भागीरथपुरा कांड और ‘विवादित बयानों’ ने बढ़ाई मंत्री की मुश्किलें: दिल्ली दरबार में कैलाश विजयवर्गीय की पेशी...?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई करीब 16 मौतों और सैकड़ों लोगों के अस्पताल पहुंचने के बाद अब न्याय की आंच सीधे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचती नजर आ रही है।
दिल्ली आलाकमान तक शिकायतों का एक भारी-भरकम पुलिंदा पहुंच चुका है, जिसमें न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि मंत्री के विवादित बयानों और पत्रकारों के प्रति उनके व्यवहार का भी कच्चा चिट्ठा शामिल है।
शुक्रवार को नगर निगम के आला अफसरों पर हुई अचानक कार्रवाई को इसी दिल्ली दरबार के दबाव का नतीजा माना जा रहा है। ‘घंटा’ बयान के बाद देशभर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की किरकिरी और केंद्र की सख्त नाराजगी के बीच चर्चाएं गर्म हैं कि अधिकारियों के बाद अब अगली गाज खुद विजयवर्गीय पर भी गिर सकती है।
इसी बीच, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के एक संवेदनहीन बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। 15 मौतों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक विफलता के सवाल पर उन्होंने बेहद हल्के अंदाज में कह दिया जो हो गया सो हो गया!
आकाश विजयवर्गीय का यह तर्क कि ‘पानी गंदा होता तो लोग पीते ही नहीं’, न केवल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, बल्कि यह भाजपा की ‘जवाबदेही’ वाली छवि पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
अब देखना यह है कि क्या दिल्ली का नेतृत्व इस भारी जन-आक्रोश और अपनों की बयानबाजी पर कोई सख्त एक्शन लेकर इंदौर की जनता को संतुष्ट कर पाएगा?
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