मुख्यमंत्री, मंत्री के निर्देश अधिकारियों के ठेंगे पर: पीडब्ल्यूडी के बड़े अधिकारी नियमों से नहीं; मनमर्जी से चला रहे विभाग
महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल । मप्र सरकार ‘सड़क विकास’ को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल करती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बार-बार स्पष्
Khulasa First
संवाददाता

महेश दीक्षित
98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मप्र सरकार ‘सड़क विकास’ को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल करती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बार-बार स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर बाधा नहीं आनी चाहिए, लेकिन विभाग की जमीनी हकीकत इन निर्देशों के उलट है।
पीडब्ल्यूडी के बड़े अधिकारी न मुख्यमंत्री की मंशा को गंभीरता से ले रहे हैं, न ही मंत्री के आदेशों को। नतीजन करोड़ों रुपये लागत वाली सड़क व पुल निर्माण परियोजनाएं अधिकारियों की मनमर्जी के चलते महीनों तक अधर में अटकी रहती हैं।
सूत्रों के अनुसार वित्तीय निविदा (फाइनेंसियल बिड) खुल जाने के बाद भी कई मुख्य अभियंता समय पर फाइलें आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। ई-टेंडरिंग प्रणाली की पारदर्शिता भी अधिकारियों के ‘टेबल अटकाओ नीति’ में दबकर रह जाती है।
इससे न सिर्फ योजनाओं में देरी हो रही है, बल्कि आम जनता को समय पर सड़कें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। बताया जाता है कि खाली पड़े मुख्य अभियंता पदों पर प्रभारी रूप में बैठे अधीक्षण यंत्री अपने ‘ऊंचे संपर्कों’ के चलते मनचाही फाइलें ही आगे भेजते हैं। वर्षों से इनकी शिकायतें होती रही हैं, लेकिन न कार्रवाई होती है, न जवाबदेही तय होती है।
विभागीय समीक्षा में खुली लापरवाही
हाल में ही लोक निर्माण मंत्री ने टेंडर कमेटी की समीक्षा बैठक में पाया कि ऑनलाइन बिड खुलने के बाद फाइलें बिना किसी उचित कारण महीनों तक रोककर रखी गईं। शासन स्तर पर अनुमोदन भेजने में भी अनावश्यक विलंब किया गया।इस पर नाराज होकर मंत्री ने चार मुख्य अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इनमें संजय मस्के (भोपाल), आनंद राणे (राष्ट्रीय राजमार्ग), वीएच झा (ग्वालियर) और आरएल वर्मा (जबलपुर-रीवा) के नाम शामिल हैं।
इन अधिकारियों ने रोकी टेंडर फाइलें
संजय मस्के- भोपाल परिक्षेत्र -निविदा क्रमांक 431509 -दो महीने से अधिक समय तक स्वीकृति प्रक्रिया लटकी रखी।विधानसभा प्रश्नों के उत्तर में भी लापरवाही बरतने का आरोप।
आरएल वर्मा रीवा-जबलपुर परिक्षेत्र
- निविदा क्रमांक 434923- बिड खुली 29 जुलाई 2025- शासन को तीन माह बाद भेजी स्वीकृति के लिए। मुख्यालय और क्षेत्रीय स्तर दोनों स्थानों पर टेंडर दबाए रखने का आरोप।
वीएच झा-ग्वालियर परिक्षेत्र - निविदा क्रमांक 425317, 437732 और 438625 - टेंडर फाइलें लगभग तीन माह तक रोके रखी। प्रमुख अभियंता कार्यालय को समय पर स्वीकृति नहीं भेजी।
आनंद राणे- राष्ट्रीय राजमार्ग
निविदा क्रमांक 865075, 829011, बिड खुलने के बाद भी दो माह तक रोककर रखा। ईएनसी दफ्तर में भेजने में बेवजह देरी की।
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