नगर सरकार का खजाना खाली हर माह बढ़ती जा रही देनदारी
निगम ठेकेदारों का 650 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अटका, ट्रिपल इंजन वाली नगर सरकार पैसे के लिए परेशान खुलासा फर्स्ट, इंदौर । केंद्र, प्रदेश में भाजपा सरकार होने के साथ ही नगर निगम में भी भाजपा की परि
Khulasa First
संवाददाता

निगम ठेकेदारों का 650 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अटका, ट्रिपल इंजन वाली नगर सरकार पैसे के लिए परेशान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्र, प्रदेश में भाजपा सरकार होने के साथ ही नगर निगम में भी भाजपा की परिषद बनी हुई है। इस तरह ट्रिपल इंजन वाली नगर सरकार का खजाना खाली होने से निगम के टेंडर पर काम करने वाले ठेकेदारों का करीब 650 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान नहीं हो रहा है।
हालांकि नगर निगम ने सात हजार करोड़ से अधिक का बजट पारित किया हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए। लेकिन अब वित्तीय हालत खस्ता होने से ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पाने से अधिकतर विकास योजनाएं ठप पड़ी है।
नगर सरकार भले ही ट्रिपल इंजन वाली कही जाए, पर हकीकत में नगर सरकार अपने ही किए गए कामों का भुगतान काम करने वाले ठेकेदारों को नहीं कर पा रही है। सालों से निगम का खाली खजाना खाली है, लेकिन निगम अफसरों व निगम परिषद के नेता अब तक इसे भरने की कारगर नीति नहीं बना सके हैं।
शहर के ही नगरीय प्रशासन मंत्री व मुख्यमंत्री के नजदीक माने जाने वाले महापौर भी निगम खजाने के लिए सरकार से कोई बजट राशि लेकर नहीं आ सके हैं। इसके चलते ही नगर निगम चुंगीकर, संपत्तिकर, जलकर, विज्ञापन कर व कचरा प्रबंधन शुल्क से जो वसूली कर पा रहा है, उससे जैसे-तैसे रोजमर्रा के खर्चे निकल रहे हैं।
सूत्रों की माने तो नवंबर माह में तो शासन ने चुंगीकर की राशि भी नहीं दी है। इससे इस माह निगम का खर्च ओव्हरड्राफ्ट से हो रहा है। लेखा विभाग के अफसर हर दिन निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव को निगम खजाना खाली होने की रिपोर्ट दे रहे हैं, लेकिन निगमायुक्त भी खजाना भरने की कारगर योजना बनाकर बनाने में असहाय साबित हुए हैं। इससे नगर निगम के ठेकेदारों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
सूत्रों की माने तो निगम के ठेकेदारों को करीब 650 करोड़ के बिलों का भुगतान होना है, लेकिन निगम खजाने में इतने पैसे नहीं है। इससे निगम की कई विकास योजनाएं ठप हो गई है। टेंडर जारी हो गए, वर्क आर्डर हो गए लेकिन ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं। इन ठेकेदारों को टेंडर निरस्त करने की धमकी दी गई तो भी कोई भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है।
कहा जा रहा है कि पुराने बिलों का भुगतान हो उसके बाद ही काम करेंगे। इस शर्त पर निगम के ठेकेदार अड़े हुए हैं। फिर भी अफसर दबाव बनाकर निगमायुक्त व महापौर के बताए कार्य हर माह बिना पैसे दिए ठेकेदारों से करा रहे हैं। इससे निगम में ठेकेदारों की बकाया राशि का ग्राफ हर माह बढ़ता जा रहा है।
परिषद की किरकिरी: नगर निगम की विकास की योजनाएं पैसे की कमी से प्रभावित होने लगी है। वहीं काम करने वाले ठेकेदार भी पैसे नहीं मिलने से परेशान होने लगे हैं। इससे निगम की भाजपा परिषद की किरकिरी होने लगी है। इसके चलते ही यह चर्चा शुरु हो गई है कि नगरीय प्रशासन मंत्री व सरकार जानबूझकर इंदौर निगम को बजट नहीं दे रही है।
संबंधित समाचार

पुलिस के हत्थे चढ़ा आदतन चोर, 2 लाख का माल बरामद:चोरी का माल रेलवे स्टेशन में बेचने की फिराक में घूम रहा था

नो-एंट्री में घुस गई हंस ट्रेवल्स की बस, केस दर्ज:ट्रैफिककर्मी से चालक ने किया विवाद

मौत की सवारी:अंधेरे में छलकते जाम और फार्म हाउस और रिसोर्ट की पार्टियों से निकल रही

एमडी ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार:कॉस्मेटिक दुकान के नाम पर बेच रहा था नशा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!