58 स्कूलों के छात्र कर रहे हैं अंकसूची का इंतजार: बीआरसी का डीपीसी को पत्र- नहीं मिली पांचवीं की मार्कशीट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पांचवी के विद्यार्थियो की वार्षिक परीक्षा शुरु होने को है लेकिन बीते वर्ष परीक्षा देने वाले 58 स्कूलो के हजारों विद्यार्थियों को अंकसूची नहीं मिली है। खुलासे पर डीपीसी ने बीआरसी से प्रतिवेदन मांगा। जवाब में बीआरसी ने डीपीसी को लिखा- अंकसूचियां मिली ही नहीं है। अब डीपीसी शासन से अंकसूचियां आई या नहीं आई इसकी जांच करा रहे हैं। यानी कब मिलेगी, इसको लेकर असमंजस है।
स्कूल शिक्षा विभाग में जिस काम में कमाई नहीं होती, उसे अटका देते है। ऐसा ही पांचवी के विद्यार्थियो को दी जाने वाली अंकसूचियो को लेकर हो रहा है। बताया जाता है बोर्ड की परीक्षा होने से इनकी अंकसूची शासन द्वारा पहुंचाई जाती है। जिला परियोजना समन्वयक संजय मिश्रा को पता ही नही है विभाग ने अंकसूची भेजी या नहीं।
बीआरसी द्वारा 6 जनवरी को पत्र लिखकर 58 स्कूलो के पांचवी कक्षा के विद्यार्थियो की अंकसूची मांगी। तब मिश्रा की नींद खुली और उन्होने डीपीसी से अंकसूची को लेकर प्रतिवेदन मांगा। बीआरसी ने प्रतिवेदन में बताया उन्हें 58 स्कूलो की अंकसूचियां नही मिली है। बीआरसी के जबाब से डीपीसी कार्यालय में हडक़ंप मच गया। डीपीसी भी घबराए हुए है। उन्होंने अंकसूची आई है या नहीं, इसकी जांच शुरु कराई है। लेकिन अब तक पता नहीं चला है।
लेन-देन की चर्चा
सूत्रों की मानें तो अंकसूची मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर रोड़ा अटकाया है। बताया जाता है निजी स्कूल संचालकों पर अंकसूची के लिए जबरिया लेन-देन का दबाब बनाया गया। वे दबाब में नही आए तो डीपीसी ने जानबूझकर अंकसूचियां रोक दी।
वहीं चर्चा यह भी है संभवत: अंकसूची शासन ने तो भेजी होगी अधिकारियों ने जानबूझकर गायब करा दी। कारण जो भी हो, हजारों बच्चों को अंकसूची नही मिली है। कब मिलेगी इसका भी जबाब अफसरों के पास नही है।
विवाद का कारण बनी अंकसूची
निजी स्कूलों के बच्चे व उनके परिजन रोज स्कूल पहुंचकर शिक्षकों से विवाद कर अंकसूची की मांग कर रहे है। जब कि स्कूल संचालक उनको बीआरसी कार्यालय जाने का सुझाव देते है। वही बीआरसी डीपीसी से मिलने को कह देते है। इस तरह बच्चे, परिजन व स्कूल संचालक अंकसूची के लिए महीना से इधर से उधर चक्कर लगा रहे है। लेकिन अंकसूची नहीं मिल रही है। इससे अधिकतर स्कूलो में विवाद हो रहे है।
डीपीसी ने यह बताया
डीपीसी से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया पता करना है अंकसूची आई कि नहीं। आई तो कहां गई? नहीं आई तो शासन को पत्र लिखकर अंकसूचियां मंगाई जाएगी। डीपीसी के इस दावे स असमंजस बढ़ गया है।
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