विचारों के संगम ने रचा संवाद का उत्सव: लिट चौक-5 में पहले दिन विभिन्न विषयों पर बेबाक चर्चा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । कार्यक्रम संयोजक निखिल दवे ने बताया कि लिट चौक का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति और वर्तमान समय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कार्यक्रम संयोजक निखिल दवे ने बताया कि लिट चौक का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति और वर्तमान समय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का साझा मंच है। उन्होंने कहा कि लिट चौक विचारों के आदान-प्रदान, प्रश्न पूछने और सोच को व्यापक बनाने का अवसर प्रदान करता है।
पहला सत्र: क्लिक के पीछे छिपा अपराध
शुरुआती सत्र में डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया से लेखक नवीन चौधरी ने साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय पर चर्चा की। दंडोतिया ने कहा कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और यह किसी के भी साथ, किसी भी जगह हो सकता है।
उन्होंने बताया कि लेखक, व्यापारी, नौकरशाह, सेलिब्रिटी, पत्रकार और आम नागरिक सभी इसके शिकार बन रहे हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि केवल 20 प्रतिशत लोग ही साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराते हैं। उन्होंने जागरूकता पर जोर देते हुए बताया कि अब कई ऑनलाइन पोर्टल और एप के माध्यम से बिना थाने जाए भी शिकायत की जा सकती है।
उन्होंने लोगों को अज्ञात कॉल, लिंक, वेबसाइट और सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट से सावधान रहने की सलाह दी। दंडोतिया ने बताया कि इस वर्ष साइबर क्राइम विभाग ने पीड़ितों को लगभग 14 करोड़ रुपये वापस दिलवाए हैं।
दूसरा सत्र: शब्दों की स्त्रियां
इस सत्र में वाणी प्रकाशन की अदिति महेश्वरी और लेखिका अंकिता जैन से पत्रकार प्रियंका दुबे ने संवाद किया। अदिति महेश्वरी ने प्रकाशन जगत की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोग महंगी डायरी पर डिस्काउंट नहीं मांगते, लेकिन किताबों पर अपेक्षा रखते हैं, जबकि पुस्तक निर्माण में लेखन से लेकर छपाई तक अत्यधिक परिश्रम लगता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रकाशन क्षेत्र के संपादकीय मंडल में महिलाओं की भागीदारी आज भी कम है। लेखिका अंकिता जैन ने आधुनिकता के प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण किसान परंपरागत खेती से दूर होते जा रहे हैं। किसानों की समस्याओं का समाधान केवल कर्ज देकर नहीं किया जा सकता, इसके लिए नीतिगत और सामाजिक बदलाव जरूरी हैं।
चौथा सत्र: पर्यावरण और संस्कार
पर्यावरणविद पीपल बाबा ने लेखिका अंकिता चौधरी से बातचीत में कहा कि पेड़ ही परमात्मा हैं और जीवन का आधार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सरकार की ओर देखने के बजाय स्वयं पेड़ लगाएं और खेती से जुड़ें। उन्होंने कहा कि समाज में बड़ा बदलाव नई पीढ़ी, विशेषकर जेनजी, लेकर आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण में महिलाएँ अधिक संवेदनशील होती हैं और बिना किसी स्वार्थ के जुड़ जाती हैं।
पांचवां सत्र: बैटल फील्ड और न्यूज़ रूम
रिटायर्ड मेजर और पत्रकार गौरव आर्य ने कर्नल गौतम राजऋषि से बातचीत में भारत की सैन्य शक्ति और वैश्विक राजनीति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश के प्रति वफादारी सबसे जरूरी है और भारत ने अपनी शक्ति का परिचय विभिन्न अभियानों में दिया है।
छठा और अंतिम सत्र: परंपरा की गूंज, आज की आवाज प्रसिद्ध लोकगायक आदित्य गढ़वी ने आर्ट जर्नलिस्ट आलोक वाजपेयी से बातचीत में कहा कि लोक संगीत उनकी पहचान है और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने गुजराती लोकगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, जिस पर युवतियों ने गरबा भी किया। बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं ने आयोजन को यादगार बना दिया।
लिट चौक-5 का पहला दिन विचारों, संवाद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।
प्रतिष्ठित और गरिमामयी सालाना साहित्यिक एवं वैचारिक आयोजन लिट चौक का पांचवां सीजन शुक्रवार को ऐतिहासिक गांधी हॉल में शुरू हुआ। पहले ही दिन यह आयोजन विचारों, संवाद और विविध विषयों की गहराई के कारण खास रहा। दिनभर चले विभिन्न सत्रों में साहित्य, कला, लेखन, प्रकाशन, साइबर क्राइम, पर्यावरण, लोक संगीत, सोशल मीडिया, खेती और रक्षा जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों और युवाओं के बीच बेबाक और सार्थक चर्चाएं हुईं। सैकड़ों की संख्या में मौजूद विद्यार्थी वर्ग और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इन सत्रों में सक्रिय भागीदारी की।
तीसरा सत्र: हास्य और सोशल मीडिया
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर सलोनी गौर से *द लल्लनटॉप* के आशीष मिश्रा ने संवाद किया। सलोनी ने इंदौर की स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शहर उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने अपने कंटेंट क्रियेशन के सफर को साझा करते हुए बताया कि शुरुआत में ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपने काम में बाधा नहीं बनने दिया।
‘नजमा आपी’ किरदार की लोकप्रियता और नए कैरेक्टर विकसित करने की कहानी ने युवाओं को खासा प्रभावित किया। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि सोशल मीडिया की चकाचौंध देखकर इस क्षेत्र में न आएं, पढ़ाई को प्राथमिकता दें और हमेशा बैकअप प्लान रखें।
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