बैंक की मनमानी पर लगा ब्रेक, वापस मिला सम्मान और हक: 24 घंटे में नीलामी निरस्त कर प्रॉपर्टी पर दिलाया कब्जा
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बैंक ने मर्जी से एक प्रॉपर्टी पर कब्जा कर नियमों के विरुद्ध गुपचुप तरीके से रातोरात नीलम कर दिया था। इस बात की जानकारी जैसे ही पीड़ित पक्ष को लगी तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां से अदालत ने एक करारा आदेश देते हुए 24 घंटे में नीलामी को निरस्त कर उन्हें वापस अपनी प्रॉपर्टी का कब्जा दिलाया।
हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने ऐसा आदेश पारित किया, जिसने कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर किए गए कब्जे को 24 घंटे के भीतर उलट दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के त्वरित हस्तक्षेप से नीलामी के नाम पर संपत्ति पर काबिज हुए व्यक्ति को कब्जा तुरंत लौटाने के आदेश दिए गए।
यह था मामला
अधिवक्ता समर्थ तिवारी ने बताया कि उनके पक्ष का सुनीता गुप्ता ने कुछ समय पहले नीडो फाइनेंस होम से अपनी दुकान के लिए फाइनेंस कराया था। जिसके बाद कुछ समय तक वह किसी कारणवश वह किस्त नहीं भर पाए। इसके बाद बैंक ने नियमों के विरुद्ध दुकान पर कब्जा कर लिया और उसे गुपचुप तरीके से नीलाम कर दिया। उनके पक्षकार की ओर से उन्होंने अदालत में अपना पक्ष रखा। जिस पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिए कि वापस नीलामीकर्ता से उनकी दुकान का हक वापस दिलाया जाए।
हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
मामले में कोर्ट ने साफ कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदेश के तहत नीलामी क्रेता को निर्देशित किया गया कि वह संपत्ति का कब्जा तत्काल मूल मालिक को सौंपे। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में विजय नगर थाना पुलिस को सुरक्षा और सहयोग के निर्देश दिए गए।
वापस मिला हक
कोर्ट के आदेश मिलते ही विजय नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई और मूल मालिक को उसकी संपत्ति का कब्जा विधिवत रूप से वापस दिलाया गया। पूरे घटनाक्रम को न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड में लिया गया।
हाई कोर्ट के आदेशों से खिलवाड़ नहीं
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि हाई कोर्ट के आदेश केवल कागजी नहीं होते। नीलामी की आड़ में किए गए किसी भी तरह के मनमाने या नियमविरुद्ध कब्जे पर न्याय पालिका ने सख्त संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
न्यायिक सख्ती से टूटी दबंगई
सूत्रों का कहना है किसी ने नीलामी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कब्जा किया है तो आगे और भी कठोर कार्रवाई हो सकती है। यह आदेश सभी के लिए चेतावनी है जो अदालत के फैसलों को हल्के में लेने की भूल करते हैं।
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