मस्कुलर डिस्ट्राफी के उपचार में प्रशासन पूर्ण मदद देगा: कलेक्टर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । राबर्ट नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर में मस्कुलर डिस्ट्राफी पर आयोजित कार्यशाला में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि इसके उपचार के लिए प्रशासन हर स्तर पर सहयोग करेगा। फिजियोथैरेपी च
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राबर्ट नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर में मस्कुलर डिस्ट्राफी पर आयोजित कार्यशाला में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि इसके उपचार के लिए प्रशासन हर स्तर पर सहयोग करेगा। फिजियोथैरेपी चिकित्सा से लेकर दवाइयां भी उपलब्ध करायेगा।
अस्पतालों में रेम्प लगाए जाएंगे। सामाजिक न्याय विभाग मरीजों के लिए दिव्यांग कार्ड भी बनाएगा। उन्होंने पीड़ित बच्चों से कहा कि घबराने और निराश होने की जरूरत नहीं है। वे अपनी पढ़ाई जारी रखे और दूसरों पर कम से कम निर्भर रहें।
उन्होंने सेंटर का अवलोकन किया और बच्चों से संवाद किया। सचिव डॉ.विजय सेन यशलाह ने सेवा गतिविधियों की जानकारी दी।
इंडियन मस्कुलर डिस्ट्राफी एसोसिएशन अध्यक्ष संजना गोयल ने कहा कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी लगातार बढ़ते रहने वाला मांसपेशियों का एक अनुवांशिक रोग है, जो पूरी तरह ठीक नहीं होता है। भारत में लगभग 4 हजार बच्चे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित पैदा होते हैं।
प्रबंधक सुनील न्याती ने बताया कि मध्यप्रदेश में मस्कुलर डिस्ट्राफी से ड़ेढ सौ बच्चे पीडि़त है। इनमें से 42 बच्चे अकेले इंदौर जिले में है। राबर्ट नर्सिंग होम में सोसायटी फॉर मस्कुलर डिस्ट्राफी सेंटर इसी वर्ष से शुरू किया गया है।
यहां रोजाना 25 से अधिक मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी से पीडि़त बच्चे आते है।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रचना दुबे, डॉ. गिरीराज चेंडक, फिजियोथेरेपिस्ट कोमल ठाकरे, विठ्ठल शर्मा, डायटिशियन डॉ. विजेता जैन ने अपनी सेवाएं दी। स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेमंत गुप्ता ने कहा कि नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जाएगी।
भारत में लगभग 4 हजार बच्चे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित पैदा होते हैं।
मध्यप्रदेश में मस्कुलर डिस्ट्राफी से ड़ेढ सौ बच्चे पीडि़त है।
इनमें से 42 बच्चे अकेले इंदौर जिले में है।
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