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फुल ड्रेस रिहर्सल में कलेक्टर ने नहीं किया सैल्यूट: नियमों पर उठे सवाल; राष्ट्रगान के सम्मान में चूक

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 जनवरी 2026, 9:09 पूर्वाह्न
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फुल ड्रेस रिहर्सल में कलेक्टर ने नहीं किया सैल्यूट

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आम लोगों की याददाश्त कमजोर होती है, इसलिए शायद ही किसी को 2015 के गणतंत्र दिवस को लेकर हुआ विवाद याद हो। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को राष्ट्रीय ध्वज को सलामी न देने पर ट्रोल किया गया था।

देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन इससे पहले इंदौर में आयोजित गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल में एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। शनिवार को नेहरू स्टेडियम में हुई रिहर्सल के दौरान जब राष्ट्रगान की धुन बजी और तिरंगे को सलामी दी जा रही थी, तब मंच पर मौजूद कई अधिकारी पूरे सम्मान के साथ सावधान मुद्रा में खड़े होकर सैल्यूट करते दिखे, लेकिन जिला प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा सैल्यूट नहीं किया गया।

इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में जनसंपर्क अधिकारी महिपाल तथा पुलिस आयुक्त संतोष सिंह उपस्थित थे। मंच पर मौजूद अन्य अधिकारियों ने राष्ट्रगान के दौरान तिरंगे को सम्मान दिया, लेकिन मुख्य अतिथि की भूमिका निभा रहे महिपाल द्वारा न तो परंपरा अनुसार साफा पहना गया और न ही कलेक्टर द्वारा राष्ट्रगान के समय अपेक्षित सम्मान प्रदर्शित किया गया।

यह कहा जा सकता है कि यह मात्र एक फुल ड्रेस रिहर्सल थी लेकिन क्या इसमें साफे का इंतजाम कर उसे पूरा नहीं किया जा सकता था या फिर फूल ड्रेस रिहलर्स सिर्फ ऑपचारिकता थी ।

क्या कहते हैं नियम?
राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़े नियम स्पष्ट हैं। भारत सरकार द्वारा जारी ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार—

राष्ट्रगान के समय सभी नागरिकों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना अनिवार्य है।

वर्दीधारी अधिकारी या जिनका सिर ढंका हो, उन्हें राष्ट्रगान के दौरान सैल्यूट करना आवश्यक होता है।

सिविल ड्रेस में मौजूद अधिकारी सिर खुला होने परसावधान मुद्रा में खड़े रह सकते हैं, लेकिन मंच पर मुख्य भूमिका में मौजूद प्रशासनिक अधिकारी से औपचारिक सम्मान की अपेक्षा की जाती है।

यही कारण है कि रिहर्सल में कलेक्टर द्वारा राष्ट्रगान के समय सैल्यूट न करना या स्पष्ट सम्मान की मुद्रा न अपनाना सवालों के घेरे में है।

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