और दंपत्ति मिलकर मरीजों का इलाज कैसे और कितना बेहतर करते होंगे, ये उनके भगवती चिकित्सालय के सामने बन रही अवैध इमारत जीता-जागता प्रमाण है।
आवासीय उपयोग की जमीन है ये
डॉ. डेंग यानी डॉ. सुनील गेहलोत जो अवैध इमारत बना रहे हैं वो आवासीय उपयोग की है। निगम रिकॉर्ड में संपत्ति आईडी1001071188 (पुरानी 40862131100198) है। इस भवन का जब खुलासा फर्स्ट की टीम ने अवलोकन किया तो पाया डॉ. डेंग ने जो निर्माण करवाया है, वो आवासीय नहीं लग रहा यानी घर नहीं हो सकता। निश्चित रूप से वो इसका उपयोग नर्सिंग होम के रूप में करेंगे।
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