जिस क्लिनिक ने ली जान, वह फिर शुरू: न्याय के लिए दंडवत कर जनसुनवाई में पहुंचा बेटा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक में गलत उपचार के कारण एक महिला की मौत के मामले में प्रशासन की भूमिका सवालों में है। जिस क्लिनिक को अवैध संचालन और लापरवाही के चलते सील किया गया
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक में गलत उपचार के कारण एक महिला की मौत के मामले में प्रशासन की भूमिका सवालों में है। जिस क्लिनिक को अवैध संचालन और लापरवाही के चलते सील किया गया था, उसके दोबारा खुलने से आहत मृतका के बेटे रोहन चौहान ने मंगलवार को जनसुनवाई में अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। दंडवत होकर अधिकारियों की चौखट तक पहुंचा और तंत्र की मिलीभगत पर गंभीर आरोप लगाए।
मामला अक्टूबर का है, जब 45 वर्षीय मंजू चौहान की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है गलत इंजेक्शन ने जान ली। तत्कालीन जांच में खुलासा हुआ था क्लिनिक का लाइसेंस डॉ. ज्ञानचंद पंजवानी के नाम पर था, लेकिन वहां इलेक्ट्रो होम्योपैथी डॉक्टर श्रीचंद बागेचा अवैध रूप से एलोपैथी से इलाज कर रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर एक्सपायरी दवाएं, अवैध रूप से लगे 15 बेड और भारी अनियमितताएं मिली थीं, इस पर 7 अक्टूबर को क्लिनिक सील कर दिया गया था। हैरानी तब हुई जब महज दो महीने बाद 26 दिसंबर को क्लिनिक दोबारा संचालित होने लगा।
डीएचओ ने दी यह सफाई
जनसुनवाई में रोहन ने आक्रोश जताते हुए कहा दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें क्लिनिक चलाने की अनुमति दे दी गई। एसडीएम प्रदीप सोनी ने युवक को सांत्वना दी और मामले की जानकारी ली। हालांकि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी की अनुपस्थित में जिला स्वास्थ्य अधिकारी(डीएचओ) डॉ. हेमंत गुप्ता ने सफाई दी शपथ पत्र के आधार पर अनुमति दी गई है, जहां अब केवल एलोपैथी डिग्रीधारी डॉक्टर ही बैठेंगे।
फिलहाल, पुलिस कार्रवाई और दोषियों पर शिकंजे को लेकर विभाग के पास कोई ठोस जवाब नहीं है, जिससे उसकी कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।
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