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खुलासे के बाद सिंडिकेट भूमिगत: सेटिंग में जुटे सफेदपोश; मामला जीएसटी की नाक के नीचे करोड़ों की टैक्स चोरी का

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 फ़रवरी 2026, 10:47 पूर्वाह्न
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खुलासे के बाद सिंडिकेट भूमिगत

स्पेशल पावर की सूचना पहले माफियाओं तक, गार्डों से अफसरों तक बंदी का खेल

डामर सप्लाई से बिल्टियों तक फैला नेटवर्क, गायब हुए विवेक-लल्लू

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जीएसटी विभाग की नाक के नीचे कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से गारंटी पर काम उठाकर टैक्स चोरी के कथित सिंडिकेट का खुलासा करने के बाद पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया। बड़े पैमाने पर बिल्टियों के जरिए करोड़ों की कर चोरी किए जाने के मामले के बीच सिंडिकेट से जुड़े लोगों की गतिविधियां अचानक ठप पड़ गईं। गार्ड सहित कई चेहरे भूमिगत हो गए हैं। एचओ में बैठे अधिकारी जानकारी जुटाने में लगे हैं।

उल्लेखनीय है कि खुलासा फर्स्ट ने कल के अंक में जीएसटी विभाग में फैले भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए ‘जिम्मेदार बने अंधे गूंगे, बहरे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित करते हुए बताया था कि विवेक और लल्लू विभिन्न बिल्टियों के नाम से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी गिरोह को संचालित कर रहे हैं।

इसके चंद घंटों के भीतर चेतक चेंबर स्थित अफीम गोदाम से संचालित होने वाले लेन-देन की डील पर भी ब्रेक लग गया है। रोजाना गोदाम परिसर में खड़ी रहने वाली विवेक की दोनों कारें भी मौके से हटवा दी गईं। विवेक सिलावट और राजेंद्र यादव उर्फ लल्लू भूमिगत हो गए।

चर्चाओं की पड़ताल शुरू की
टैक्स चोरी का कथित कारनामा बेनकाब होते ही एक रिटायर्ड राज्य कर अधिकारी सक्रिय हो गया है और ‘सेटिंग’की कोशिशें शुरू कर दीं। वहीं, डिविजन-3 में सात वर्षों से पदस्थ एक अधिकारी ने विभाग के भीतर चल रही चर्चाओं की पड़ताल शुरू कर दी ताकि एक्शन होने पर टैक्स चोरों को बचाने के रास्ते पहले से निकाल लिए जाएं।

पता चला है, एचओ से जारी होने वाली स्पेशल पावर की सूचना सबसे पहले ग्यारंटी का काम करने वाले विभाग से जुड़े विवेक सिलावट, लल्लू और दो अन्य तक पहुंचती है। इस काम के लिए अंदर बैठे ‘विभीषण’ से लेकर गार्डों तक का पैसा बंधा रहता है, ताकि सिंडिकेट माफियाओं की गाड़ियां ना पकड़ाए।

चूंकि विवेक और लल्लू सालों से अधिकारियों के साथ मिलकर स्पेशल पावर में ड्यूटी भी करते आए हैं, जिसके चलते दोनों की विभाग में अच्छी खासी पकड़ है। इसी का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर एक से दूसरे राज्य तक माल भेजना शुरू कर दिया। सूत्र बताते हैं कि यह सिंडिकेट डामर सप्लाई के काम में भी सक्रिय है।

मालूम हो खुलासा फर्स्ट ने इनकी आईटीआर, यूटीआई, रायपुर ऊंजा और ऊंजा कार्गो सहित अन्य बिल्टियों का खुलासा किया था। अब विवेक सिलावट को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वह करीब आठ साल पहले जीएसटी विभाग में प्राइवेट ड्यूटी पर लगा था, मामूली तनख्वाह पर नौकरी करता था।

तब उसके पास कुछ नहीं था। आज दो महंगी कारें और करोड़ों का प्लॉट होने की बात सामने आई है। सवाल उठता है कि इतनी संपत्ति का स्रोत क्या है? क्या जीएसटी विभाग इसकी जांच करवाएगा।

गार्डों से मिले अफसरों को भूमिका की होगी जांच
खुलासा फर्स्ट के खुलासे के बाद टैक्स चोरों को संरक्षण देने वाले अफसरों की जानकारी जुटाना शुरू कर दी है। गार्डों के साथ मिलकर बिना ईवे बिल के ट्रक कच्चे पर दिल्ली, मुंबई राजस्थान और आउट टू आउट मूंगफली दाने और तेल भेज रहे हैं।

गार्डों को संरक्षण देकर सरकार को चपत लगाने और विभाग की आंख में धूल झोंकने वाले अफसर भी रडार पर हैं। सूत्रों ने बताया कि जल्द वह अफसर जांच के दायरे में होंगे, जिन्होंने विभाग के रहते हुए इस तरह का कृत्य किया। खुलासा फर्स्ट इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े लोगों के नामों का सिलसिलेवार खुलासा करेगा।

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